दानापुर में गंगा का रौद्र रूप, खतरे के निशान से 2 फुट ऊपर; 7 पंचायतें जलमग्न
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Danapur Flood News: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। Danapur Flood News में सबसे बड़ी चिंता गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। दानापुर में गंगा खतरे के निशान से करीब दो फुट ऊपर बह रही है और पिछले तीन दिनों में जलस्तर लगभग तीन फुट बढ़ा है। Danapur Flood News के अनुसार, गंगा के उफान से दियारा क्षेत्र की सात पंचायतों में पानी फैल गया है, जिससे सड़कें, खेत, घर और कई सरकारी संस्थान प्रभावित हुए हैं। राज्य की कई प्रमुख नदियों में भी जलस्तर बढ़ने की खबर है। गंडक, कोसी, बागमती और गंगा में लगातार बढ़ते पानी ने कई इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के तेज कटाव और गंगा के दबाव से तटबंधों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
11 दिन बाद फिर बढ़ा संकट, सात पंचायतों में घुसा बाढ़ का पानी
दानापुर दियारा में 11 दिन के अंतराल के बाद एक बार फिर गंगा का विकराल रूप देखने को मिल रहा है। बढ़ते जलस्तर के कारण सात पंचायतों के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों और खेतों पर तीन से चार फुट तक पानी बहने की बात सामने आई है। कई निचले इलाकों में घरों और झोपड़ियों के अंदर भी करीब डेढ़ से दो फुट तक पानी पहुंच गया है। कासीमचक पंचायत समेत कई गांवों के लोगों को घर छोड़कर ऊंचे स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। अचानक बढ़े पानी ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे पहले आई बाढ़ में दियारा क्षेत्र की सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। मक्का, पशुचारा और सब्जियों की फसल बर्बाद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ के कारण पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के सामने अब सुरक्षित ठिकाने के साथ-साथ भोजन, पशुचारा और जरूरी सुविधाओं की चुनौती बढ़ सकती है।
अस्पताल, स्कूल और थाना परिसर भी बाढ़ के पानी से घिरे
गंगा का पानी सिर्फ रिहायशी इलाकों और खेतों तक सीमित नहीं रहा है। विशुनपुर स्थित अस्पताल परिसर में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। दियारा क्षेत्र के दर्जनों स्कूलों के आसपास और परिसरों में पानी भरने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई जगह स्कूल पहुंचना शिक्षकों और छात्रों के लिए मुश्किल बन गया है। अकिलपुर थाना परिसर भी बाढ़ के पानी से घिरने की जानकारी सामने आई है। इससे पुलिसकर्मियों और आम लोगों के आवागमन में परेशानी बढ़ सकती है। दियारा क्षेत्र के करीब 49 स्कूलों तक पहुंचने के लिए शिक्षक-शिक्षिकाओं को स्टीमर का सहारा लेना पड़ रहा है। पानी से भरे रास्तों के कारण रोजमर्रा का सफर चुनौतीपूर्ण बन गया है। स्टीमर या अन्य साधनों तक पहुंचने के लिए भी लोगों को घुटने भर पानी से गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर ऑटो और जीप चालकों द्वारा अधिक किराया वसूलने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
सात पंचायतों की बिजली आपूर्ति बंद, अंधेरे में डूबे कई इलाके
बाढ़ के खतरे को देखते हुए बिजली विभाग ने बुधवार सुबह से दियारा की सात पंचायतों में बिजली आपूर्ति बंद कर दी। यह फैसला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालांकि बिजली कटने से हजारों लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बाढ़ के बीच अंधेरा होने से रात के समय लोगों की मुश्किल और बढ़ सकती है। उधर, गंगा का पानी नालों के रास्ते शहरी और सेना क्षेत्र की ओर न पहुंचे, इसके लिए जल संसाधन विभाग ने एहतियाती कदम उठाए हैं। कई जगह बालू से भरे बोरे लगाकर नालों और रास्तों को बंद किया गया है। कनीय अभियंता के अनुसार, शहरी और सेना क्षेत्र के स्लुईस गेट तथा फाटकों को बालू भरे बोरों से सुरक्षित किया गया है। देवानानाला को भी बंद कर पानी के संभावित रिसाव को रोकने की कोशिश की गई है।
खतरे के निशान से दो फुट ऊपर बह रही गंगा
बाढ़ नियंत्रण केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, दानापुर में गंगा नदी खतरे के निशान से करीब दो फुट ऊपर बह रही है। बुधवार सुबह देवनानाला के पास गंगा का जलस्तर 168.90 फुट दर्ज किया गया। अधिकारियों का कहना है कि गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का रुख बना हुआ है। ऊपरी इलाकों में नदी के बढ़ते स्तर का असर दानापुर क्षेत्र में भी पड़ सकता है। बताया गया कि इलाहाबाद और बनारस की ओर जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है। दूसरी ओर बक्सर में गंगा का स्तर स्थिर बताया गया है, जबकि इंद्रपुरी में सोन नदी का जलस्तर भी स्थिर है। इसके बावजूद अधिकारियों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। गंगा के जलस्तर में आगे और बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए दियारा और निचले इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रशासन अलर्ट, एसडीआरएफ को सतर्क रहने के निर्देश
दानापुर प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन पूरी तरह सजग है। एसडीओ समेत अन्य अधिकारी प्रभावित और संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का जायजा ले रहे हैं। निचले इलाकों में घरों और झोपड़ियों में घुसे पानी का आकलन भी किया जा रहा है। प्रशासन ने एसडीआरएफ टीम को दियारा क्षेत्र की प्रभावित पंचायतों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्यों को तेज किया जा सकता है। हालांकि सरकारी स्तर पर नाव संचालन शुरू करने को लेकर आदेश मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है। जलस्तर की अगली स्थिति के आधार पर प्रशासन आगे की कार्रवाई कर सकता है।
राहत और बचाव कार्य तेज करने की उठी मांग
बाढ़ प्रभावित दियारा क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों को तेज करने की मांग भी उठने लगी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने सरकार तथा जिला प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की अपील की है। पूर्व जिला पार्षद ओमप्रकाश यादव, मुखिया मिन्ता देवी, प्रतिनिधि वकील राय और सतीश कुमार समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत व्यवस्था की मांग की है। जिला पार्षद प्रतिनिधि सह भाजपा नेता रंजीत कुमार यादव और जदयू नेताओं संजय सिंह व जयपाल यादव ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य शुरू करने और लोगों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। दानापुर में गंगा का जलस्तर जिस तरह बढ़ रहा है, उससे आने वाले दिनों में स्थिति पर प्रशासन और लोगों दोनों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, सुरक्षित आवागमन और जरूरी राहत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।