बिहार में बटाईदार किसानों के लिए सरकारी योजनाएं और लाभ

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बिटाईदार (Sharecropper) किसानों के लिए सरकार की कौन सी योजनाएं हैं और लाभ कैसे लें?

बिहार की खेती का एक बहुत बड़ा और कड़वा सच यह है कि जो खेत में हाड़तोड़ मेहनत करता है, पसीना बहाता है, असली में वह जमीन का मालिक होता ही नहीं है। पटना से लेकर बिहार के सभी जिलों की यही कहानी है। ज्यादातर खेती हमारे बटाईदार (Sharecropper) भाई करते हैं। जब फसल अच्छी होती है तो आधा हिस्सा मालिक (रैयत) ले जाता है, लेकिन जब बाढ़ या सुखाड़ से फसल बर्बाद हो जाती है, तो सारा का सारा नुकसान सिर्फ बटाईदार को झेलना पड़ता है।

एक लोकल रिपोर्टर के तौर पर जब मैं गांवों में जाता हूँ, तो अक्सर किसान भाई पूछते हैं, "भैया, सरकार इतना पैसा बांटती है, फसल बीमा का पैसा आता है, लेकिन हमें तो कुछ नहीं मिलता! सब जिसके नाम पर जमीन की रसीद है, उसी के खाते में चला जाता है।" अगर आप भी दूसरों के खेत में बटाई पर खेती करते हैं और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं, तो यह लेख आपके लिए है। सरकार ने बटाईदार किसानों (जिन्हें सरकारी भाषा में 'गैर-रैयत' कहा जाता है) के लिए भी कई योजनाएं चला रखी हैं। बस जरूरत है सही जानकारी और सही तरीके से फॉर्म भरने की। आज हम पूरी गहराई से समझेंगे कि एक बटाईदार किसान किन-किन योजनाओं का लाभ ले सकता है और उसका ऑनलाइन प्रोसेस क्या है।

बिहार में बटाईदार किसानों का असली दर्द और सरकारी नियम

सरकारी रिकॉर्ड (DBT Portal) के अनुसार किसान दो तरह के होते हैं:

  1. रैयत (Ryot): जिनके नाम पर जमीन का केवाला या रसीद (LPC) होती है।

  2. गैर-रैयत (Non-Ryot / Sharecropper): जो दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं यानी बटाईदार।

दुर्भाग्य से 'पीएम किसान सम्मान निधि' (PM Kisan) जैसी बड़ी योजनाओं का लाभ केवल रैयत किसानों को ही मिलता है। लेकिन बिहार सरकार ने राज्य स्तर पर कई ऐसी योजनाएं लागू की हैं, जहाँ बिना जमीन की रसीद के, सिर्फ एक स्वघोषणा पत्र (Self-Declaration Form) के आधार पर बटाईदार किसान सीधा अपने बैंक खाते में सरकारी पैसा मंगा सकते हैं।

बटाईदार किसानों के लिए सरकार की प्रमुख योजनाएं

बिहार सरकार के कृषि विभाग और सहकारिता विभाग द्वारा बटाईदार किसानों के लिए मुख्य रूप से ये 4 योजनाएं चलाई जा रही हैं:

1. बिहार राज्य फसल सहायता योजना (फसल बीमा)

यह योजना बटाईदार किसानों के लिए सबसे बड़ी संजीवनी है। अगर प्राकृतिक आपदा (बाढ़, सुखाड़, ओलावृष्टि) के कारण आपकी फसल बर्बाद हो जाती है, तो सरकार प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा देती है।

  • इस योजना में रैयत और गैर-रैयत दोनों आवेदन कर सकते हैं।

  • अगर 20% तक फसल का नुकसान होता है, तो 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलते हैं।

  • अगर नुकसान 20% से ज्यादा है, तो 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सीधे बैंक खाते में सहायता राशि आती है।

