Bihar Flood: 18 जिलों में 270 करोड़ की फसल बर्बाद, किसानों को कितना मिलेगा पैसा?
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
बिहार में बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन किसानों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। Bihar Flood Farmers Compensation को लेकर कृषि विभाग ने फसल क्षति की शुरुआती रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 18 जिलों में करीब 270 करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुई है। Bihar Flood Farmers Compensation के तहत प्रभावित किसानों को राहत देने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, विभाग का कहना है कि पानी पूरी तरह उतरने के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाएगा।
18 जिलों में सामने आया फसल नुकसान
कृषि विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में बिहार के 18 जिलों में बाढ़ से हुई फसल क्षति का आकलन किया गया है। इसमें करीब 1.76 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 102 प्रखंडों में फसल को नुकसान पहुंचा है। फिलहाल शुरुआती अनुमान में नुकसान करीब 270 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, यह अंतिम आंकड़ा नहीं है। कई इलाकों में अभी भी खेतों से पानी पूरी तरह नहीं निकला है। पानी उतरने के बाद दोबारा सर्वे होने पर नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है।
भागलपुर और पटना में सबसे ज्यादा नुकसान
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भागलपुर और पटना में फसल नुकसान काफी अधिक रहा है। इसके अलावा भोजपुर, समस्तीपुर और बेगूसराय में भी बड़े क्षेत्र में फसल बर्बाद हुई है। इन जिलों में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लगी फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। गंगा, पुनपुन, गंडक और सोन समेत कई नदियों में अगस्त के दौरान जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में पानी फैल गया था। बाढ़ का सीधा असर खेतों पर पड़ा। लंबे समय तक पानी जमा रहने से धान, मक्का, सब्जी और केले जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा।
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने किया था निरीक्षण
बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया था। इस दौरान केंद्र की टीम भी मौजूद रही। निरीक्षण में बाढ़ से किसानों और आम लोगों को हुए नुकसान की स्थिति को देखा गया। केंद्रीय मंत्री ने प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की बात कही थी। अब कृषि विभाग की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद किसानों की नजर राहत और अनुदान की प्रक्रिया पर है।
33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर मिलेगा अनुदान
आपदा राहत के प्रावधानों के तहत फसल में 33 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर पात्र किसानों को अनुदान दिया जाता है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में इस बार धान, मक्का, सब्जी और केला समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों के लिए वैकल्पिक फसल व्यवस्था की भी जानकारी दी है। आकस्मिक फसल योजना के तहत अगात मटर, आगत सरसों और रबी मक्का के बीज प्रभावित किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य किसानों को अगली फसल के लिए दोबारा खेती शुरू करने में मदद करना है।
असिंचित जमीन पर कितना मिलेगा पैसा?
आपदा राहत के प्रावधान के अनुसार, असिंचित क्षेत्र में फसल क्षति होने पर 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान का प्रावधान है। वहीं, सिंचित क्षेत्र में फसल खराब होने पर किसानों को 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता मिल सकती है। बहुवर्षीय फसलों के लिए यह राशि 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित है। हालांकि, एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र के लिए ही अनुदान दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। इस हिसाब से पात्र किसान की वास्तविक सहायता उसकी भूमि के प्रकार और क्षतिग्रस्त क्षेत्रफल के आधार पर तय होगी।
न्यूनतम सहायता का भी प्रावधान
राहत व्यवस्था में न्यूनतम सहायता की सीमा भी तय है। सिंचित क्षेत्र के लिए न्यूनतम 2,000 रुपये, असिंचित क्षेत्र के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये और बहुवर्षीय फसल के लिए न्यूनतम 2,500 रुपये सहायता का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, किसानों को मिलने वाली वास्तविक राशि के लिए स्थानीय स्तर पर फसल क्षति का सत्यापन जरूरी होगा। इसलिए अंतिम भुगतान रिपोर्ट और पात्रता के आधार पर तय किया जाएगा।
अभी अंतिम नुकसान का इंतजार
कृषि विभाग की मौजूदा रिपोर्ट को शुरुआती आकलन माना जा रहा है। बाढ़ का पानी पूरी तरह निकलने के बाद खेतों की स्थिति स्पष्ट होगी और उसके बाद नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आ सकता है। ऐसे में 270 करोड़ रुपये का मौजूदा अनुमान अंतिम नहीं माना जा सकता। अगर सर्वे में और क्षेत्र प्रभावित पाया जाता है तो फसल नुकसान की कुल राशि बढ़ सकती है। फिलहाल प्रभावित किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल राहत राशि और अगली फसल की तैयारी को लेकर है। सरकार और कृषि विभाग की ओर से नुकसान के अंतिम आकलन के बाद आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होने की उम्मीद है।