मधुबनी के 10 हजार वाहन मालिकों को बड़ा झटका, अब फिटनेस के लिए जाना होगा दरभंगा

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मधुबनी कमर्शियल वाहन फिटनेस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। मधुबनी कमर्शियल वाहन फिटनेस के लिए अब वाहन मालिकों को जिला परिवहन कार्यालय की जगह दरभंगा जाना होगा। जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने की व्यवस्था बदल दी गई है।

इस बदलाव के बाद जिले के करीब 10 हजार व्यावसायिक वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। कई वाहन मालिक पिछले कई दिनों से जिला परिवहन कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब दरभंगा के सोनकी स्थित एटीएस सेंटर जाने की जानकारी दी जा रही है।

मधुबनी में बंद हुआ फिटनेस चालान, दरभंगा जाना होगा

मिली जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले तक मधुबनी जिला परिवहन कार्यालय से वाहनों के फिटनेस के लिए ऑनलाइन चालान कट रहा था। अब यह सुविधा बंद कर दी गई है।

विभाग ने वाहनों की जांच के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की व्यवस्था लागू कर दी है। मधुबनी जिले में एटीएस सेंटर नहीं होने के कारण वाहन मालिकों को नजदीकी दरभंगा जिले के सोनकी स्थित एटीएस में जाकर फिटनेस प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इस नई व्यवस्था से खासकर छोटे वाहन मालिकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है। कई लोगों का कहना है कि वाहन लेकर दरभंगा जाना समय और पैसे दोनों की बर्बादी साबित हो रहा है।

10 हजार से ज्यादा वाहनों पर पड़ेगा असर

पिछले 15 वर्षों में मधुबनी जिला परिवहन कार्यालय से करीब 10 हजार कमर्शियल वाहनों का निबंधन हुआ है। नियमों के अनुसार इन वाहनों को प्रत्येक दो साल में फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है।

फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं रहने पर वाहन मालिकों को भविष्य में जुर्माना भरना पड़ सकता है। ऐसे में समय पर फिटनेस कराना जरूरी है।

जिले में करीब 700 से 800 कमर्शियल ट्रैक्टर भी संचालित हो रहे हैं। कई ट्रैक्टर मालिकों के फिटनेस प्रमाण पत्र समाप्त होने वाले हैं। अब उन्हें खेती के काम छोड़कर ट्रैक्टर लेकर दरभंगा जाना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर को लंबी दूरी तक ले जाने में ईंधन का खर्च बढ़ रहा है। कई बार जांच में छोटी कमी मिलने पर दोबारा भी यात्रा करनी पड़ सकती है।

स्कूल बस संचालकों की बढ़ी चिंता

मधुबनी में निजी स्कूल संचालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। जिले में करीब 200 से अधिक निजी स्कूल हैं, जिनके पास बड़ी संख्या में स्कूल बसें और छोटे वाहन हैं।

कई बड़े स्कूलों के पास 10 से 20 बसें तक हैं। वहीं छोटे स्कूलों के पास भी दो से चार वाहन मौजूद हैं। जिले में करीब 400 स्कूल बस और अन्य वाहन संचालित हो रहे हैं।

हर दो साल में इन वाहनों का फिटनेस कराना जरूरी होता है। अलग-अलग समय पर खरीदे गए वाहनों के कारण सालभर किसी न किसी वाहन को फिटनेस के लिए दरभंगा एटीएस भेजना पड़ेगा।

जयनगर, फुलपरास, झंझारपुर, लौकहा, लौकही, बाबूबरही, मधवापुर, बेनीपट्टी और हरलाखी जैसे क्षेत्रों से वाहन लेकर दरभंगा जाना वाहन संचालकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

वाहन मालिकों ने बताई अपनी परेशानी

जिला परिवहन कार्यालय पहुंचे कई ट्रैक्टर मालिकों ने अपनी परेशानी जाहिर की। वाहन मालिकों का कहना है कि फिटनेस कराने में जितना खर्च नहीं होगा, उससे ज्यादा खर्च वाहन को दरभंगा ले जाने और वापस लाने में हो जाएगा।

उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों को सुविधा देना होता है, लेकिन एटीएस की सुविधा जिले में नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

वाहन मालिकों ने मांग की है कि जब तक मधुबनी में एटीएस सेंटर शुरू नहीं होता, तब तक जिला परिवहन कार्यालय से ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था की जाए।

विभाग ने नई व्यवस्था की दी जानकारी

मधुबनी जिला परिवहन कार्यालय के अनुसार, कमर्शियल वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र अब कार्यालय से जारी नहीं किया जा रहा है।

जिला परिवहन कार्यालय के अधिकारी राम बाबू ने बताया कि वाहन मालिकों को अब ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में जाकर फिटनेस कराना होगा। फिलहाल मधुबनी के नजदीक दरभंगा के सोनकी में एटीएस सेंटर उपलब्ध है, जहां जाकर वाहन मालिक अपने वाहनों की जांच करा सकते हैं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन मालिकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही मधुबनी जिले में भी एटीएस सेंटर की सुविधा उपलब्ध कराएगी, ताकि लोगों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़े।

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