लखीसराय में बड़ा अभियान, नवजातों के लिए स्तनपान पर दिलाई गई शपथ
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👉 WhatsApp से जुड़ेंलखीसराय में स्तनपान जागरूकता अभियान के तहत नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्तनपान जागरूकता अभियान के दौरान जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में माताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज के लोगों को स्तनपान के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में शिशु के जन्म के तुरंत बाद माँ का दूध शुरू कराने और शुरुआती छह महीने तक केवल स्तनपान कराने पर जोर दिया गया।
विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्तनपान के फायदे बताए। अधिकारियों ने कहा कि माँ का दूध नवजात के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक पोषण है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम
विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत लखीसराय जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन कार्यक्रमों में चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (CHO), एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भाग लिया।
इसके अलावा बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। स्वास्थ्य विभाग ने इस दौरान स्तनपान से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश लोगों तक पहुंचाए।
कार्यक्रम में मौजूद सभी प्रतिभागियों को स्तनपान को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई गई। इसमें नवजात शिशु के जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कराने का संकल्प लिया गया।
साथ ही यह भी बताया गया कि बच्चे के जन्म के बाद छह महीने तक सिर्फ माँ का दूध ही देना चाहिए।
छह महीने तक केवल माँ का दूध क्यों जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि माँ का दूध नवजात शिशु के लिए पूर्ण आहार होता है।
इसमें बच्चे के विकास के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। नियमित स्तनपान से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और संक्रमण का खतरा कम होता है।
कार्यक्रम के दौरान माताओं को बताया गया कि छह महीने के बाद बच्चे को पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना चाहिए।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि बच्चे को दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराया जा सकता है। इससे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने महिलाओं को जन्म के तुरंत बाद निकलने वाले पहले गाढ़े पीले दूध यानी कोलोस्ट्रम के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कोलोस्ट्रम बच्चे के लिए बेहद लाभकारी होता है और इसे किसी भी स्थिति में नहीं फेंकना चाहिए।
परिवार के सहयोग से सफल होगा स्तनपान अभियान
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिवार के सदस्यों से भी सहयोग की अपील की।
अधिकारियों ने कहा कि स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार और समाज की भी इसमें अहम भूमिका होती है।
धात्री माताओं को पर्याप्त आराम, संतुलित भोजन और सकारात्मक वातावरण मिलने से शिशु का बेहतर पोषण सुनिश्चित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, समूह चर्चा और व्यक्तिगत परामर्श जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
महिलाओं को स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और सही जानकारी अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सही जानकारी और जागरूकता से कुपोषण की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कुपोषण रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पहल
लखीसराय जिले में आयोजित यह अभियान बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और कुपोषण मुक्त समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार माताओं और परिवारों को शिशु देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारियां उपलब्ध करा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि हर नवजात को जीवन की बेहतर शुरुआत दिलाने के लिए स्तनपान को बढ़ावा देना जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों में स्तनपान को लेकर जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित स्तनपान की आदतों को अपनाएं और स्वस्थ समाज के निर्माण में सहयोग करें।
स्तनपान से जुड़े मुख्य संदेश
- जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे को स्तनपान कराएं।
- छह महीने तक केवल माँ का दूध दें।
- छह महीने बाद पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखें।
- कोलोस्ट्रम को बच्चे के लिए बेहद जरूरी समझें।
- परिवार धात्री माताओं को सहयोग और पोषण उपलब्ध कराए।
विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान लखीसराय में चलाया गया यह अभियान माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
