देवेश कुमार कौन हैं? MLC सीट छोड़ने के बाद अब मिली बड़ी जिम्मेदारी
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बिहार बीजेपी के नेता देवेश कुमार एक बार फिर चर्चा में हैं। देवेश कुमार ने जुलाई 2026 में बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद उनकी खाली हुई सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा गया। अब बीजेपी ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए देवेश कुमार को अरुणाचल प्रदेश का प्रभारी बनाया है। यह नियुक्ति बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से राज्यों के लिए जारी नई प्रभारी सूची का हिस्सा है।
इससे पहले 31 अगस्त को बिहार सरकार ने देवेश कुमार को बिहार राज्य योजना पर्षद का उपाध्यक्ष बनाया था। इस पद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। अब करीब तीन सप्ताह बाद उन्हें पार्टी संगठन में एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
कौन हैं देवेश कुमार?
देवेश कुमार का जन्म 30 अगस्त 1964 को समस्तीपुर जिले के पूसा प्रखंड के मोहम्मदपुर देवपाट गांव में हुआ था। वह स्वतंत्रता सेनानी और किसान नेता यमुना कारजी के पौत्र हैं। उनका परिवार लंबे समय से सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है।
देवेश कुमार ने एमए और एमफिल तक पढ़ाई की है। छात्र जीवन में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP से जुड़े। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया और फिर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
बीजेपी में आने के बाद उन्होंने संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं। वह बिहार बीजेपी में प्रवक्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष और महासचिव जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। बाद में उन्हें मिजोरम बीजेपी के प्रभारी की जिम्मेदारी भी मिली।
2021 में बने थे विधान परिषद सदस्य
देवेश कुमार को मार्च 2021 में राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया था। उनका कार्यकाल 2027 तक चलना था, लेकिन उन्होंने जुलाई 2026 में एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया।
उनके इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में यह चर्चा तेज हुई कि खाली हुई सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सकता है। दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं और उस समय बिहार सरकार में मंत्री थे।
बाद में राज्यपाल कोटे से खाली सीट पर दीपक प्रकाश का मनोनयन हुआ। इस तरह देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद विधान परिषद में दीपक प्रकाश के लिए रास्ता साफ हुआ।
हालांकि, देवेश कुमार ने सार्वजनिक रूप से अपने इस्तीफे को अपनी इच्छा से लिया गया फैसला बताया था। इसलिए इसे केवल किसी एक व्यक्ति के लिए लिया गया फैसला बताना आधिकारिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है।
MLC पद छोड़ने के बाद मिला कैबिनेट मंत्री दर्जा
विधान परिषद से इस्तीफे के कुछ समय बाद ही देवेश कुमार को बिहार राज्य योजना पर्षद का उपाध्यक्ष बनाया गया। 31 अगस्त 2026 को जारी नियुक्ति में उन्हें तीन साल या अगले आदेश तक, जो पहले हो, पद पर रहने की बात कही गई थी।
इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। योजना पर्षद की जिम्मेदारी राज्य की विकास योजनाओं और नीतिगत विषयों से जुड़ी होती है।
यानी एमएलसी पद छोड़ने के बाद देवेश कुमार की भूमिका खत्म नहीं हुई। पहले उन्हें राज्य सरकार से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली और अब पार्टी संगठन ने उन्हें एक राज्य की राजनीतिक-संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंप दी है।
अब अरुणाचल प्रदेश के प्रभारी बने
बीजेपी ने 23 सितंबर 2026 को देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए। इस सूची में देवेश कुमार को अरुणाचल प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।
वहीं बिहार की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को दी गई है। उनके साथ संगीता यादव और रोहन गुप्ता को सह प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा बिहार के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय को असम का प्रभारी बनाया गया है।
इस फेरबदल के बाद बिहार बीजेपी से जुड़े कई नेताओं को दूसरे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिली हैं। बीजेपी के लिए राज्य प्रभारी का काम संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय, पार्टी कार्यक्रमों की निगरानी तथा संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़ा होता है।
विवादों के कारण भी चर्चा में रहे
देवेश कुमार का राजनीतिक सफर केवल संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहा। 2022 में एक सड़क हादसे के बाद उन पर शराबबंदी कानून के उल्लंघन का आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जांच में शराब की पुष्टि का दावा किया गया था, जबकि देवेश कुमार ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताया था।
फरवरी 2026 में बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के साथ उनकी तीखी बहस भी चर्चा में रही। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए थे।
इन घटनाओं के बावजूद बीजेपी संगठन में देवेश कुमार को लगातार अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। मिजोरम के प्रभारी से लेकर बिहार राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष और अब अरुणाचल प्रदेश के प्रभारी तक उनका संगठनात्मक दायरा बढ़ा है।
आगे क्या होगी देवेश कुमार की भूमिका?
अरुणाचल प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के बाद अब देवेश कुमार की भूमिका बिहार से बाहर बीजेपी संगठन में होगी। उन्हें वहां पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों और केंद्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय की जिम्मेदारी निभानी होगी।
उनका राजनीतिक सफर छात्र संगठन से शुरू होकर पत्रकारिता, बिहार बीजेपी संगठन, विधान परिषद और राज्य सरकार की जिम्मेदारी तक पहुंचा है। अब अरुणाचल प्रदेश का प्रभार उनके संगठनात्मक करियर का एक नया अध्याय है।
सार: देवेश कुमार ने जुलाई में बिहार MLC पद से इस्तीफा दिया, अगस्त में बिहार राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष बने और सितंबर में बीजेपी ने उन्हें अरुणाचल प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया।
