समस्तीपुर नवोदय विद्यालय में रैगिंग का खौफ, जूनियर छात्रों की पिटाई
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समस्तीपुर के पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बिरौली में रैगिंग का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। छात्रावास में रैगिंग का मामला सामने आने के बाद कई जूनियर छात्रों ने सीनियर छात्रों पर मारपीट और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित छात्रों के अनुसार, शुक्रवार देर रात शिक्षकों की जांच के बाद कक्षा-8 के कुछ छात्रों ने कक्षा-7 के विद्यार्थियों को कमरे में बुलाया और उनके साथ मारपीट की। घटना में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई है।
बताया जा रहा है कि घटना के बाद घायल छात्रों को पूसा अनुमंडलीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। मामले ने स्कूल के छात्रावास में सुरक्षा, अनुशासन और रैगिंग रोकने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात में जूनियर छात्रों को कमरे में बुलाने का आरोप
पीड़ित छात्रों के मुताबिक, शुक्रवार रात करीब 11 बजे शिक्षकों की चेकिंग पूरी होने के बाद कक्षा-8 के करीब 20 से 25 छात्रों ने जूनियर विद्यार्थियों को बुलाया।
आरोप है कि उदयगिरी हाउस में कक्षा-7 के छात्रों को कमरे में बुलाकर कथित तौर पर बाल्टी पर बैठाया गया। इसके बाद बारी-बारी से उनकी पिटाई की गई।
छात्रों ने आरोप लगाया कि मारपीट के लिए बेल्ट का इस्तेमाल किया गया। कुछ विद्यार्थियों की हालत बिगड़ने के बावजूद कथित तौर पर उनके साथ दोबारा मारपीट की गई।
पीड़ितों के अनुसार, जिन छात्रों की तबीयत खराब हो गई या जो बेहोश हो गए, उन्हें पानी पिलाकर होश में लाने के बाद फिर से पीटा गया। इन आरोपों ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है।
छोटे-छोटे काम नहीं करने पर प्रताड़ित करने का आरोप
पीड़ित छात्रों ने बताया कि कथित तौर पर उन्हें लंबे समय से रैगिंग जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा था। खाना लाने और कमरे की सफाई जैसे काम नहीं करने पर सीनियर छात्रों द्वारा परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया है।
छात्रों के अनुसार, इससे पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आई थीं और कार्रवाई की गई थी। हालांकि, आरोप है कि छुट्टी के बाद छात्रावास लौटने पर कुछ सीनियर विद्यार्थियों ने फिर से जूनियर छात्रों को परेशान करना शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि ताजा घटना में करीब दर्जनभर जूनियर छात्रों को चोटें आईं। घटना के बाद छात्रावास में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हालांकि, पूरे मामले में आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच जरूरी है। स्कूल प्रशासन की ओर से सामने आने वाली जानकारी के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
मेस में विवाद के बाद बढ़ा मामला?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत छात्रावास के मेस में खाना खाने के दौरान हुए विवाद से होने की बात कही जा रही है। इसके बाद मामला कथित तौर पर मारपीट तक पहुंच गया।
फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विवाद और रैगिंग के आरोपों के बीच वास्तविक घटनाक्रम क्या था। इसके लिए स्कूल प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल छात्रावास में विद्यार्थियों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर उठ रहा है। जवाहर नवोदय विद्यालय जैसे आवासीय शिक्षण संस्थान में बड़ी संख्या में छात्र परिसर में रहते हैं। ऐसे में अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ जूनियर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी अहम जिम्मेदारी है।
छात्रावास व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शिक्षकों की नियमित निगरानी के बावजूद रात में छात्रावास के भीतर कथित तौर पर इतनी गंभीर घटना कैसे हुई।
यदि पहले भी ऐसी शिकायतें मिली थीं, तो उनकी निगरानी और रोकथाम के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए गए, यह भी जांच का विषय बन सकता है।
रैगिंग और किसी भी तरह की शारीरिक प्रताड़ना का असर विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ उनकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में शिकायत मिलने के बाद समय पर कार्रवाई और पीड़ित छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
अभी प्राथमिकता घायल छात्रों के इलाज और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। साथ ही, आरोपों की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाना जरूरी होगा कि घटना में कौन-कौन शामिल था और छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई कमी रही या नहीं।
अब जांच और कार्रवाई पर नजर
घटना के बाद अभिभावकों और छात्रों के बीच भी चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में स्कूल प्रशासन से अपेक्षा रहती है कि वह तथ्यों की जांच कर जिम्मेदार विद्यार्थियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करे।
साथ ही, छात्रों को शिकायत करने के सुरक्षित और गोपनीय माध्यम उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि किसी तरह की प्रताड़ना होने पर वे बिना डर अपनी बात रख सकें।
समस्तीपुर के बिरौली स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में सामने आया यह मामला अब केवल मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि आवासीय स्कूलों में रैगिंग रोकने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर भी ध्यान खींच रहा है।
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