राष्ट्रपति मुर्मू ने 100 से अधिक कलाकारों को दिया बड़ा सम्मान
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👉 WhatsApp से जुड़ेंनई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के 100 से अधिक कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार 2024-2025 प्रदान किए। इन सम्मानित कलाकारों ने संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय कला, कठपुतली, पारंपरिक थिएटर और प्रदर्शन कला से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
राष्ट्रपति ने कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि ये पुरस्कार आधुनिक भारत की प्रतिभा, रचनात्मकता और समर्पण को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत बेहद व्यापक है और देश के अलग-अलग हिस्सों में संगीत, नृत्य तथा रंगमंच की विविध परंपराएं आज भी मौजूद हैं।
उन्होंने कलाकारों की भूमिका को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं बताया, बल्कि उन्हें देश की सांस्कृतिक पहचान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
देश की विविध लोक कलाओं को बचाने में कलाकारों की अहम भूमिका
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत में संगीत की अनेक प्रणालियां और नृत्य की असंख्य शैलियां हैं। इसी तरह लोक रंगमंच और पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं के भी अलग-अलग क्षेत्रों में कई स्वरूप देखने को मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि इन कलाओं के संरक्षण में कलाकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। स्थानीय परंपराओं और लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए कलाकार लगातार काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत नई पीढ़ी तक पहुंच रही है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आधुनिक समय में कई पारंपरिक लोक कला विधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए समय रहते ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
लुप्त होती कलाओं का दस्तावेजीकरण जरूरी
राष्ट्रपति ने चिंता जताई कि देश की कुछ लोक कला परंपराएं विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कला विधाओं का व्यवस्थित तरीके से दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए, ताकि उनके इतिहास, तकनीक और परंपराओं को सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने इस दिशा में विशेष प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रपति के मुताबिक केवल दस्तावेज तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन कला रूपों को व्यवहार में जीवित रखने के लिए कलाकारों और संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित किए जा रहे कला-दीक्षा कार्यक्रम पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। इस तरह के कार्यक्रमों से युवा कलाकारों को पारंपरिक कला विधाओं से जोड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वरिष्ठ कलाकारों से नई पीढ़ी को तैयार करने की अपील
राष्ट्रपति ने वरिष्ठ और अनुभवी कलाकारों से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रशिक्षित करें और अपने अनुभवों को उनके साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि कला की परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा और प्रशिक्षण की भूमिका महत्वपूर्ण है।
संगीत नाटक अकादमी के ये सम्मान उन कलाकारों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देते हैं, जिन्होंने वर्षों तक भारतीय प्रदर्शन कलाओं को समृद्ध करने में योगदान दिया है। राष्ट्रपति द्वारा सम्मान प्रदान किए जाने से कलाकारों के साथ-साथ देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को भी विशेष पहचान मिली है।
भारत की लोक, जनजातीय और पारंपरिक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण के लिए कलाकारों, संस्थाओं और नई पीढ़ी के बीच मजबूत जुड़ाव आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकता है।
