नीतीश कुमार क्यों हुए सुपर एक्टिव? बूथ स्तर पर JDU का बड़ा प्लान

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


 

पटना: नीतीश कुमार इन दिनों बिहार की राजनीति में पहले से ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। नीतीश कुमार सप्ताह में दो से तीन दिन JDU प्रदेश कार्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने का टास्क दिया गया है। राजनीतिक हलकों में उनकी इस सक्रियता को आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

बिहार में सिर्फ JDU ही नहीं, बल्कि RJD, BJP, HAM और दूसरे क्षेत्रीय दल भी अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच जन सुराज के जरिए प्रशांत किशोर की गांव-गांव सक्रियता ने भी राजनीतिक दलों के सामने नई चुनौती खड़ी की है।

नीतीश कुमार का JDU कार्यालय में बढ़ा आना-जाना

नीतीश कुमार शुक्रवार को JDU प्रदेश कार्यालय पहुंचे और वहां पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से पार्टी के कामकाज और जनसुनवाई कार्यक्रमों की जानकारी ली।

पार्टी कार्यालय पहुंचने पर बड़ी संख्या में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। नीतीश कुमार ने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उनकी बातों को सुना।

पार्टी संगठन से जुड़े लोगों को उन्होंने बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने पर विशेष जोर देने को कहा। साथ ही पिछले दो दशकों में बिहार में हुए विकास और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की बात कही।

इससे संकेत मिलता है कि JDU अब केवल शीर्ष स्तर की राजनीतिक गतिविधियों के बजाय स्थानीय संगठन को भी चुनावी रणनीति का प्रमुख आधार बनाना चाहता है।

प्रशांत किशोर के ‘पीके इफेक्ट’ की चर्चा क्यों?

बिहार की मौजूदा राजनीतिक हलचल में प्रशांत किशोर की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जन सुराज के माध्यम से वे लगातार गांवों और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

पदयात्राओं, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर संवाद के जरिए जन सुराज ने पारंपरिक दलों के सामने अलग तरह की राजनीतिक चुनौती पेश की है।

हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि JDU या RJD की मौजूदा रणनीति केवल प्रशांत किशोर की सक्रियता की वजह से बदली है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषण में इसे बिहार की बदलती चुनावी प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण पहलू जरूर माना जा रहा है।

ग्राउंड लेवल पर सक्रिय रहने की रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बूथ स्तर का संगठन मतदान के दिन समर्थकों को सक्रिय करने और स्थानीय समीकरण समझने में बड़ी भूमिका निभाता है।

तेजस्वी यादव भी बढ़ा रहे जमीनी सक्रियता

दूसरी तरफ, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी संगठन और अपने समर्थक आधार को सक्रिय करने के लिए लगातार दौरे और बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं।

बताया जा रहा है कि वे स्थानीय समस्याओं, धरना-प्रदर्शनों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। इससे विपक्ष की राजनीति में भी जमीनी संपर्क को प्राथमिकता मिलने के संकेत हैं।

RJD के लिए यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी का पारंपरिक जनाधार लंबे समय से बिहार की चुनावी राजनीति का बड़ा हिस्सा रहा है। अब पार्टी के सामने उस आधार को मजबूत रखने के साथ नए मतदाताओं तक पहुंचने की चुनौती भी है।

BJP ने भी बढ़ाई संगठनात्मक गतिविधियां

बिहार में संगठन मजबूत करने की दौड़ में BJP भी पीछे नहीं है। पार्टी ने संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों के तहत पटना महानगर के विभिन्न मंडलों और शक्ति केंद्रों तक मिट्टी कलश यात्रा आयोजित करने की योजना बनाई है।

पटना महानगर के 57 मंडलों के अंतर्गत 163 शक्ति केंद्रों पर कलश वंदन कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई है।

इस तरह के कार्यक्रमों को पार्टी के सामाजिक और संगठनात्मक संपर्क अभियान के तौर पर भी देखा जा सकता है। BJP लगातार बूथ और शक्ति केंद्र स्तर पर अपने संगठन को सक्रिय रखने की रणनीति पर काम करती रही है।

HAM ने भी संगठन में किया बड़ा बदलाव

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने भी संगठन को मजबूत करने के लिए नई प्रदेश कमेटी और जिला अध्यक्षों की सूची जारी की है।

नई प्रदेश कमेटी में उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव, कोषाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी और प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। पार्टी ने अलग-अलग प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की भी घोषणा की है।

युवा, महिला, SC-ST, अल्पसंख्यक, किसान, चिकित्सा, व्यवसाय और श्रमिक जैसे प्रकोष्ठों के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

पार्टी नेतृत्व का कहना है कि नई कमेटी संगठन को बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूत करने में भूमिका निभाएगी।

जातीय समीकरण से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक नजर

बिहार की राजनीति में चुनावी सफलता केवल बड़े नेताओं की रैलियों पर निर्भर नहीं करती। स्थानीय संगठन, जातीय समीकरण, बूथ प्रबंधन और मतदाताओं से सीधा संपर्क भी बेहद अहम माना जाता है।

यही वजह है कि JDU, RJD और अन्य दल अब कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय करने पर जोर दे रहे हैं। छोटे स्तर की बैठकों और स्थानीय मुद्दों के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश हो रही है।

आगामी चुनावी राजनीति में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सा दल अपने संगठन को सबसे प्रभावी तरीके से बूथ तक पहुंचा पाता है।

चिराग पासवान की रणनीति थोड़ी अलग

NDA में JDU और BJP के अलावा चिराग पासवान की पार्टी भी अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनका ध्यान फिलहाल बिहार के साथ उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी का आधार बढ़ाने पर भी है।

इससे बिहार में NDA के भीतर अलग-अलग दलों की प्राथमिकताओं में अंतर भी दिखाई देता है।

बिहार में क्यों बढ़ रही संगठन की अहमियत?

बिहार की राजनीति में बूथ स्तर की सक्रियता हमेशा महत्वपूर्ण रही है, लेकिन नए राजनीतिक विकल्पों और बदलते मतदाता व्यवहार ने इसकी अहमियत और बढ़ा दी है।

सोशल मीडिया के दौर में केवल ऑनलाइन प्रचार से चुनावी मुकाबला जीतना आसान नहीं है। राजनीतिक दलों को स्थानीय कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखना पड़ता है।

नीतीश कुमार का JDU कार्यालय में बार-बार पहुंचना, तेजस्वी यादव की जमीनी सक्रियता, BJP के संगठनात्मक कार्यक्रम और HAM का पुनर्गठन इसी व्यापक राजनीतिक तैयारी की ओर संकेत करते हैं।

आने वाले समय में बिहार की राजनीति में मुकाबला केवल बड़े चेहरों के बीच नहीं, बल्कि बूथ से लेकर सोशल मीडिया तक संगठन और जनसंपर्क की क्षमता के बीच भी दिखाई दे सकता है।


#NitishKumar #JDU #BiharPolitics #PrashantKishor #BiharNews

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1