जमाबंदी से मोबाइल नंबर और आधार कैसे लिंक करें? नया तरीका

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें

 


जमाबंदी से मोबाइल नंबर और आधार कार्ड लिंक करने का नया तरीका क्या है?

नमस्कार दोस्तों! बिहार में जमीन-जायदाद का मामला हमेशा से ही काफी पेचीदा रहा है। बात चाहे राजधानी पटना की हो और सभी बिहार के डिस्ट्रिक्ट की, हर जगह जमीन को लेकर विवाद और फर्जीवाड़े की खबरें हम रोज अख़बारों में पढ़ते हैं। कोई किसी और की जमीन बेच देता है, तो कोई चुपके से दाखिल-खारिज (Mutation) करवा लेता है और असली मालिक को भनक तक नहीं लगती।

एक लोकल रिपोर्टर होने के नाते मैं आए दिन अंचल कार्यालय (Block Office) और सीओ (CO) ऑफिस के बाहर लोगों को अपनी ही जमीन बचाने के लिए धक्के खाते देखता हूँ। इसी फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बहुत ही कड़ा और बढ़िया कदम उठाया है। अब हर रैयत (जमीन मालिक) को अपनी जमाबंदी से मोबाइल नंबर और आधार कार्ड लिंक करना अनिवार्य किया जा रहा है।

अगर आपने अभी तक अपनी जमीन के कागजात को अपने मोबाइल और आधार से नहीं जोड़ा है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज मैं आपको बिल्कुल आसान भाषा में और ग्राउंड लेवल की सच्चाई के साथ बताऊंगा कि इसका नया ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीका क्या है, ताकि आपको किसी दलाल के चक्कर में न पड़ना पड़े।

जमाबंदी में आधार और मोबाइल लिंक करना आखिर क्यों जरूरी है?

इससे पहले कि हम प्रोसेस समझें, यह जानना जरूरी है कि सरकार यह सब क्यों करवा रही है और इससे आपको क्या फायदा होगा:

  • फर्जीवाड़े पर 100% लगाम: जब आपका आधार और मोबाइल नंबर जमाबंदी से जुड़ जाएगा, तो कोई भी धोखे से आपकी जमीन की रजिस्ट्री या दाखिल-खारिज नहीं करवा पाएगा।

  • SMS अलर्ट की सुविधा: बैंक खाते की तरह ही, अब आपकी जमीन में कोई भी छेड़छाड़ होगी—जैसे कोई रसीद काटेगा या म्यूटेशन के लिए अप्लाई करेगा, तो तुरंत आपके मोबाइल पर एक SMS आ जाएगा कि आपकी जमाबंदी के साथ कोई प्रक्रिया की जा रही है।

  • पारदर्शिता (Transparency): बिहार सरकार अपने पूरे लैंड रेकॉर्ड्स को डिजिटल कर रही है। आधार लिंक होने से एक आदमी के नाम पर बिहार में जहाँ-जहाँ जमीन है, वह सब एक जगह लिस्ट हो जाएगी, जिससे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ सही आदमी को मिलेगा।

  • भविष्य की परेशानियां खत्म: आने वाले समय में अगर आप अपनी जमीन बेचना चाहेंगे या बंटवारा करना चाहेंगे, तो बिना आधार लिंक वाली जमाबंदी में बहुत दिक्कत आएगी। सिस्टम उसे आगे प्रोसेस ही नहीं करेगा।

लिंक करने के लिए कौन-कौन से डाक्यूमेंट्स चाहिए? (Required Documents)

ऑनलाइन या ऑफलाइन, किसी भी तरीके से यह काम करने के लिए आपके पास ये चीजें तैयार होनी चाहिए:

  1. आधार कार्ड: जमीन मालिक (जिसके नाम पर जमाबंदी कायम है) का ओरिजिनल आधार कार्ड।

  2. चालू मोबाइल नंबर: वह नंबर जो आधार से लिंक हो (ताकि OTP आ सके) और जो हमेशा आपके पास रहता हो।

  3. जमीन की रसीद या एलपीसी (LPC): आपकी जमीन की करेंट लगान रसीद, जिसमें आपका खाता, खेसरा, भाग वर्तमान और पृष्ठ संख्या स्पष्ट रूप से लिखा हो।

  4. जमाबंदी रैयत का नाम: पोर्टल पर और आधार कार्ड पर नाम की स्पेलिंग (Spelling) लगभग समान होनी चाहिए।

ऑनलाइन तरीका: जमाबंदी से मोबाइल नंबर और आधार लिंक कैसे करें? (Step-by-Step Guide)

बिहार सरकार ने 'बिहार भूमि' (Bihar Bhumi) पोर्टल को काफी अपडेट कर दिया है। अब आप घर बैठे अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप से यह काम कर सकते हैं। इसके लिए सरकार ने SMS Alert Service और Parimarjan Plus का सिस्टम लागू किया है। नीचे दिए गए स्टेप्स को बिल्कुल ध्यान से फॉलो करें:

स्टेप 1: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर में गूगल क्रोम (Google Chrome) खोलें और बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएं।