2. कृषि इनपुट अनुदान योजना (Krishi Input Subsidy)

जब भी बिहार में सुखाड़ या बेमौसम बरसात से फसल गिर जाती है, तो सरकार 'कृषि इनपुट अनुदान' की घोषणा करती है। इसमें भी बटाईदार किसानों को शामिल किया गया है।

  • असिंचित क्षेत्र (जहाँ सिंचाई की सुविधा नहीं है) के लिए 6,800 रुपये प्रति हेक्टेयर।

  • सिंचित क्षेत्र के लिए 13,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान मिलता है।

3. डीजल अनुदान योजना (Diesel Anudan Yojana)

सुखाड़ के समय जब बारिश नहीं होती और पंपसेट चलाकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है, तब डीजल का खर्च बहुत बढ़ जाता है।

  • बिहार सरकार सिंचाई के लिए खरीफ और रबी सीजन में डीजल पर अनुदान देती है।

  • एक बटाईदार किसान भी वार्ड सदस्य से फॉर्म पर साइन करवाकर डीजल अनुदान का पैसा सीधा अपने अकाउंट में ले सकता है। प्रति लीटर के हिसाब से तय राशि किसान को वापस मिल जाती है।

4. बीज अनुदान योजना (Seed Subsidy)

बुवाई के समय अच्छी क्वालिटी के बीज (गेहूं, धान, मक्का, चना) बाजार में बहुत महंगे मिलते हैं। कृषि विभाग (BRBN Portal) के माध्यम से किसानों को 50% से लेकर 90% तक की छूट पर बीज उपलब्ध कराया जाता है। होम डिलीवरी की सुविधा भी होती है। गैर-रैयत किसान भी अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर इस सब्सिडी वाले बीज की बुकिंग कर सकते हैं।

बटाईदार किसान योजनाओं का लाभ कैसे लें? (Step-by-Step Guide)

योजनाओं के बारे में तो आपने जान लिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि इसका पैसा खाते में कैसे आएगा? इसके लिए आपको ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरना होगा। यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्रोसेस दिया गया है:

स्टेप 1: किसान पंजीकरण (Farmer Registration) करवाना

सबसे पहले आपका बिहार कृषि विभाग के DBT पोर्टल (dbtagriculture.bihar.gov.in) पर रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है।

  • किसी भी साइबर कैफे (CSC Centre) पर जाएं।

  • अपना आधार कार्ड और मोबाइल नंबर साथ रखें। ध्यान रहे, आधार कार्ड में मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए क्योंकि उस पर OTP आएगा।

  • फॉर्म भरते समय जब 'किसान का प्रकार' (Farmer Type) पूछा जाए, तो वहाँ गैर-रैयत (Non-Ryot) का ऑप्शन जरूर चुनें।

स्टेप 2: स्वघोषणा पत्र (Self-Declaration Form) तैयार करना

एक बटाईदार के पास जमीन की रसीद नहीं होती, इसलिए स्वघोषणा पत्र ही उसका सबसे बड़ा हथियार है।

  • पोर्टल से स्वघोषणा पत्र का फॉर्मेट डाउनलोड करें।

  • इसमें अपनी डिटेल भरें: आप किस गांव में, किस खाता-खेसरा नंबर पर और कितनी डिसमिल/एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं।

  • इसमें जमीन मालिक का नाम भी लिखना होता है।

  • सबसे जरूरी बात: इस फॉर्म पर आपके गांव के वार्ड सदस्य (Ward Member) या मुखिया और किसान सलाहकार का साइन और मुहर होना चाहिए। इसके साथ ही अगल-बगल के दो किसानों के गवाह के तौर पर हस्ताक्षर भी चाहिए।

स्टेप 3: ऑनलाइन फॉर्म सबमिट करना (Online Apply)

जब सरकार फसल सहायता या डीजल अनुदान के लिए पोर्टल खोलती है, तब आपको ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

