सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, MCD और DU को भी ठहराया जिम्मेदार

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


 

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस त्रासदी के लिए केवल इमारत मालिकों को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि बाहर से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त आवासीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी पीजी में रहने को मजबूर होना पड़ता है। अदालत ने इसे भी व्यापक समस्या का हिस्सा माना।

हाईकोर्ट ने राहत-बचाव अभियान तेज करने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान में और तेजी लाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि मलबे में फंसे लोगों की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और MCD की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में मौजूद थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बचाव अभियान लगातार चल रहा है और अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी स्थिति के अनुसार फैसले ले रहे हैं और प्रभावित लोगों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।

MCD के साथ DU की भूमिका पर भी उठे सवाल

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ भवन मालिकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने MCD की जिम्मेदारी के साथ-साथ DU की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया।

कोर्ट के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए दूसरे शहरों से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी पीजी में कमरा लेना पड़ता है। अदालत ने माना कि छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास की व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण है।

सत्य निकेतन की जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए लड़कों का पीजी संचालित हो रहा था। बताया गया कि इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था, उसी दौरान यह हादसा हुआ।

PIL पर सुनवाई, 10 दिन में जवाब दाखिल करने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था। हादसे को लेकर तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले को उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

पीठ ने संबंधित अधिकारियों को याचिका पर अलग-अलग जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 तारीख तय की है।

सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना ने दिल्ली में पुराने भवनों की सुरक्षा, पीजी आवास और छात्रों के लिए सुरक्षित रहने की व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब जांच का दायरा केवल भवन मालिकों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहने के संकेत मिल रहे हैं।

अदालत के सामने अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग और संस्थान छात्रों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने तथा भवनों की निगरानी में अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभाते हैं। आने वाली सुनवाई में अधिकारियों के जवाब से मामले के कई पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1