स्टेप 2: अपना अकाउंट बनाएं (Public Login) अगर आप पहली बार इस पोर्टल पर आए हैं, तो आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा।

  • होमपेज पर आपको "SMS Alert सेवा प्राप्त करें" या "लॉगिन" का ऑप्शन दिखेगा।

  • 'Registration' पर क्लिक करें। यहाँ अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, और पूरा पता भरें।

  • 'Register' बटन दबाते ही आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा। उसे डालकर सबमिट करें। अब आपका अकाउंट बन गया है।

स्टेप 3: पोर्टल में लॉगिन करें रजिस्ट्रेशन के बाद वापस होमपेज पर आएं और अपने मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड (Captcha) को डालकर लॉगिन करें। आपके नंबर पर फिर से एक OTP आएगा, उसे कन्फर्म करें।

स्टेप 4: SMS Alert और आधार लिकिंग का विकल्प चुनें लॉगिन करते ही आपके सामने एक डैशबोर्ड खुलेगा।

  • यहाँ आपको "SMS Alert Service" का एक बड़ा सा बटन दिखेगा। इस पर क्लिक करें।

  • इसके बाद आपसे आपकी जमीन की डिटेल्स मांगी जाएगी।

स्टेप 5: अपनी जमाबंदी खोजें (Search Jamabandi)

  • सबसे पहले अपना जिला (District) चुनें (जैसे- पटना, मुजफ्फरपुर, गया आदि)।

  • फिर अपना अंचल (Block) चुनें।

  • इसके बाद अपना हल्का (Panchayat) और मौजा (Village) चुनें।

  • अब आपको जमाबंदी खोजने के कई विकल्प मिलेंगे (खाता नंबर से, खेसरा नंबर से, या रैयत के नाम से)। सबसे आसान है 'भाग वर्तमान' और 'पृष्ठ संख्या वर्तमान' डालकर खोजना (यह जानकारी आपकी पुरानी लगान रसीद पर लिखी होती है)।

स्टेप 6: डिटेल्स को लिंक करें और Update करें

  • जैसे ही आपकी जमाबंदी स्क्रीन पर दिखेगी, उसके सामने एक 'View' (आँख का निशान) बना होगा। उस पर क्लिक करें।

  • अब आपको नीचे "Link Mobile Number / Aadhaar" का ऑप्शन दिखाई देगा।

  • यहाँ जमीन मालिक का सही आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें।

  • 'Get OTP' पर क्लिक करें। आधार से जुड़े नंबर पर एक ओटीपी आएगा, उसे डालकर वेरीफाई (Verify) कर दें।

  • अंत में 'Save' या 'Update' बटन दबा दें।

ऑफलाइन तरीका (जब ऑनलाइन काम न कर रहा हो)

अगर आपको ऑनलाइन काम करने में दिक्कत आ रही है, पोर्टल नहीं चल रहा है, या फिर आपके दादा-परदादा के नाम से जमाबंदी है और नाम में बहुत गड़बड़ी है, तो आपको ऑफलाइन तरीके का सहारा लेना पड़ेगा। बिहार के हर जिले में यही नियम लागू है:

  1. आवेदन लिखें: एक सादे कागज पर अंचलाधिकारी (CO) के नाम एक एप्लीकेशन लिखें। विषय में लिखें "जमाबंदी में आधार और मोबाइल नंबर जोड़ने के संबंध में।"

  2. दस्तावेज़ संलग्न करें: इस आवेदन के साथ अपनी लगान रसीद की फोटोकॉपी, जमीन मालिक के आधार कार्ड की फोटोकॉपी और अपना मोबाइल नंबर लिख दें।

  3. कर्मचारी से मिलें: इस फाइल को लेकर अपने पंचायत के राजस्व कर्मचारी (हल्का कर्मचारी) से अंचल कार्यालय (ब्लॉक) में जाकर मिलें।

  4. हार्ड कॉपी जमा करें: कर्मचारी आपके दस्तावेजों की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट लगाकर कंप्यूटर ऑपरेटर को दे देगा, जहाँ से आपका नंबर सिस्टम में अपडेट कर दिया जाएगा।

क्विक इन्फो समरी (Quick Info Summary Table)

आपके समय की बचत के लिए, यहाँ पूरी प्रक्रिया का एक शॉर्टकट टेबल दिया गया है:

विवरण (Details)जानकारी (Information)
योजना का नामजमाबंदी आधार-मोबाइल लिकिंग (SMS Alert Service)
किसके लिए जरूरी है?बिहार के सभी जमीन मालिकों (रैयतों) के लिए
आधिकारिक वेबसाइटbiharbhumi.bihar.gov.in
मुख्य डाक्यूमेंट्सलगान रसीद, आधार कार्ड, चालू मोबाइल नंबर
लिंक करने की फीसएकदम मुफ्त (कोई सरकारी शुल्क नहीं)
अनुमानित समयऑनलाइन अप्लाई करने के 7 से 15 दिन बाद अपडेट
ऑथराइज्ड अधिकारीअंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी

