लखीसराय अशोक धाम में सावन की तीसरी सोमवारी पर भगदड़, 7 महिलाओं की मौत

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बिहार के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। अशोक धाम मंदिर में जलाभिषेक के लिए जुटी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल बताए जा रहे हैं। लखीसराय डीएम शैलेंद्र कुमार ने घटना और मृतकों की संख्या की पुष्टि की है। घायलों में पांच की हालत गंभीर बताई गई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया है।

बताया जा रहा है कि मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी थी। इसी दौरान बैरिकेडिंग के पास बिजली का पोल गिर गया। इसके बाद वहां करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। अफवाह के बाद भीड़ में अचानक भगदड़ मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

बिजली का पोल गिरने के बाद फैली अफवाह

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, श्रद्धालुओं की कतार के पास खेत में बिजली का पोल लगा था। भीड़ के दबाव में बांस का एक बल्ला टूटकर बिजली के पोल से जा टकराया, जिसके बाद पोल गिर गया।

पोल गिरने के बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि बिजली का करंट फैल गया है। इसके बाद कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई। लोग सुरक्षित जगह जाने के लिए तेजी से भागने लगे।

भगदड़ के दौरान कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। भीड़ के दबाव में कई श्रद्धालु कुचलकर घायल हो गए। हादसे में अब तक सात महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है।

हादसे में सात महिलाओं की मौत

प्रशासन के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाली सभी सात महिलाएं हैं। छह मृतकों की पहचान हो चुकी है, जबकि एक महिला की पहचान अभी नहीं हो सकी है।

पहचाने गए मृतकों में मनमाला देवी, रिंकू देवी, हेमलता देवी, ललिता देवी, सोनी देवी और संगीता देवी शामिल हैं। मृतक महिलाएं लखीसराय और मुंगेर जिले के अलग-अलग इलाकों की रहने वाली थीं।

हादसे के बाद मंदिर परिसर और अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा। परिजनों के रोने और चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है।

घायलों में खुशबु कुमारी, शबनम कुमारी और स्वीटी कुमारी के नाम सामने आए हैं। कुछ घायलों का इलाज मंदिर परिसर में बनाए गए स्वास्थ्य शिविर में किया जा रहा है, जबकि अन्य को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


एक साथ पहुंचीं दो ट्रेनें, बढ़ गया भीड़ का दबाव

बताया जा रहा है कि सावन की तीसरी सोमवारी को अशोक धाम में जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान आसपास के क्षेत्रों से आने वाली दो ट्रेनें भी लगभग एक साथ पहुंचीं।

एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर की ओर जाने वाली कतार में अचानक भीड़ बढ़ गई। श्रद्धालुओं को मंदिर से लेकर अशोक धाम रेलवे हॉल्ट तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में बैरिकेडिंग के जरिए कतार में लगाया गया था।

प्रशासन का कहना है कि तीसरी सोमवारी को संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार भीड़ का दबाव अपेक्षा से काफी अधिक बढ़ गया।

2019 में भी हुई थी भगदड़ की घटना

अशोक धाम मंदिर में भगदड़ की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 12 अगस्त 2019 को भी यहां भगदड़ की घटना सामने आई थी। इसके बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए लोहे के पाइप से बैरिकेडिंग की गई थी।

हालांकि, मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने के लिए बांस-बल्ले की बैरिकेडिंग का इस्तेमाल किया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि भीड़ के दबाव में यह व्यवस्था कमजोर पड़ गई।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सावन की सोमवारी पर अशोक धाम में भारी भीड़ जुटने की जानकारी पहले से रहती है। ऐसे में भीड़ प्रबंधन और बैरिकेडिंग की व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए था।

प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा, स्थिति नियंत्रण में

घटना के बाद लखीसराय डीएम शैलेंद्र कुमार अस्पताल में मौजूद रहे, जबकि एसपी प्रेरणा कुमार मंदिर परिसर में कैंप कर रही हैं। प्रशासन और पुलिस की टीमें राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं।

डीएम के अनुसार, फिलहाल मंदिर परिसर में स्थिति सामान्य है और श्रद्धालु कतारबद्ध तरीके से जलाभिषेक कर रहे हैं। घटना के बाद सुरक्षा बलों की संख्या भी बढ़ाई गई है।

प्रशासन ने घटना की जांच कराने की बात कही है। फिलहाल प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने, भीड़ को नियंत्रित करने और मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने की है।

व्यवस्था पर उठे सवाल

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि तीसरी सोमवारी पर संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी।

हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसका स्पष्ट निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पुलिस और प्रशासन राहत कार्य के साथ घटनास्थल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


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