आरक्षण नहीं तो बीजेपी को वोट नहीं! मुकेश सहनी का बड़ा ऐलान
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👉 WhatsApp से जुड़ेंउत्तर प्रदेश की राजनीति में मुकेश सहनी के एक ऐलान ने नई सियासी चर्चा छेड़ दी है। मुकेश सहनी ने मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में निषाद-कश्यप समाज के बीच आरक्षण के मुद्दे को लेकर बड़ा संकल्प अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा कि अगर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद-कश्यप समाज को अनुसूचित जाति का आरक्षण और संबंधित संवैधानिक अधिकार नहीं मिले, तो समाज बीजेपी को वोट नहीं देगा। कार्यक्रम में लोगों ने हाथ में गंगाजल लेकर अपने बच्चों के भविष्य और अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।
बुढ़ाना में गंगाजल लेकर लिया गया संकल्प
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने 20 अगस्त को बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में संकल्प यात्रा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश के गांव-गांव तक ले जाने की योजना है।
सहनी ने निषाद, कश्यप, बिंद और मल्लाह समाज को एकजुट होने की अपील की। उनका कहना है कि इन समुदायों की बड़ी आबादी है और यदि समाज अपने राजनीतिक अधिकारों को लेकर संगठित होता है तो वह चुनावी नतीजों पर प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने कार्यक्रम में साफ शब्दों में कहा कि उनका राजनीतिक संदेश ‘आरक्षण नहीं तो वोट नहीं’ है। उनके मुताबिक समाज को किसी नेता के व्यक्तिगत हित, टिकट या अन्य राजनीतिक लाभ के लिए अपने बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं करना चाहिए।
2027 से पहले आरक्षण की मांग पूरी करने का दबाव
मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार से निषाद-कश्यप समाज की आरक्षण संबंधी मांग पर ठोस पहल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि 2027 से पहले मांग पूरी नहीं होती है तो चुनाव में समाज अपने वोट के जरिए जवाब देगा।
सहनी ने सवाल उठाया कि जब देश का संविधान एक है, तो अलग-अलग राज्यों में समान सामाजिक समूहों की आरक्षण व्यवस्था अलग क्यों है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय बताते हुए समुदाय को संगठित होकर अपनी मांग उठाने की बात कही।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संकल्प यात्रा का तत्काल उद्देश्य चंदा जुटाना या सीधे वोट मांगना नहीं है। उनके अनुसार अगले 100 दिनों तक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और अधिकारों के लिए संकल्प दिलाएंगे।
डॉ. संजय निषाद को दिया छह महीने का समय
मुकेश सहनी ने निषाद आरक्षण के मुद्दे पर डॉ. संजय निषाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि छह महीने के भीतर आरक्षण की दिशा में ठोस पहल होती है तो वह उसका समर्थन करेंगे।
सहनी ने कहा कि यदि निर्धारित समय में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तो डॉ. संजय निषाद को सत्ता से बाहर आकर समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नवंबर, दीपावली और छठ के बाद VIP अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा फैसला कर सकती है। हालांकि, इस फैसले की दिशा क्या होगी, इसे लेकर उन्होंने अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं की।
उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के साथ रणनीति के संकेत
मुकेश सहनी ने बिहार की राजनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी बिहार में इंडिया गठबंधन के साथ है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को चुनौती देने के लिए आने वाले समय में विपक्षी दलों के साथ रणनीतिक सहयोग पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने जातीय जनगणना और आबादी के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी की मांग का भी समर्थन किया। सहनी के मुताबिक सामाजिक न्याय का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब विभिन्न समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में भागीदारी मिले।
यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में आरक्षण और सामाजिक समीकरणों से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं।
शिक्षा और वोट की ताकत पर भी जोर
मुकेश सहनी ने समुदाय के लोगों से अपील की कि चुनाव के समय किसी तरह के लालच में अपने बच्चों के भविष्य से समझौता न करें। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेना जनता का अधिकार है, लेकिन वोट का इस्तेमाल अपने अधिकार और आने वाली पीढ़ी के हित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा को भी सामाजिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताया। सहनी ने लोगों से बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्राथमिकता देने की अपील की।
कार्यक्रम में VIP के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सहनी, कार्यक्रम प्रभारी प्रदीप कश्यप, डॉ. सोनू कश्यप समेत पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बड़ी संख्या में निषाद-कश्यप समाज के लोगों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
बुढ़ाना से शुरू हुआ यह संकल्प अभियान अब आने वाले दिनों में कितनी दूर तक पहुंचता है और 2027 के चुनाव में इसका कितना राजनीतिक असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल मुकेश सहनी ने आरक्षण के मुद्दे को चुनावी राजनीति के केंद्र में लाने की स्पष्ट रणनीति के संकेत दे दिए हैं।
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