NCDC Amendment Bill 2026 पास, सहकारिता क्षेत्र को मिलेगा बड़ा विस्तार

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संसद ने National Co-operative Development Corporation (NCDC) Amendment Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा ने बुधवार को विधेयक को पारित किया, जबकि लोकसभा से इसे पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी। अब यह कानून बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के कामकाज और वित्तीय सहायता के दायरे का विस्तार करना है।

सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में विधेयक को चर्चा के बाद पारित कराने के लिए पेश किया। सरकार का कहना है कि संशोधन से देश के सहकारी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और किसानों सहित सहकारी संस्थाओं से जुड़े करोड़ों लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी।

NCDC के कामकाज का बढ़ेगा दायरा

NCDC Amendment Bill 2026 के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को औद्योगिक वस्तुओं से जुड़ी गतिविधियों में भी काम करने की अनुमति देने का प्रावधान है। इससे निगम के कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा और सहकारिता क्षेत्र को नए आर्थिक अवसरों से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

विधेयक में राज्य सरकारों को भी अधिक व्यापक भूमिका दी गई है। अब राज्य सरकारें सहकारी विकास से जुड़े किसी संस्थान या इकाई को निगम के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकेंगी।

इसके अलावा NCDC सीधे किसी सहकारी समिति या सहकारी विकास से जुड़ी संस्था को ऋण और अनुदान देने में सक्षम होगा। इससे जरूरतमंद संस्थाओं तक वित्तीय सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।

सरकार ने NCDC की वित्तीय सहायता का बताया आंकड़ा

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि संशोधन से देश के करोड़ों किसानों के कल्याण और आर्थिक सशक्तीकरण को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने बताया कि NCDC की स्थापना देश में सहकारी क्षेत्र के संगठित और सतत विकास के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। मंत्री के अनुसार, 1963 में NCDC की स्थापना से लेकर 2014 तक पिछली सरकारों के दौरान निगम के माध्यम से करीब 45 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई।

मोहोल ने दावा किया कि 2014 के बाद पिछले 12 वर्षों में यह सहायता बढ़कर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। सरकार इस बढ़ोतरी को सहकारी क्षेत्र में वित्तीय गतिविधियों के विस्तार के तौर पर देख रही है।

देश में 8 लाख से ज्यादा सहकारी समितियां

मंत्री ने संसद में भारत के सहकारी क्षेत्र के व्यापक नेटवर्क का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, देश में 8 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं और करीब 30 करोड़ लोग इनसे जुड़े हुए हैं।

सरकार सहकारी संस्थाओं को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक और डिजिटल व्यवस्था पर भी जोर दे रही है। इसके तहत करीब 80 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है।

इन PACS को लगभग 25 अलग-अलग प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां करने में सक्षम बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इन्हें केवल कृषि ऋण वितरण तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बहुउद्देश्यीय केंद्रों के रूप में विकसित करना है।

सहकारिता क्षेत्र में युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना का भी उल्लेख किया गया।

मंत्री के अनुसार, इस संस्थान के माध्यम से अगले पांच वर्षों में करीब 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। प्रशिक्षित युवा आगे चलकर देश के सहकारी क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा सकेंगे।

सरकार के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में सहकारिता क्षेत्र में 163 से अधिक प्रमुख पहल शुरू की गई हैं। NCDC संशोधन को भी इसी व्यापक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

कुल मिलाकर, NCDC Amendment Bill 2026 के जरिए सहकारी संस्थाओं के लिए वित्तीय सहायता, औद्योगिक गतिविधियों और संस्थागत सहयोग का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया गया है। अब इसके लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रावधानों का लाभ सहकारी समितियों और किसानों तक किस तरह पहुंचता है।

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