बिहार में 6 करोड़ लोगों का घर-घर होगा हेल्थ चेकअप, CM सम्राट चौधरी ने रवाना किया जागरूकता रथ
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बिहार में घर-घर हेल्थ चेकअप की बड़ी पहल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को घर-घर हेल्थ चेकअप से जुड़े ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत राज्य के करीब 6 करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच उनके घर तक पहुंचकर करने की योजना है। अभियान का उद्देश्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करना और जरूरतमंद मरीजों को इलाज तक पहुंचाना है। पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने अधिकारियों से अभियान को गंभीरता से लागू करने और हर जिले में इसकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा।
तीन महीने तक बिहार के सभी जिलों में चलेगा अभियान
‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान अगले तीन महीने तक बिहार के सभी जिलों में चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य बड़ी आबादी तक सीधे पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधी शुरुआती जांच और जागरूकता को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य के करीब 6 करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच घर तक पहुंचकर की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलग-अलग इलाकों में लोगों से संपर्क करेंगी। अभियान की मॉनिटरिंग को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय के साथ अभियान की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। सरकार की इस पहल का फोकस केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा। लोगों को बीमारियों के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज की जरूरत के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।
हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर और डायबिटीज की होगी पहचान
इस विशेष स्वास्थ्य अभियान में उच्च रक्तचाप, कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों की पहचान पर खास जोर रहेगा। इन बीमारियों का शुरुआती चरण में पता चलने से मरीजों को समय पर इलाज शुरू कराने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य टीम घरों तक पहुंचकर लोगों का स्वास्थ्य सर्वे और जरूरी स्क्रीनिंग करेगी। जांच के दौरान किसी व्यक्ति में गंभीर बीमारी के संकेत मिलने पर आगे की चिकित्सा जांच और इलाज की व्यवस्था की जाएगी। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। इससे लोगों को बीमारी की पहचान के बाद उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचने का रास्ता आसान होने की उम्मीद है। अभियान खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो नियमित रूप से अस्पताल जाकर स्वास्थ्य जांच नहीं करा पाते। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
ANM और आशा कार्यकर्ता पहुंचेंगी लोगों के घर
अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रहेगी। ये स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेंगी और स्वास्थ्य सर्वे के साथ जरूरी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पूरी करेंगी। लोगों से उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली जाएगी और जरूरत के मुताबिक जांच की जाएगी। किसी व्यक्ति में बीमारी के संभावित लक्षण मिलने पर उसे आगे की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र से जोड़ा जाएगा। घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की इस व्यवस्था से शुरुआती स्तर पर बीमारियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। खासकर ऐसे मरीज, जिन्हें अपनी बीमारी की जानकारी नहीं है, वे इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य जांच के दायरे में आ सकते हैं। स्वास्थ्यकर्मियों के जरिए लोगों को नियमित जांच कराने और बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने का संदेश भी दिया जाएगा। सरकार की योजना जागरूकता और स्क्रीनिंग दोनों स्तरों पर काम करने की है।
गांवों के अस्पतालों के लिए शुरू होगा मिशन कायाकल्प
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘मिशन कायाकल्प’ शुरू करने की भी घोषणा की। इस पहल का मकसद गांवों और स्थानीय स्तर के अस्पतालों में मौजूद कमियों को दूर करना होगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि स्वास्थ्य संस्थानों में किसी भी स्तर पर दिक्कत सामने आती है तो उसे दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसमें अस्पतालों की बुनियादी व्यवस्था और जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा सकता है। मिशन कायाकल्प के जरिए प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि स्थानीय अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर होती है, तो लोगों को सामान्य जांच और इलाज के लिए दूर के बड़े अस्पतालों पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है। सरकार की दोनों पहलें—घर-घर स्वास्थ्य जांच और स्वास्थ्य संस्थानों के सुधार—एक साथ राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने क्या कहा?
अभियान के शुभारंभ के मौके पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए राज्य के लोगों तक घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाई जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य बीमारियों की समय रहते पहचान करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों का इलाज जल्द शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि जागरूकता और शुरुआती जांच से कई गंभीर बीमारियों के खतरे को समय पर पहचानने में मदद मिल सकती है। अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभियान को तीन महीने के दौरान प्रभावी तरीके से हर जिले तक पहुंचाने की होगी। 6 करोड़ लोगों तक स्वास्थ्य जांच की योजना को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, जिला प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय की जरूरत होगी। बिहार में शुरू हुआ यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी पहल है। आने वाले महीनों में इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने लोगों की स्क्रीनिंग होती है, कितने संभावित मरीजों की पहचान होती है और उन्हें समय पर इलाज मिल पाता है।