सावन की तीसरी सोमवारी पर उज्जैन में उमड़ा सैलाब, 24 घंटे खुले कपाट

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में सावन की तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महाकाल की नगरी में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंचे। खास आकर्षण का केंद्र नागचंद्रेश्वर मंदिर रहा, जहां मध्यरात्रि में मंदिर के कपाट खोल दिए गए। कपाट लगातार 24 घंटे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुले रहेंगे।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की एक दुर्लभ प्रतिमा विराजमान है। मान्यता के अनुसार दोनों नागराज के फन के नीचे विराजित हैं। नाग पंचमी के अवसर पर इस विशेष प्रतिमा के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अब तक करीब चार लाख श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। वहीं, लगभग डेढ़ लाख लोगों ने महाकालेश्वर मंदिर में भी दर्शन किए हैं।

नाग पंचमी पर 24 घंटे खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट

नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट नाग पंचमी और सावन की तीसरी सोमवारी के विशेष अवसर पर आधी रात को खोले गए। आम दिनों में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं, लेकिन इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रतिमा के दर्शन का अवसर मिलता है।

मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा नागराज के फन के नीचे विराजमान है। इसी विशेष स्वरूप के कारण नाग पंचमी पर यहां दर्शन का धार्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है।

कपाट खुलने के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं।

चार लाख श्रद्धालुओं ने किए नागचंद्रेश्वर के दर्शन

स्थानीय प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, नागचंद्रेश्वर मंदिर में अब तक लगभग चार लाख श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। सावन की सोमवारी और नाग पंचमी एक साथ पड़ने के कारण मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ देखने को मिली।

इसके अलावा महाकालेश्वर मंदिर में भी करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। उज्जैन में दोनों प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण प्रशासन को भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना पड़ा।

श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई। बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारियों की मौजूदगी में व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।

अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मंदिरों में प्रवेश और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए हैं। इसका उद्देश्य भीड़ को एक ही स्थान पर जमा होने से रोकना और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना है।

नागचंद्रेश्वर और महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने के कारण प्रशासन ने भीड़ की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाई है। अलग प्रवेश और निकास व्यवस्था से दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को बाहर निकलने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

सावन की तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी का संयोग होने के कारण उज्जैन में धार्मिक गतिविधियां भी तेज हैं। मंदिरों में दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है उज्जैन

उज्जैन को देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में गिना जाता है। यहां महाकालेश्वर मंदिर के साथ नागचंद्रेश्वर मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

नाग पंचमी के अवसर पर नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अवसर माना जाता है। इसी वजह से हर वर्ष इस दिन बड़ी संख्या में लोग उज्जैन पहुंचते हैं।

इस बार भी श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी के बीच प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को संभालने के लिए अलग-अलग मार्ग और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था लागू की है। कपाट 24 घंटे खुले रहने के कारण श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर लगातार मिलता रहेगा।


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