बेगूसराय में दूसरे के TET प्रमाण पत्र पर नौकरी का खुलासा, FIR दर्ज

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बेगूसराय। जिले में फर्जी शिक्षक मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगरानी विभाग ने बखरी थाना क्षेत्र में दो शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। जांच में आरोप है कि दोनों शिक्षक दूसरे अभ्यर्थियों के TET प्रमाण पत्र के आधार पर लंबे समय से शिक्षक के पद पर कार्य कर रहे थे।

मामला मोहनपुर पंचायत के दो नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ा है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कथित गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद दोनों नामजद शिक्षकों के साथ कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

दो नवसृजित विद्यालयों के शिक्षक नामजद

बखरी थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, मोहनपुर पंचायत स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय कारीलाल सिंह में कार्यरत शिक्षक अपरजीत कुमार और नवसृजित प्राथमिक विद्यालय साधुदेव सदा टोला में कार्यरत शिक्षक राजीव रंजन पांडेय को नामजद किया गया है।

निगरानी विभाग ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज कराया है।

मामले में शिक्षकों के अलावा कुछ अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस और निगरानी विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने और नियुक्ति में इस्तेमाल करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

2015 में पंचायत शिक्षक के रूप में हुआ था नियोजन

निगरानी विभाग के जांच प्रतिवेदन के मुताबिक, सहरसा जिले के महिषी थाना क्षेत्र के सरौनी गांव निवासी दिनेश यादव के पुत्र अपरजीत कुमार का वर्ष 2015 में पंचायत शिक्षक के रूप में नियोजन हुआ था।

उनकी नियुक्ति मोहनपुर पंचायत के कारीलाल सिंह विद्यालय में हुई थी। वहीं समस्तीपुर जिले के निवासी लक्ष्मीकांत पांडेय के पुत्र राजीव रंजन पांडेय का नियोजन भी इसी पंचायत क्षेत्र के साधुदेव सदा टोला विद्यालय में पंचायत शिक्षक के रूप में किया गया था।

दोनों की नियुक्ति को लेकर बाद में निगरानी विभाग की जांच शुरू हुई। इसी जांच के दौरान उनके शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

TET अंक पत्र के सत्यापन में सामने आई गड़बड़ी

जांच के दौरान संबंधित शिक्षक के आवेदन के साथ लगाए गए वर्ष 2011 के बिहार शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET अंक पत्र को सत्यापन के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना भेजा गया।

दस्तावेज में रोल नंबर 1903112228, सीरियल नंबर 011321 और 84 अंक के साथ उत्तीर्ण होने की जानकारी दर्ज थी। निगरानी विभाग ने इस प्रमाण पत्र की वास्तविकता की पुष्टि के लिए बोर्ड से सत्यापन कराया।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से भेजे गए सत्यापन प्रतिवेदन में अंक पत्र को लेकर गंभीर विसंगति सामने आने की बात कही गई है। यहीं से कथित फर्जीवाड़े की जांच को महत्वपूर्ण आधार मिला।

रोल नंबर पर किसी दूसरी अभ्यर्थी का रिकॉर्ड

निगरानी विभाग के प्रतिवेदन के अनुसार, जिस रोल नंबर का इस्तेमाल अपरजीत कुमार के दस्तावेज में किया गया था, बोर्ड के रिकॉर्ड में वह रोल नंबर किसी दूसरी अभ्यर्थी के नाम से दर्ज मिला।

रिपोर्ट में बताया गया कि उक्त रोल नंबर पर अपरजीत कुमार के बजाय बुलबुल कुमारी, पिता विश्वनाथ धारी का रिकॉर्ड मौजूद था।

बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक बुलबुल कुमारी ने वर्ष 2011 की परीक्षा में 55 अंक प्राप्त किए थे और उनका परिणाम अनुत्तीर्ण दर्ज था। इसके विपरीत, जांच में अपरजीत कुमार के पास प्रस्तुत अंक पत्र में 84 अंक और उत्तीर्ण होने की जानकारी दर्ज मिली।

इसी अंतर के आधार पर निगरानी विभाग ने संबंधित अंक पत्र को जांच में फर्जी दस्तावेज माना है।

फर्जी दस्तावेज से नौकरी पाने का आरोप

निगरानी विभाग के प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित शिक्षक ने कथित तौर पर फर्जी TET अंक पत्र को वास्तविक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया में अन्य अज्ञात लोगों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है। आरोप है कि कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर शिक्षक नियुक्ति का लाभ प्राप्त किया गया।

हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों की शुरुआत है। मामले में आगे की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेज कैसे तैयार हुआ, उसका इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

दूसरे शिक्षक के दस्तावेजों की भी जांच

मामले में राजीव रंजन पांडेय को भी नामजद किया गया है। निगरानी विभाग ने दोनों शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

राजीव रंजन पांडेय से जुड़े दस्तावेजों और नियुक्ति प्रक्रिया की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निगरानी विभाग पूरे मामले में नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कर रहा है।

इस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

निगरानी जांच से शिक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल

शिक्षक नियुक्तियों में शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर न केवल नियुक्ति प्रक्रिया बल्कि संबंधित अभ्यर्थी की पात्रता भी जांच के दायरे में आती है।

बेगूसराय का यह मामला भी इसी वजह से चर्चा में है। वर्ष 2015 में हुई पंचायत शिक्षक नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कई साल बाद सामने आई कथित विसंगतियों तक पहुंची है।

अब निगरानी विभाग और पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कैसे हुआ और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।

फिलहाल बखरी थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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