PK की तारीफ पर NDA में घमासान! संतोष सुमन बोले- 10 हजार नौकरी देकर दिखाएं

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


बिहार की राजनीति में Bihar Politics को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। Bihar Politics में इस बार चर्चा प्रशांत किशोर को लेकर है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पीके के विकास और रोजगार की बातों का समर्थन किया था, लेकिन बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने प्रशांत किशोर के राजनीतिक दावों पर सवाल खड़े किए हैं। संतोष सुमन ने कहा कि चिराग पासवान ने ऐसा कुछ नहीं कहा, जिस पर विवाद होना चाहिए। उनके मुताबिक चिराग ने केवल उन लोगों के समर्थन की बात कही है, जो बिहार के विकास और रोजगार की बात करते हैं। हालांकि, प्रशांत किशोर को लेकर संतोष सुमन की राय चिराग पासवान से काफी अलग नजर आती है।

प्रशांत किशोर पर संतोष सुमन ने क्यों साधा निशाना?

संतोष सुमन ने कहा कि प्रशांत किशोर ने विकास की बात करके नहीं, बल्कि लोगों के बीच भ्रम पैदा करके चुनाव जीता है। उन्होंने बांकीपुर के मतदाताओं के बीच किए गए दावों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव जीतना और वादों को पूरा करना अलग-अलग बातें हैं। मंत्री के मुताबिक विकास की बात करना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। अब प्रशांत किशोर के सामने अगले चार साल में अपने दावों और वादों को साबित करने की चुनौती है। संतोष सुमन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध विकास की बात करने से नहीं है। उनका सवाल इस बात को लेकर है कि जो वादे जनता से किए गए हैं, उन्हें पूरा कैसे किया जाएगा।

10 हजार नौकरियों के वादे पर भी सवाल

प्रशांत किशोर के रोजगार संबंधी दावों पर भी संतोष सुमन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पीके ने बांकीपुर के 10 हजार लोगों को नौकरी देने की बात कही है। अब मंत्री ने उन्हें यही वादा जमीन पर उतारकर दिखाने की चुनौती दी है। उनका कहना है कि राजनीति में सिर्फ बयान देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जनता के सामने परिणाम भी दिखाई देना चाहिए। संतोष सुमन ने कहा कि अगर प्रशांत किशोर वास्तव में बांकीपुर के 10 हजार लोगों को रोजगार दिला देते हैं तो इससे उन्हें भी खुशी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि जनता के हित में होने वाला कोई भी काम सकारात्मक है। इसलिए अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशांत किशोर अपने रोजगार संबंधी दावों को किस तरह लागू करते हैं।

‘चुनाव जीतना अलग, वादे पूरे करना अलग’

संतोष सुमन ने प्रशांत किशोर की राजनीतिक स्थिति को लेकर कहा कि विधायक बनने के बाद अब उनकी असली परीक्षा शुरू हुई है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की परीक्षा बताते हुए कहा कि समय बताएगा कि प्रशांत किशोर इस परीक्षा में सफल होते हैं या नहीं। उनके बयान का सीधा संदेश यही रहा कि चुनावी जीत को राजनीतिक कामयाबी का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। जनता के बीच किए गए वादों को पूरा करना किसी भी जनप्रतिनिधि की बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसी आधार पर आने वाले वर्षों में प्रशांत किशोर के कामकाज का आकलन किया जाएगा।

चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर की तारीफ क्यों की?

प्रशांत किशोर को लेकर यह चर्चा उस समय शुरू हुई, जब चिराग पासवान ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना स्थित लोजपा (रामविलास) कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद उनके बारे में बयान दिया। चिराग ने कहा था कि प्रशांत किशोर बिहार में विकास और रोजगार की बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अगर कोई व्यक्ति जाति और धर्म की राजनीति से अलग बिहार के विकास की बात करता है तो वह उसका समर्थन करेंगे। हालांकि, चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया था। उन्होंने संकेत दिया था कि आने वाले वर्षों में पीके के लिए अपने दावों को साबित करना महत्वपूर्ण होगा। यही वजह है कि संतोष सुमन ने चिराग के बयान को विवाद का विषय मानने से इनकार किया। उन्होंने साफ किया कि विकास की बात का समर्थन करना और किसी नेता की पूरी राजनीतिक रणनीति का समर्थन करना एक ही बात नहीं है।

बांकीपुर में जीत के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा को हराकर जीत हासिल की है। इस जीत के साथ वह जन सुराज पार्टी के पहले विधायक बने। बांकीपुर में भाजपा की हार के बाद बिहार के राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा तेज हुई। इसी दौरान चिराग पासवान ने एनडीए के घटक दलों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया था। अब प्रशांत किशोर को लेकर चिराग पासवान की सकारात्मक टिप्पणी और संतोष सुमन की आलोचनात्मक प्रतिक्रिया ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के बयानों में एक महत्वपूर्ण समानता भी दिखाई देती है। दोनों ही यह मानते हैं कि प्रशांत किशोर के सामने अब अपने दावों को साबित करने की चुनौती है।

आगे क्या होगी प्रशांत किशोर की रणनीति?

बांकीपुर से विधायक बनने के बाद प्रशांत किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने चुनावी वादों को अमल में लाने की होगी। रोजगार और विकास उनके राजनीतिक अभियान के प्रमुख मुद्दों में रहे हैं। अब जनता के साथ-साथ दूसरे राजनीतिक दल भी उनके कामकाज पर नजर रखेंगे। खास तौर पर 10 हजार रोजगार से जुड़े दावे को लेकर आने वाले समय में उनसे सवाल पूछे जा सकते हैं। बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की एंट्री ने पहले ही मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में उनके कामकाज का असर सिर्फ बांकीपुर तक सीमित रहेगा या राज्य की राजनीति में भी दिखाई देगा, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल संतोष सुमन की प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि प्रशांत किशोर को लेकर एनडीए के भीतर एक जैसी राय नहीं है। चिराग पासवान जहां विकास और रोजगार के मुद्दे पर उनकी बात का समर्थन करते दिखे, वहीं संतोष सुमन ने इन्हीं दावों को जमीन पर उतारने की चुनौती दी है। 

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1