बिहार में कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार, नियमों में होंगे बड़े बदलाव
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में उद्योग और कारोबार को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और Deregulation 1.0 एवं 2.0 के तहत नियमों को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की प्रगति और विभिन्न विभागों में लागू सुधारों की 9 सितंबर 2026 को उच्चस्तरीय बैठक में समीक्षा की गई।
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के.के. पाठक और बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की। बैठक में व्यापार, भवन निर्माण, भूमि, स्वास्थ्य, पर्यटन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
Building Bye-Laws 2026 में क्या बदलेगा?
Deregulation 1.0 और 2.0 के तहत भवन निर्माण से जुड़ी मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बिहार बिल्डिंग बाय-लॉज 2026 का प्रारूप तैयार किया गया है।
इसका उद्देश्य भवन निर्माण में लगने वाले समय और प्रक्रियाओं को कम करना तथा व्यावसायिक भूखंडों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। साथ ही Mixed-use development को प्रोत्साहित करने की योजना है।
नए प्रावधानों में भवनों के जोखिम के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। कम जोखिम वाले भवनों के लिए स्व-प्रमाणन की व्यवस्था होगी, जबकि मध्यम जोखिम वाली इमारतों के निरीक्षण के लिए थर्ड-पार्टी एजेंसियों की भूमिका तय की जाएगी।
इससे संबंधित विभागों पर अनावश्यक निरीक्षण का बोझ कम करने और निर्माण प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने की कोशिश की जा रही है।
EoDB विधेयक 2026 से उद्योगों को क्या राहत मिलेगी?
बिहार विधानमंडल ने 23 जुलाई 2026 को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026 को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य राज्य में कारोबार शुरू करने और संचालित करने से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उद्योगों को दोहरे लाइसेंस से राहत देने, MSME इकाइयों के लिए स्व-घोषणा के आधार पर मंजूरी की व्यवस्था करने और अनावश्यक निरीक्षणों से सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का फोकस ऐसी प्रक्रियाओं को कम करने पर है जिनके कारण कारोबारियों को अलग-अलग विभागों में बार-बार आवेदन या अनुमति की जरूरत पड़ती है।
यदि इन सुधारों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो इसका असर खासकर छोटे कारोबारियों और MSME क्षेत्र पर पड़ सकता है।
सरकारी नियमों के लिए बनाया गया डिजिटल रिपॉजिटरी
प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने अपने नियमों, अधिनियमों और सरकारी आदेशों को एक ही जगह उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाया है।
इसके लिए bihar.gov.in पर केंद्रीकृत डिजिटल रिपॉजिटरी पोर्टल 19 जून 2026 से लाइव किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस पोर्टल पर अब तक 2,000 से अधिक दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं।
इस व्यवस्था से नागरिकों और कारोबारियों को अलग-अलग विभागों की वेबसाइट या कार्यालयों में दस्तावेज तलाशने की जरूरत कम हो सकती है।
RTPS में ऑटो-अपील से भी बदलाव
लोक सेवाओं के अधिकार यानी RTPS के तहत लंबित मामलों को लेकर भी डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद ऑटो-अपील प्रणाली 23 जून 2026 से लाइव की गई। इसका उद्देश्य निर्धारित समय में सेवा नहीं मिलने की स्थिति में अपील की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
डिजिटल व्यवस्था के जरिए सरकारी सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
जमीन और बिजली से जुड़े नियम होंगे आसान
बैठक में भूमि और राजस्व से जुड़े कई सुधारों पर भी चर्चा हुई। किसानों और जमीन मालिकों को राहत देने के उद्देश्य से भूमि उपयोग परिवर्तन यानी CLU की आवश्यकता समाप्त करने पर सहमति बनी है।
इसके अलावा उद्योगों और अन्य परियोजनाओं के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में भी सुधार किए जा रहे हैं।
निजी स्कूलों के लिए न्यूनतम भूमि की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव भी इन सुधारों में शामिल है। इन बदलावों का उद्देश्य जमीन के इस्तेमाल और नए संस्थानों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बनेगा Unified Licensing Portal
स्वास्थ्य क्षेत्र में अलग-अलग लाइसेंस और मंजूरियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को एकीकृत करने की योजना है।
बैठक में Unified Health Licensing Portal विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति जल्द ही RFP जारी करेगी।
एकीकृत पोर्टल बनने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संस्थानों को विभिन्न अनुमतियों के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं का सामना कम करना पड़ सकता है।
होमस्टे नीति से पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी
पर्यटन क्षेत्र में भी नियमों को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन नीति 2026 के तहत प्रक्रियाओं को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और लोगों को अपने घरों को होमस्टे के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
बैठक में पर्यटन विभाग को होमस्टे नीति को और उदार बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभागों को जल्द अधिसूचना जारी करने का निर्देश
बैठक के दौरान भारत सरकार के विशेष सचिव के सुझावों के आधार पर संबंधित विभागों को सुधारों को जमीन पर लागू करने के लिए तेजी से कार्रवाई करने को कहा गया।
अग्निशमन विभाग को EoDB विधेयक 2026 और भवन उप-विधि 2026 के अनुरूप अपने नियमों में बदलाव करने का निर्देश दिया गया है।
वहीं, भवन निर्माण, उद्योग और स्वास्थ्य जैसी विभिन्न मंजूरियों के लिए थर्ड-पार्टी निरीक्षण एजेंसियों की नियुक्ति पर जल्द अंतिम निर्णय लिए जाने की बात कही गई।
बिहार में निवेश और कारोबार के लिए क्या बदलेगा?
Deregulation 1.0 और 2.0 के तहत किए जा रहे सुधारों का व्यापक उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को कम जटिल बनाना और कारोबारियों को अधिक सुविधा देना है।
बैठक में उद्योग, नगर विकास, राजस्व एवं भूमि सुधार, गृह, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में चल रहे सुधारों की जानकारी साझा की।
अब इन प्रस्तावों का वास्तविक असर उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। यदि नई व्यवस्थाएं समय पर लागू होती हैं तो भवन निर्माण, उद्योग, MSME, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में मंजूरी की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान हो सकती है।
