यूपी में छात्रों से सीधे जुड़ेंगे IAS-IPS, हर महीने स्कूलों में लगेगी क्लास
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👉 WhatsApp से जुड़ेंउत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद बढ़ाने के लिए नई पहल शुरू करने की तैयारी की है। IAS-IPS अधिकारी अब हर महीने स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों से सीधे बातचीत करेंगे। IAS-IPS अधिकारी छात्रों को करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और जीवन से जुड़े अहम फैसलों पर मार्गदर्शन देंगे। सरकार का उद्देश्य युवाओं को सही दिशा देना और उनके सवालों का व्यावहारिक जवाब उपलब्ध कराना है।
इस कार्यक्रम के तहत आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के कम से कम एक इंटरमीडिएट स्तर के स्कूल में हर महीने पहुंचना होगा। वहां अधिकारी छात्रों के साथ सवाल-जवाब का सत्र करेंगे और अपने अनुभव साझा करेंगे।
हर महीने स्कूल जाएंगे वरिष्ठ अधिकारी
राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक जिला स्तर पर इस कार्यक्रम को नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। जिला मजिस्ट्रेट अधिकारियों की भागीदारी तय करने के साथ मासिक कार्यक्रम का कैलेंडर तैयार करेंगे।
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी जिलाधिकारियों को इस पहल को लागू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने भी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि स्कूलों में बातचीत का सिलसिला नियमित बना रहे।
सरकार की योजना केवल भाषण देने तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को छात्रों के साथ संवाद करना होगा, उनकी समस्याएं सुननी होंगी और सवालों के जवाब देने होंगे। इससे विद्यार्थियों को सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर भी मिलेगा।
UPSC से NEET तक, करियर पर मिलेगी जानकारी
इन संवाद सत्रों में छात्रों को अलग-अलग करियर विकल्पों के बारे में जानकारी दी जाएगी। अधिकारी अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा से जुड़े सवालों पर चर्चा करेंगे।
छात्र UPSC, UPPSC, UPSSSC, SSC, NDA, IIT-JEE, NEET और CUET जैसी परीक्षाओं से संबंधित जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। इसके साथ ही तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक पाठ्यक्रम, स्टार्टअप और बिजनेस मैनेजमेंट जैसे विकल्पों पर भी बातचीत होगी।
सरकार चाहती है कि विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक करियर विकल्पों तक सीमित जानकारी न मिले। उन्हें सरकारी योजनाओं, वित्तीय समझ और भविष्य की बदलती रोजगार संभावनाओं के बारे में भी बताया जाएगा।
साइबर सुरक्षा और तनाव से निपटने पर भी चर्चा
कार्यक्रम में छात्रों की पढ़ाई और करियर के अलावा उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़े विषय भी शामिल किए जाएंगे। इनमें साइबर सुरक्षा, नशे से बचाव, तनाव प्रबंधन और आत्मविश्वास बढ़ाना प्रमुख हैं।
अधिकारी छात्रों को लक्ष्य तय करने, समय का बेहतर इस्तेमाल करने और असफलता के बाद दोबारा प्रयास करने के लिए प्रेरित करेंगे। अधिकारियों के अपने अनुभवों के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश होगी कि प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर की राह में आने वाली चुनौतियों का सामना कैसे किया जा सकता है।
इस पहल के तहत छात्रों को अपने सवाल खुलकर पूछने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि सीधे संवाद से विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों और उनकी सोच को समझने में भी मदद मिलेगी।
हर कार्यक्रम की रिपोर्ट सरकार तक पहुंचेगी
जिलाधिकारियों को कार्यक्रमों की निगरानी की जिम्मेदारी भी दी गई है। प्रत्येक जिले में हर महीने होने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
निर्देश के अनुसार, हर महीने की 5 तारीख तक माध्यमिक शिक्षा विभाग को पिछले महीने आयोजित कार्यक्रमों की रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसमें स्कूल का नाम, कार्यक्रम में शामिल अधिकारी, चर्चा किए गए विषय और छात्रों की ओर से दिए गए सुझाव दर्ज होंगे।
सरकार इस पहल को युवा विद्यार्थियों के साथ प्रशासन का संपर्क मजबूत करने के प्रयास के रूप में देख रही है। अधिकारियों के मुताबिक, संवाद का उद्देश्य छात्रों को सकारात्मक दिशा देना और उनके भविष्य से जुड़े फैसलों में व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है।
पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि विभाग को मुख्य सचिव के निर्देश को आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधिकारिक आदेश में ‘Gen Z’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है, हालांकि कार्यक्रम विशेष रूप से स्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के छात्रों के लिए है।
इस पहल को लेकर सरकार का जोर केवल करियर काउंसलिंग पर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की समग्र क्षमता विकसित करने पर भी है। अब देखना होगा कि जिलों में ये संवाद सत्र किस तरह आयोजित होते हैं और छात्रों की भागीदारी से इन्हें कितना प्रभावी बनाया जा सकता है।