ध्यान रखने वाली कुछ बहुत जरूरी बातें (Ground Reality Tips)

एक पत्रकार होने के नाते मैं आपको कुछ अंदर की बातें बताना चाहता हूँ ताकि आपका फॉर्म रिजेक्ट (Reject) न हो:

  • मृत व्यक्ति का आधार न लगाएं: अगर जमाबंदी आपके दादा या पिताजी के नाम पर है और उनका निधन हो चुका है, तो उनका आधार कार्ड लिंक नहीं होगा। ऐसी स्थिति में आपको पहले वंशावली (Legal Heir Certificate) बनवाकर उस जमीन का अपने नाम पर म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) करवाना होगा, उसके बाद ही आपका आधार लिंक हो पाएगा।

  • नाम की स्पेलिंग (Spelling Match): अगर जमाबंदी में नाम 'राम कुमार' है और आधार में 'राम कुमार सिंह' है, तो सिस्टम मिसमैच (Mismatch) बताकर रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर सकता है। ऐसी स्थिति में आपको पहले 'परिमार्जन' (Parimarjan) पोर्टल के माध्यम से अपने नाम में सुधार करवाना होगा।

  • जल्दबाजी से बचें, लेकिन काम जरूर करें: कई बार पोर्टल पर सर्वर डाउन रहता है, तो घबराएं नहीं। रात के समय या सुबह जल्दी ट्राई करें, पोर्टल बहुत स्मूथ चलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या जमाबंदी से मोबाइल नंबर लिंक करना फ्री है? हाँ, बिहार सरकार की तरफ से यह सुविधा बिल्कुल मुफ्त है। अगर आप खुद से ऑनलाइन करते हैं तो कोई पैसा नहीं लगेगा। हां, अगर आप किसी साइबर कैफे (CSC Centre) से करवाते हैं, तो वह अपना सर्विस चार्ज (30-50 रुपये) ले सकता है।

2. मेरी जमाबंदी मेरे दादा जी के नाम पर है जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो किसका आधार लिंक होगा? ऐसे में आप सीधे अपना आधार लिंक नहीं कर सकते। आपको पहले अपने ब्लॉक से वंशावली के आधार पर बँटवारा करके उस जमाबंदी को अपने और अपने भाइयों के नाम पर कायम (दाखिल-खारिज) करवाना होगा। उसके बाद आप अपना आधार लिंक कर पाएंगे।

3. अगर मैं आधार लिंक नहीं करवाता हूँ तो क्या नुकसान है? अभी सरकार ने इसके लिए कोई डेडलाइन तय नहीं की है कि आपकी जमीन छीन ली जाएगी, लेकिन भविष्य में आप अपनी जमीन की रसीद नहीं काट पाएंगे, न ही उसे बेच पाएंगे। साथ ही, अगर कोई जालसाज आपकी जमीन को अपने नाम करवाने की कोशिश करेगा, तो आपको कोई SMS अलर्ट नहीं मिलेगा।

4. ऑनलाइन अपडेट होने में कितने दिन का समय लगता है? एक बार जब आप 'Bihar Bhumi' पोर्टल से रिक्वेस्ट सबमिट कर देते हैं, तो यह आपके हल्का कर्मचारी के पास पेंडिंग रहती है। आमतौर पर इसे वेरीफाई और अप्रूव होने में 7 से 15 दिनों का समय लगता है।

5. ऑनलाइन लिंक करते समय OTP नहीं आ रहा है, क्या करें? यह एक आम समस्या है। यह अक्सर तब होता है जब बिहार भूमि का सर्वर डाउन हो या आपके आधार से जुड़ा नंबर बंद हो चुका हो। सुनिश्चित करें कि आपका मोबाइल नेटवर्क में है। अगर फिर भी OTP न आए, तो कुछ घंटों बाद दोबारा प्रयास करें।

मेरी आखिरी बात

जमीन जायदाद इंसान की जिंदगी भर की कमाई होती है। बिहार में जहाँ एक-एक धुर जमीन के लिए लोग कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते हुए अपनी पूरी उम्र गुजार देते हैं, वहाँ सरकार का यह 'SMS Alert' और 'आधार लिंकिंग' सिस्टम किसी वरदान से कम नहीं है।

आप पटना में बैठे हों या बिहार के किसी सुदूर गाँव में, मेरी आपको यही सलाह है कि समय निकालकर आज ही अपनी और अपने परिवार की जमाबंदी को मोबाइल नंबर से लिंक जरूर करवा लें। यह आपके खेत और घर का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच (Security Shield) है। एक बार नंबर लिंक हो गया, तो कोई भी अधिकारी या जमीन माफिया आपकी जमीन के साथ बिना आपकी जानकारी के कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता।

उम्मीद करता हूँ कि यह जानकारी आपके काम आएगी। अगर आपको यह जानकारी सही और मददगार लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और गांव वालों के साथ जरूर शेयर करें ताकि वो भी अपनी जमीन को सुरक्षित कर सकें। अगर कोई भी सवाल हो, तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछें। सतर्क रहें और जागरूक बनें!

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1