  • DBT पोर्टल या सहकारिता विभाग के पोर्टल पर जाएं।

  • अपना 13 अंकों का किसान रजिस्ट्रेशन नंबर (Registration ID) डालें।

  • योजना का फॉर्म खुल जाएगा। उसमें फसल का विवरण (धान, गेहूं, मक्का) और बुवाई का रकबा भरें।

  • जो स्वघोषणा पत्र आपने मुखिया या वार्ड सदस्य से साइन करवाया है, उसे स्कैन करके पोर्टल पर अपलोड (Upload) कर दें।

  • फॉर्म सबमिट करें और रिसीविंग (Printout) अपने पास सुरक्षित रख लें।

स्टेप 4: भौतिक सत्यापन (Physical Verification)

फॉर्म ऑनलाइन भरने के बाद आपके पंचायत के कृषि समन्वयक (Agriculture Coordinator) या किसान सलाहकार खेत पर आकर जांच करते हैं कि आपने सच में वहां खेती की है या नहीं। अगर आपकी फसल सच में बर्बाद हुई है, तो वे अपनी रिपोर्ट को अप्रूव कर देते हैं और कुछ ही महीनों में पैसा सीधे आपके आधार-लिंक्ड बैंक खाते (DBT) में आ जाता है।

क्विक इन्फो समरी (सरकारी योजनाओं का सारांश)

पटना और बिहार के सभी जिलों के बटाईदार किसानों के लिए नीचे एक टेबल दी गई है, जिससे आप एक नज़र में सारी जानकारी समझ सकते हैं:

योजना का नामकिसके लिए है?क्या लाभ मिलता है?जरूरी डॉक्यूमेंट (बटाईदार के लिए)
फसल सहायता योजनाफसल बर्बाद होने पर₹7,500 से ₹10,000 प्रति हेक्टेयरआधार कार्ड, बैंक पासबुक, स्वघोषणा पत्र
कृषि इनपुट अनुदानसुखाड़ / बाढ़ में₹6,800 से ₹13,500 प्रति हेक्टेयरस्वघोषणा पत्र (वार्ड/मुखिया से सत्यापित)
डीजल अनुदान योजनासिंचाई खर्च के लिएप्रति लीटर के हिसाब से सब्सिडीकिसान रजिस्ट्रेशन, स्वघोषणा पत्र, डीजल रसीद
बीज अनुदान योजनासस्ती दर पर बीज50% से 90% तक की छूटकिसान रजिस्ट्रेशन नंबर (DBT)

फॉर्म रिजेक्ट (Reject) होने के मुख्य कारण और बचाव

कई बार बटाईदार किसान शिकायत करते हैं कि उन्होंने फॉर्म तो भरा था लेकिन लिस्ट में नाम नहीं आया या फॉर्म रिजेक्ट हो गया। इसके पीछे कुछ छोटी-छोटी गलतियां होती हैं:

  • NPCI लिंक न होना: सरकार जो भी पैसा भेजती है, वह अकाउंट नंबर पर नहीं, बल्कि आधार नंबर के जरिए (DBT) भेजती है। अगर आपके बैंक खाते में NPCI (National Payments Corporation of India) मैपिंग चालू नहीं है, तो पैसा बीच में ही अटक जाएगा। तुरंत बैंक जाकर अपने खाते को NPCI से लिंक कराएं।

  • साइन और मुहर स्पष्ट न होना: स्वघोषणा पत्र पर वार्ड सदस्य या किसान सलाहकार का साइन और स्टाम्प एकदम साफ होना चाहिए। अगर मुहर धुंधली है, तो अधिकारी फॉर्म रिजेक्ट कर देते हैं।

  • खाता-खेसरा की गलत जानकारी: आप जिस जमीन पर बटाई कर रहे हैं, उसका सही खाता और खेसरा नंबर देना बहुत जरूरी है। अगर वह सरकारी रिकॉर्ड से मैच नहीं हुआ, तो भी फॉर्म कैंसिल हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या बटाईदार किसान को पीएम किसान (PM Kisan) का 6000 रुपये मिल सकता है?

