पीएम सूर्य घर योजना में बिहार पिछड़ा, अब रोज लगेंगे 2000 सोलर प्लांट
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में पीएम सूर्य घर योजना के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना की रफ्तार लक्ष्य के मुकाबले काफी धीमी नजर आ रही है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत नवंबर तक 2.50 लाख गरीब परिवारों की छतों पर 1.1 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक करीब 49 हजार घरों में ही इंस्टॉलेशन हो पाया है। ऐसे में तय समय सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करना विभाग और एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
राज्य में योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर कुटीर ज्योति श्रेणी यानी बीपीएल परिवारों के घरों पर 1.1 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र शत-प्रतिशत सब्सिडी के साथ लगाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य गरीब परिवारों के बिजली खर्च को कम करना और उन्हें सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
नवंबर तक 2.50 लाख घरों में प्लांट लगाने का लक्ष्य
राज्य में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के पहले चरण में 2.5 लाख उपभोक्ताओं की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन यानी यूएलए मॉडल अपनाया जा रहा है।
योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 14 जून को बिहार में की थी। इसके बाद करीब दो महीने आठ दिनों में 49 हजार घरों पर सोलर प्लांट लगाए गए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक अभी तक औसतन करीब 720 घरों में प्रतिदिन सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं। वहीं, नवंबर तक निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए अब बचे समय में करीब 2.01 लाख घरों को सोलर ऊर्जा से जोड़ना होगा।
यानी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इंस्टॉलेशन की रफ्तार मौजूदा गति से कई गुना बढ़ानी होगी। अनुमान के अनुसार अब हर दिन लगभग 2 हजार घरों में सोलर प्लांट लगाने की जरूरत होगी।
2.01 लाख घरों में इंस्टॉलेशन की बड़ी चुनौती
बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि तय समय में पर्याप्त संख्या में घरों तक इंस्टॉलेशन की सुविधा पहुंचाना है।
यदि वर्तमान रफ्तार करीब 720 घर प्रतिदिन के आसपास बनी रहती है, तो नवंबर तक 2.50 लाख घरों का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि सरकार ने संबंधित एजेंसियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
यह योजना लंबे समय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। राज्य में करीब 58 लाख गरीब परिवारों के घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का व्यापक लक्ष्य सामने रखा गया है। ऐसे में शुरुआती चरण की धीमी रफ्तार आने वाले चरणों के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।
सोलर प्लांट लगने से गरीब परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इससे पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
सामान्य परिवारों को भी मिलेगा सोलर पर बड़ा अनुदान
पीएम सूर्य घर योजना का लाभ केवल गरीब परिवारों तक सीमित नहीं है। सामान्य परिवारों के लिए भी घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
केंद्रीय योजना के तहत तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए अधिकतम 78 हजार रुपये तक केंद्रीय अनुदान का प्रावधान है।
इसके अलावा बिहार सरकार ने तीन किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट के लिए 20 हजार रुपये अतिरिक्त अनुदान देने का निर्णय लिया है। इस तरह पात्र उपभोक्ताओं को कुल मिलाकर 98 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
बताया गया है कि तीन किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने में औसतन करीब दो लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। ऐसे में करीब 98 हजार रुपये तक की सहायता मिलने से उपभोक्ताओं पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
एजेंसियों की निगरानी बढ़ी, लापरवाही पर कार्रवाई
योजना की धीमी रफ्तार को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी बढ़ा दी है। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के अनुसार, नवंबर के अंत तक ढाई लाख गरीब परिवारों के घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि योजना की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और संबंधित एजेंसियों को काम की गति बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि काम में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसी को काली सूची में भी डाला जा सकता है।
गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली देने की कोशिश
पीएम सूर्य घर योजना के तहत गरीब परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का मकसद सिर्फ सोलर पैनल लगाना नहीं है। इसके जरिए बिजली की उपलब्धता और घरेलू खर्च में राहत देने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, बिहार में पहले चरण का लक्ष्य तय समय में हासिल करने के लिए अब इंस्टॉलेशन की गति बढ़ाना सबसे अहम होगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एजेंसियां रोजाना करीब 2 हजार घरों तक पहुंचने के लक्ष्य को कितना हासिल कर पाती हैं।
अगर काम की रफ्तार बढ़ती है, तो बड़ी संख्या में गरीब परिवार सौर ऊर्जा से जुड़ सकते हैं। वहीं, शुरुआती चरण में लक्ष्य पूरा होने की सफलता आगे राज्य के लाखों परिवारों तक योजना का विस्तार करने की दिशा भी तय कर सकती है।
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