33 साल पुराना ये राखी गीत आज भी रुला देता है,भाई-बहन के प्यार की ऐसी खूबसूरत कहानी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंरक्षाबंधन आते ही भाई की कलाई पर सजी राखी और बहन की मुस्कान के साथ पुराने फिल्मी गीत भी याद आने लगते हैं। रक्षाबंधन का गीत जब भाई-बहन के प्यार की बात करता है तो भावनाएं अपने आप जुड़ जाती हैं। लेकिन रक्षाबंधन का गीत अगर खुशियों से शुरू होकर दर्दनाक मोड़ पर खत्म हो, तो उसकी याद लंबे समय तक दिल में रहती है। ऐसा ही एक गीत 1993 में आई फिल्म तिरंगा में दिखाया गया था, जिसे आज भी भाई-बहन के रिश्ते से जुड़े भावुक गानों में याद किया जाता है।
इस गीत के बोल हैं—“इसे समझो ना रेशम का तार भैया, मेरी राखी का मतलब है प्यार भैया”। गीत को साधना सरगम ने आवाज दी थी। इसके बोल गीतकार संतोष आनंद ने लिखे थे, जबकि संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था।
राखी के धागे में छिपा था भाई-बहन का प्यार
गाने की शुरुआत रक्षाबंधन की पारंपरिक खुशियों के साथ होती है। बहन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती है और इस छोटे से धागे के जरिए अपने प्यार और भावनाओं को व्यक्त करती है।
गीत का मूल भाव यही है कि राखी केवल रेशम का एक धागा नहीं है। इसके साथ बहन की उम्मीद, भाई के प्रति स्नेह और रिश्ते की गहराई जुड़ी होती है।
यही सरल भावना इस गाने को खास बनाती है। इसमें रक्षाबंधन के त्योहार को सिर्फ रस्म के तौर पर नहीं, बल्कि भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते के रूप में दिखाया गया है।
खुशियों से अचानक दर्द में बदल जाती है कहानी
गाने की सबसे बड़ी खासियत उसका भावनात्मक बदलाव है। शुरुआत में सब कुछ सामान्य और खुशनुमा नजर आता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ते ही माहौल पूरी तरह बदल जाता है।
फिल्म में बहन के तीन भाइयों में से एक को गोली लग जाती है। भाई के आखिरी पलों में बहन उसे राखी बांधती है। यही दृश्य पूरे गीत की भावना को एक अलग स्तर पर पहुंचा देता है।
एक तरफ बहन के हाथ में राखी होती है और दूसरी तरफ भाई जिंदगी की आखिरी सांसों से जूझ रहा होता है। राखी, जो सामान्य तौर पर खुशी और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है, उसी पल बिछड़ने के दर्द से जुड़ जाती है।
यही वजह है कि गीत सुनते-सुनते दर्शक भावुक हो जाते हैं। भाई-बहन के बीच प्यार दिखाने वाला गीत अचानक भाई को खोने के दर्द की कहानी बन जाता है।
फिल्म 'तिरंगा' का यह गाना आज भी क्यों याद है?
1993 में रिलीज हुई तिरंगा में राजकुमार और नाना पाटेकर प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म अपने दमदार संवादों और देशभक्ति से जुड़े अंदाज के लिए काफी चर्चित रही।
समय के साथ फिल्म के कई संवाद लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन गए। आज भी सोशल मीडिया पर इसके डायलॉग और दृश्यों से जुड़े मीम्स देखने को मिलते हैं।
हालांकि फिल्म का राखी गीत एक अलग वजह से याद किया जाता है। इसमें भाई-बहन के रिश्ते को एक ऐसे मोड़ पर दिखाया गया है, जहां त्योहार की खुशी और अपनों को खोने का दर्द एक साथ सामने आता है।
साधना सरगम की आवाज ने बढ़ाई भावनाओं की गहराई
इस गीत को साधना सरगम ने अपनी आवाज दी थी। उनकी गायकी में गीत की भावनात्मक प्रकृति साफ महसूस होती है।
संतोष आनंद के लिखे शब्द सीधे भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ते हैं। वहीं लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत कहानी के भावनात्मक माहौल को और प्रभावी बनाता है।
गीत की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि इसके शब्द बेहद सरल हैं। इसमें राखी को महंगे उपहार या बड़ी रस्म से नहीं, बल्कि प्यार और रिश्ते की निशानी के रूप में समझाया गया है।
33 साल बाद भी रक्षाबंधन पर होती है चर्चा
आज 33 साल बाद भी जब रक्षाबंधन के पुराने और भावुक गानों की बात होती है, तो तिरंगा का यह गीत याद किया जाता है।
इसकी खासियत केवल पुराना होना नहीं है। गीत आज भी इसलिए असर करता है क्योंकि भाई-बहन का रिश्ता समय के साथ नहीं बदलता। राखी का धागा आज भी उसी प्यार, विश्वास और अपनापन का प्रतीक है।
लेकिन इस गीत की कहानी उस रिश्ते के दूसरे पहलू को भी दिखाती है—जब भाई की कलाई पर राखी बांधने की खुशी के बीच बहन को उसके बिछड़ने का दर्द झेलना पड़ता है।
शायद यही वजह है कि रक्षाबंधन के मौके पर यह गीत सुनते ही कई लोगों को अपने भाई या बहन की याद आ जाती है। खुशियों से शुरू होकर दर्द तक पहुंचने वाली इसकी कहानी इसे बाकी राखी गीतों से अलग बनाती है।
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