नहीं। केंद्र सरकार की पीएम किसान योजना का लाभ केवल उन किसानों को मिलता है जिनके नाम पर खेती की जमीन रजिस्टर्ड (रैयत) है। बटाईदार किसानों को यह लाभ नहीं मिलता है।

2. गैर-रैयत (Non-Ryot) किसान का मतलब क्या होता है?

गैर-रैयत का सीधा मतलब बटाईदार किसान से है। जो किसान खुद की जमीन पर नहीं, बल्कि किसी और की जमीन पर खेती करते हैं और फसल का एक हिस्सा जमीन मालिक को देते हैं, उन्हें सरकारी भाषा में गैर-रैयत कहा जाता है।

3. स्वघोषणा पत्र (Self-declaration) पर किसका हस्ताक्षर (Sign) चाहिए?

बटाईदार किसानों के लिए स्वघोषणा पत्र पर आपके गांव के वार्ड सदस्य (Ward Member) या मुखिया के साथ-साथ आपके पंचायत के किसान सलाहकार का हस्ताक्षर और मुहर होना अनिवार्य है। इसके अलावा आस-पड़ोस के दो किसानों के नाम और साइन भी गवाह के रूप में लगते हैं।

4. क्या बिना जमीन की रसीद (LPC) के फसल बीमा (फसल सहायता) का पैसा मिल सकता है?

हाँ, बिल्कुल मिल सकता है। आपको रसीद की जगह स्वघोषणा पत्र (गैर-रैयत फॉर्म) अपलोड करना होता है। इसी पत्र के आधार पर आपको फसल नुकसान का मुआवजा मिलता है।

5. मेरा फॉर्म ऑनलाइन रिजेक्ट हो गया है, अब मैं क्या करूँ?

अगर आपका फॉर्म रिजेक्ट हो गया है, तो अपने पंचायत के किसान सलाहकार या कृषि समन्वयक (Coordinator) से मिलें। आप पोर्टल पर स्टेटस चेक कर सकते हैं कि रिजेक्ट होने का कारण क्या है (जैसे- बैंक खाता लिंक न होना या गलत खेसरा नंबर)। कारण सुधार कर आप दोबारा फॉर्म सबमिट या अपडेट कर सकते हैं।

बटाईदार भाइयों के लिए मेरा सीधा संदेश

बिहार के खेत खलिहानों की असली धड़कन आप बटाईदार किसान ही हैं। यह सच है कि सिस्टम में अभी भी कई कमियां हैं और बिना जमीन के कागज के योजना का लाभ लेना थोड़ा भाग-दौड़ का काम लगता है। वार्ड सदस्य से साइन करवाना या किसान सलाहकार को खेत तक ले जाना आसान नहीं होता। लेकिन, अगर आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तो आपके हिस्से का लाभ कोई और ले जाएगा।

इसलिए, सबसे पहला काम यह करें कि किसी भी साइबर कैफे में जाकर DBT कृषि पोर्टल पर 'गैर-रैयत' के तौर पर अपना किसान पंजीकरण (Registration) जरूर करवा लें। अपने पंचायत के किसान सलाहकार से लगातार संपर्क में रहें, उनसे पूछें कि अभी कौन सा फॉर्म भरा जा रहा है। अगर आप पटना या बिहार के किसी भी जिले से हैं, तो याद रखें—सरकारी योजनाओं का पैसा आपका हक़ है। थोड़ी सी जागरूकता और सही समय पर ऑनलाइन फॉर्म भरने से आपकी मेहनत का सही फल और नुकसान का सही मुआवजा आपको मिल सकता है। आज ही अपने कागजात तैयार करें और इन योजनाओं का हिस्सा बनें।

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