माइनिंग बिल पर सरकार का बड़ा दावा, राज्यों के अधिकारों पर नहीं असर
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसंसद से पारित हुए खनिज क्षेत्र से जुड़े संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों के हितों पर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill से किसी भी राज्य के अधिकार कम नहीं होंगे और न ही राज्यों के मौजूदा राजस्व ढांचे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में प्रमुख खनिजों का उत्पादन बढ़ाना और खनन क्षेत्र में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि सरकार खनन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी सरकारी व्यवस्था को एक साथ लेकर काम कर रही है। इसके तहत खनिज उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और देश की आयात पर निर्भरता घटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राज्यों के अधिकार और राजस्व को लेकर सरकार का दावा
जी. किशन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि नए विधेयक का उद्देश्य राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करना नहीं है। उनके अनुसार, खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खनन से प्राप्त राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी अब बढ़कर करीब 85 प्रतिशत हो गई है, जबकि पहले यह हिस्सा लगभग 65 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए खनिज क्षेत्र के सुधारों के बाद राज्यों की खनिज आय में भी करीब 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार का तर्क है कि खनन गतिविधियों के विस्तार से राज्यों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।
खनिज उत्पादन बढ़ाना सरकार की बड़ी प्राथमिकता
केंद्र सरकार खनिज उत्पादन में तेजी लाने को इस संशोधन विधेयक का प्रमुख उद्देश्य बता रही है। देश में बुनियादी ढांचे, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए प्रमुख खनिजों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
मंत्री के मुताबिक, सरकार खनन क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित करने की दिशा में भी काम कर रही है। निवेश बढ़ने से नई परियोजनाओं के साथ रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार का फोकस खनिज संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर है।
चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्र का फोकस
जी. किशन रेड्डी ने सरकार की खनिज नीति के चार प्रमुख आधार भी बताए। पहला लक्ष्य देश में जरूरी खनिजों की उपलब्धता बढ़ाना है। दूसरा रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है। तीसरा राज्यों को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाना है।
चौथा और महत्वपूर्ण लक्ष्य कोयला तथा अन्य प्रमुख खनिजों के लिए भारत की आयात निर्भरता कम करना है। सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से देश की जरूरतें बड़े स्तर पर देश के भीतर पूरी की जा सकेंगी और आयात पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा।
इस तरह केंद्र सरकार ने संसद से पारित माइनिंग बिल को खनिज क्षेत्र में उत्पादन, निवेश और रोजगार बढ़ाने वाला सुधार बताया है। साथ ही सरकार ने राज्यों को भरोसा दिलाया है कि उनके अधिकारों और राजस्व हितों पर इस कानून का प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
