घुटनों के बल 100 KM कांवड़ यात्रा, सुबोध की भक्ति देख भावुक हुए भक्त
सुल्तानगंज/देवघर: सुल्तानगंज देवघर कांवड़ यात्रा में इस बार एक ऐसी भक्ति देखने को मिली, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुल्तानगंज देवघर कांवड़ यात्रा के रास्ते पर लखीसराय के रहने वाले सुबोध कुमार घुटनों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। कठिन तपस्या और दर्द के बावजूद उनके चेहरे पर आस्था और संकल्प साफ दिखाई दे रहा है।
कांवड़ यात्रा के दौरान जहां हजारों श्रद्धालु पैदल चलकर देवघर पहुंच रहे हैं, वहीं सुबोध कुमार ने अपनी अलग तरह की कठिन साधना से लोगों को भावुक कर दिया है।
घुटनों के बल तय कर रहे हैं बाबा धाम का रास्ता
लखीसराय निवासी सुबोध कुमार ने बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए बेहद कठिन रास्ता चुना है।
वह सुल्तानगंज से देवघर तक की दूरी घुटनों के बल चलकर पूरी कर रहे हैं। उनकी यात्रा की रफ्तार बेहद धीमी है, लेकिन उनका विश्वास मजबूत है।
जानकारी के अनुसार, उन्होंने पांच से सात दिनों में करीब सात किलोमीटर की दूरी ही तय की है।
इस हिसाब से देखा जाए तो उन्हें पूरी यात्रा पूरी करने में दो महीने से ज्यादा समय लग सकता है। लेकिन लंबा समय और शारीरिक तकलीफ भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर पा रही है।
बेटे ने संभाली पिता की कठिन यात्रा की जिम्मेदारी
सुबोध कुमार की इस कठिन यात्रा में उनका बेटा भी हर कदम पर साथ दे रहा है।
बेटा अपने पिता के आगे-आगे चलता है और उनके घुटनों को आराम देने के लिए रास्ते में फोम की पैडिंग बिछाता जाता है।
इस दृश्य को देखकर कांवड़ मार्ग से गुजरने वाले कई श्रद्धालु भावुक हो जाते हैं।
पिता की भक्ति और बेटे की सेवा का यह अनोखा उदाहरण लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
दर्द के बावजूद नहीं टूटा आस्था का विश्वास
घुटनों के बल चलने के कारण सुबोध कुमार के घुटने बुरी तरह छिल गए हैं।
कुछ किलोमीटर की यात्रा के बाद ही उन्हें काफी दर्द और परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
उनका कहना है कि बाबा भोलेनाथ के दरबार तक पहुंचना ही उनका लक्ष्य है।
सुबोध कुमार ने कहा कि चाहे यात्रा में कितना भी समय लगे और कितनी भी परेशानी क्यों न आए, वह देवघर पहुंचकर ही रुकेंगे।
उनकी यह भावना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास की प्रेरणा बन रही है।
कांवड़ मार्ग पर दिख रही है भक्ति की अलग-अलग तस्वीरें
सुल्तानगंज से देवघर तक कांवड़ यात्रा का रास्ता हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है।
इस दौरान कोई नंगे पैर यात्रा करता है, तो कोई दंडवत प्रणाम करते हुए बाबा धाम की ओर बढ़ता है।
कई भक्त कठिन नियमों और तपस्या के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा और विश्वास उन्हें हर मुश्किल पार करने की शक्ति देता है।
सुबोध कुमार की यात्रा बनी प्रेरणा
सुबोध कुमार की घुटनों के बल यात्रा ने यह दिखाया है कि आस्था के सामने कठिनाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं।
उनकी यात्रा सिर्फ एक धार्मिक सफर नहीं, बल्कि धैर्य, संकल्प और विश्वास की कहानी बन गई है।
कांवड़ मार्ग पर मौजूद लोग उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं और उनके जल्द बाबा धाम पहुंचने की कामना कर रहे हैं।
धार्मिक यात्राओं में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहां श्रद्धालु अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए कठिन रास्ते चुनते हैं।
बाबा बैद्यनाथ धाम तक पहुंचने का संकल्प
सुबोध कुमार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बाबा के दर्शन करना है।
वह मानते हैं कि भोलेनाथ की कृपा से उन्हें यह कठिन यात्रा पूरी करने की शक्ति मिल रही है।
भले ही उनकी चाल धीमी है, लेकिन उनका विश्वास अडिग है।
सुल्तानगंज से देवघर तक की यह यात्रा अब केवल दूरी तय करने की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह आस्था और समर्पण की मिसाल बन चुकी है।

