दिशा सालियान केस में बड़ा मोड़, CBI ने दर्ज की FIR
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंमुंबई में दिशा सालियान केस ने करीब छह साल बाद एक बार फिर बड़ा मोड़ लिया है। दिशा सालियान केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने FIR दर्ज कर जांच की औपचारिक शुरुआत कर दी है। यह कदम बॉम्बे हाई कोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें अदालत ने दिशा की मौत की परिस्थितियों की नए सिरे से जांच CBI से कराने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने अपने आदेश में पुलिस की पिछली जांच में कई विसंगतियों का उल्लेख किया था। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि FIR दर्ज होने का मतलब किसी व्यक्ति को दोषी या आरोपी घोषित करना नहीं है। किसी व्यक्ति को आरोपी तभी माना जाएगा, जब जांच में पर्याप्त सामग्री सामने आए।
छह साल बाद क्यों फिर खुला दिशा सालियान केस?
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत मानते हुए ADR यानी Accident Death Report दर्ज की थी।
दिशा कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी थीं। दिशा की मौत के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी मुंबई स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए थे।
दोनों घटनाओं के बीच समय का अंतर कम होने के कारण उस समय कई तरह की चर्चाएं और अटकलें सामने आई थीं। हालांकि, इन दोनों मौतों के बीच किसी आपराधिक संबंध का निष्कर्ष केवल जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने जांच में क्या सवाल उठाए?
दिशा के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की नए सिरे से जांच की मांग की थी। 2 सितंबर को न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजितसिंहा भोंसले की पीठ ने CBI जांच का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि पुलिस की जांच कई सवालों का जवाब देने के बजाय नए सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने जांच में कई ऐसी परिस्थितियों का उल्लेख किया जिन्हें देखते हुए FIR दर्ज कर व्यापक जांच जरूरी मानी गई।
रिपोर्टों के अनुसार, घटनास्थल का पंचनामा काफी देर से किए जाने, CCTV और पुलिस की मौजूदगी से जुड़े सवाल, फोरेंसिक सामग्री तथा दिशा के मोबाइल और लैपटॉप को जब्त करने में हुई देरी जैसे पहलुओं पर अदालत ने गौर किया।
हालांकि, कोर्ट ने इन बिंदुओं को किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित करने वाला निष्कर्ष नहीं माना। इन सभी पहलुओं की जांच अब CBI को स्वतंत्र रूप से करनी है।
CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की
हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर ली है। इसके साथ ही करीब छह साल पुराने मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसी के स्तर पर आगे बढ़ेगी।
हाई कोर्ट ने CBI को एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने तथा दिशा के पिता का बयान दर्ज करने का भी निर्देश दिया था। जांच अधिकारी को दिशा की मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों की पड़ताल करने को कहा गया है।
अब CBI घटनास्थल, उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य, CCTV फुटेज, फोरेंसिक सामग्री, पोस्टमार्टम से जुड़े रिकॉर्ड और पहले हुई पुलिस जांच की जानकारी की समीक्षा कर सकती है।
FIR में नाम आने का मतलब क्या है?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FIR दर्ज होने को किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में तभी माना जाए, जब जांच के दौरान उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री से उचित संदेह पैदा हो। अदालत ने किसी खास व्यक्ति के खिलाफ अपराध या दोष का निष्कर्ष नहीं दिया है।
इसलिए सोशल मीडिया या सार्वजनिक चर्चाओं में चल रहे अलग-अलग दावों को जांच के अंतिम निष्कर्ष के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।
सुशांत सिंह राजपूत केस से क्या है संबंध?
दिशा सालियान की मौत के कुछ दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया था।
सुशांत की मौत की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी। CBI ने अपनी जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था। हालांकि संबंधित अदालत में उस क्लोजर रिपोर्ट पर अंतिम न्यायिक निर्णय का मुद्दा अलग प्रक्रिया का हिस्सा है।
दिशा और सुशांत की मौतों के बीच कथित संबंध को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। लेकिन दोनों मामलों के बीच आपराधिक कड़ी है या नहीं, यह अब दिशा सालियान मामले में CBI की जांच के तथ्यों से ही स्पष्ट हो सकता है।
अब CBI की जांच में क्या-क्या सामने आ सकता है?
CBI के सामने सबसे बड़ा सवाल दिशा की मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करना होगा। एजेंसी यह देख सकती है कि पहले की जांच में सामने आए सवालों और विसंगतियों की वास्तविक वजह क्या थी।
जांच के दौरान गवाहों के बयान, तकनीकी साक्ष्य, CCTV फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड दोबारा जांचे जा सकते हैं।
इसके अलावा CBI यह भी देखेगी कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। हाई कोर्ट ने भी जांच को सभी पहलुओं से करने का निर्देश दिया है।
क्या अब दिशा सालियान की मौत का सच सामने आएगा?
CBI द्वारा FIR दर्ज होने से मामले की जांच का एक नया चरण शुरू हुआ है। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि CBI पुराने रिकॉर्ड और नए साक्ष्यों की जांच के बाद क्या तथ्य सामने रखती है। यदि जांच में अपराध के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल छह साल पुराने इस मामले में CBI की एंट्री ने दिशा सालियान की मौत को लेकर चल रही बहस को फिर से तेज कर दिया है। अब सबकी नजर केंद्रीय एजेंसी की जांच और उसके निष्कर्ष पर है।
