आरा में कर्मचारी महासंघ का 22वां सम्मेलन, पेंशन पर आंदोलन तेज
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👉 WhatsApp से जुड़ेंआरा में कर्मचारी महासंघ का 22वां राज्य सम्मेलन शुरू हो गया है। कर्मचारी महासंघ का 22वां राज्य सम्मेलन आरा के ग्रीन रिजोर्ट, चंदवा में झंडोत्तोलन और शहीद बेदी पर माल्यार्पण के साथ शुरू हुआ। सम्मेलन में पुरानी पेंशन, एनपीएस और यूपीएस, नियमित नियुक्ति, श्रम अधिकार तथा सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में करीब 500 प्रतिनिधियों और पर्यवेक्षकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। प्रतिनिधि सत्र में संगठन की मौजूदा स्थिति और आगे के आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होगी।
पुरानी पेंशन और कर्मचारी अधिकारों पर जोर
सम्मेलन में कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इनमें सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने, पीएफआरडीए कानून को रद्द करने और एनपीएस एवं यूपीएस व्यवस्था को वापस लेने की मांग शामिल है।
महासंघ ने नियमित नियुक्ति के साथ कर्मचारियों के श्रम अधिकार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को केवल वेतन और भत्तों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
रोजगार की स्थिरता, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, ट्रेड यूनियन अधिकार और सार्वजनिक सेवाओं की मजबूती भी कर्मचारी संगठनों के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
दिल्ली की कर्मचारी रैली में भागीदारी का आह्वान
खुले सत्र का उद्घाटन अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने किया। उन्होंने पेंशन को कर्मचारियों के सेवा अधिकार से जोड़ते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग रखी।
सुभाष लांबा ने पीएफआरडीए कानून को रद्द करने और एनपीएस तथा यूपीएस को वापस लेने की मांग भी उठाई। उन्होंने बिहार के कर्मचारियों से 12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित कर्मचारी रैली में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया।
सम्मेलन में कर्मचारी संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने पेंशन व्यवस्था को लेकर अपनी मांगों को आगे बढ़ाने और आंदोलन को व्यापक बनाने पर चर्चा की।
चार लेबर कोड वापस लेने की मांग
सीटू की राष्ट्रीय नेता ए. आर. सिंधु ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने चार नए लेबर कोड वापस लेने की मांग रखी।
उन्होंने ट्रेड यूनियन अधिकारों की रक्षा और कर्मचारियों तथा मजदूरों के लिए सम्मानजनक जीवन-यापन के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी तय करने पर जोर दिया।
श्रम अधिकारों से जुड़े इन मुद्दों को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से आगे भी आंदोलन और कार्यक्रम चलाने की बात कही गई है।
8वें वेतन आयोग समेत कई मुद्दों पर चर्चा
सम्मेलन में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा सुरक्षा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बातें रखीं।
कार्यक्रम में जलेस के अध्यक्ष प्रो. नीरज सिंह, कर्मचारी नेता मंजुल कुमार दास, राजकिशोर राय, पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी और पूर्व विधान पार्षद लालदास राय समेत कई लोगों ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कर्मचारी और मजदूर वर्ग से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार रोजगार और सेवा सुरक्षा के साथ लोकतांत्रिक अधिकार तथा सार्वजनिक सेवाओं की मजबूती भी महत्वपूर्ण विषय हैं।
प्रतिनिधि सत्र में तय होगी आगे की रणनीति
खुले सत्र के बाद देर शाम प्रतिनिधि सत्र आयोजित किया जाना है। इस सत्र में संगठन की वर्तमान स्थिति, कर्मचारियों की समस्याओं और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी।
सम्मेलन में आने वाले समय के आंदोलन और संगठन की कार्ययोजना को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। पुरानी पेंशन, नियमित नियुक्ति, श्रम अधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को आगे किस तरह उठाया जाए, इस पर प्रतिनिधियों की चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आरा में आयोजित यह राज्य सम्मेलन कर्मचारी संगठनों के लिए अपनी मांगों और आगामी कार्यक्रमों पर सामूहिक रूप से चर्चा करने का मंच बना है। सम्मेलन की आगे की कार्यवाही में संगठन की रणनीति और प्रस्तावित आंदोलनों से जुड़े फैसलों की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
