बक्सर में छात्राओं से दुष्कर्म के आरोप में दो शिक्षक बर्खास्त, सरकारी नौकरी पर भी रोक
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के बक्सर शिक्षक कांड में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। बक्सर शिक्षक कांड में छात्राओं से यौन शोषण, आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने और धमकी देने के आरोपों की विभागीय जांच के बाद दो शिक्षकों को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। दोनों अब भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होंगे। यह कार्रवाई डुमरांव प्रखंड के नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय से जुड़े मामले में की गई है।
बर्खास्त शिक्षकों की पहचान वीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार के रूप में हुई है। विभागीय जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाने के बाद बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के नियम 14 (XI) के तहत सेवा समाप्त करने का फैसला लिया गया।
विभागीय जांच के बाद दोनों शिक्षकों पर कार्रवाई
शिक्षा विभाग के अनुसार, दोनों शिक्षकों को 2 सितंबर 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। इसके अगले दिन 3 सितंबर को उनके खिलाफ आरोप तय कर विभागीय जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान छात्राओं से दुर्व्यवहार, आपत्तिजनक वीडियो के प्रसार और ऑडियो संदेशों के जरिए धमकी देने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। जांच रिपोर्ट में आरोप प्रमाणित होने के बाद विभाग ने दोनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
सरकारी सेवा से बर्खास्तगी के साथ ही दोनों शिक्षकों को भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि वे आगे किसी सरकारी विभाग में नई नियुक्ति हासिल नहीं कर सकेंगे।
छात्राओं को धमकी और ब्लैकमेल करने का आरोप
मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों और छात्राओं के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की थी। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि दोनों शिक्षक छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार करते थे और आपत्तिजनक वीडियो के जरिए उन्हें डराने या दबाव में रखने की कोशिश करते थे।
रिपोर्टों के अनुसार, एक आरोपी शिक्षक पर छात्राओं को परीक्षा में मदद या पास कराने का लालच देने और बाद में उनका शोषण करने के आरोप लगे। पुलिस शिकायत में यह भी कहा गया कि वीडियो और ऑडियो के जरिए छात्राओं पर दबाव बनाया गया।
मामले से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद घटना ने गंभीर रूप ले लिया। हालांकि, नाबालिग पीड़िताओं की पहचान और उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित है। इसलिए वायरल वीडियो को साझा करना या उससे जुड़ी पहचान उजागर करना उचित नहीं है।
हेडमास्टर पर भी गंभीर आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार
इस मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी का नाम भी सामने आया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने दोनों शिक्षकों को बचाने और मामले को दबाने की कोशिश की।
पुलिस ने प्रधानाध्यापक को भी गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ यह भी जांच की गई कि क्या उन्होंने शिकायत मिलने के बाद समय पर अधिकारियों को जानकारी दी या नहीं। जिला प्रशासन ने इस मामले में विभागीय स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
प्रधानाध्यापक का नाम राजकीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चयनित शिक्षकों की सूची में भी था। मामला सामने आने के बाद उन्हें पुरस्कार से वंचित करने की कार्रवाई की मांग उठी थी। इससे घटना की गंभीरता और प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही को लेकर चर्चा तेज हुई।
POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मामले में पुलिस और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने दोनों शिक्षकों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई करने और गिरफ्तारी के बाद मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने को कहा था।
पॉक्सो एक्ट यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाला कानून नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में लागू होता है। इस कानून के तहत जांच, पीड़ितों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया के लिए विशेष प्रावधान हैं।
मामले में पुलिस ने शिक्षकों और प्रधानाध्यापक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आगे की कार्रवाई पुलिस जांच, मेडिकल और डिजिटल साक्ष्यों तथा अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगी।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
बक्सर की घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिकायतों की निगरानी और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्कूलों में छात्राओं को सुरक्षित माहौल देना केवल शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की भी जिम्मेदारी है।
ऐसे मामलों में शिकायत मिलने के बाद तत्काल रिपोर्टिंग, पीड़ितों की सुरक्षा, आरोपियों से दूरी और निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जाती है। किसी भी शिकायत को दबाने या पीड़ितों पर समझौते का दबाव बनाने से मामला और गंभीर हो सकता है।
शिक्षा विभाग की बर्खास्तगी कार्रवाई विभागीय स्तर पर हुई है। आपराधिक मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद होगा। फिलहाल पुलिस जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई पर नजर बनी हुई है।
