लखीसराय में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी तेज, 3753 वाद चिन्हित

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लखीसराय: राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर लखीसराय में तैयारियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत 12 सितंबर 2026 को होने वाली सुनवाई के लिए अब तक 3753 वाद चिन्हित किए जा चुके हैं। मामलों के त्वरित और आपसी सहमति से निस्तारण को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने न्यायिक पदाधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं। बैठक में अधिक से अधिक मामलों में प्री-सीटिंग कराने और संबंधित पक्षकारों को समय पर सूचना देने पर विशेष जोर दिया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के प्रकोष्ठ में बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार लखीसराय सैयद मोहम्मद शब्बीर आलम ने की।

12 सितंबर को आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत

लखीसराय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 12 सितंबर 2026 को किया जाना है। इसके लिए न्यायालय स्तर पर मामलों को चिन्हित करने और पक्षकारों को प्रक्रिया से जोड़ने का काम चल रहा है।

समीक्षा बैठक में अब तक की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली गई। अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत में निस्तारण के लिए कुल 3753 वाद चिन्हित किए जा चुके हैं।

इन मामलों के अधिकतम निस्तारण के लिए संबंधित पक्षकारों से पहले ही बातचीत और सहमति बनाने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

3753 वाद किए गए चिन्हित

राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए चिन्हित किए गए 3753 मामलों का निस्तारण आपसी सहमति के आधार पर कराने की कोशिश की जाएगी।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक मामलों में प्री-सीटिंग की कार्रवाई सुनिश्चित करें।

प्री-सीटिंग का उद्देश्य पक्षकारों को अदालत की निर्धारित तारीख से पहले बातचीत का अवसर देना और संभावित समझौते की दिशा में रास्ता तैयार करना है।

ऐसी प्रक्रिया से दोनों पक्षों की सहमति बनने पर मामले का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से किया जा सकता है।

पक्षकारों को समय पर मिलेगी सूचना

बैठक में पक्षकारों तक समय पर सूचना पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिन मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा जाना है, उनके संबंधित पक्षकारों को समय रहते जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक पक्षकार लोक अदालत की कार्यवाही में शामिल हो सकें।

बैठक में यह भी कहा गया कि जहां नोटिस जारी करना जरूरी है, वहां संबंधित मांग प्राप्त होते ही तत्काल नोटिस की प्रक्रिया पूरी की जाए।

नोटिस को लेकर सचिव को मिला निर्देश

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विधानंद सागर को विशेष निर्देश दिए गए। उन्हें कहा गया कि जिन मामलों में पक्षकारों को नोटिस देना आवश्यक है, वहां संबंधित मांग प्राप्त होने के बाद बिना अनावश्यक देरी के नोटिस जारी कराया जाए।

समय पर नोटिस मिलने से पक्षकारों को अपने मामले की जानकारी जुटाने और सुनवाई के लिए तैयार होने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

प्रशासनिक स्तर पर इस प्रक्रिया को तेज करने का उद्देश्य लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करना है।

आपसी सहमति से मामलों के निपटारे पर जोर

राष्ट्रीय लोक अदालत की खासियत यह है कि इसमें मामलों को आपसी सहमति और समझौते के आधार पर निपटाने का प्रयास किया जाता है।

इसी को देखते हुए बैठक में न्यायिक पदाधिकारियों को संबंधित पक्षकारों को बुलाकर समझौते की संभावनाओं पर बातचीत कराने का निर्देश दिया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार का लक्ष्य अधिक से अधिक मामलों को लोक अदालत के माध्यम से समाप्त करना है, ताकि लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सके।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

समीक्षा बैठक में जिला न्यायपालिका के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रजनी कुमारी, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय सीमा भारतीय और जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय शुभ नंदन झा शामिल रहे।

इसके अलावा जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम (पॉक्सो) श्वेता वर्मा, अन्य जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तथा सब जज प्रथम रंजीत कुमार सोनू भी बैठक में उपस्थित रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विधानंद सागर ने भी बैठक में हिस्सा लिया और लोक अदालत से संबंधित तैयारियों की समीक्षा में शामिल रहे।

राष्ट्रीय लोक अदालत से क्या होगा फायदा?

राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य मामलों का समझौते के आधार पर शीघ्र निपटारा करना है। इससे पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिल सकती है।

आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण होने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद समाप्त करने का अवसर मिलता है। साथ ही न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।

लखीसराय में 3753 वादों का चिन्हित होना इस बात का संकेत है कि आगामी लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों को निपटाने का प्रयास किया जाएगा।

अब आगे क्या होगा?

12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले संबंधित मामलों में प्री-सीटिंग और नोटिस की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। पक्षकारों से संपर्क कर आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की कोशिश होगी।

अब प्रशासन और न्यायिक पदाधिकारियों का फोकस चिन्हित मामलों में अधिकतम निष्पादन पर रहेगा। इसके लिए समय पर सूचना, प्री-सीटिंग और पक्षकारों की भागीदारी को अहम माना जा रहा है।

यदि अधिक संख्या में पक्षकार सहमति से मामलों का समाधान करते हैं, तो आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत लखीसराय में लंबित मामलों के निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


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