खगड़िया में सरकारी पोखर पर कब्जे का मामला गरम, CO ने दिए जांच के आदेश
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👉 WhatsApp से जुड़ेंक्या है पूरा मामला?
यह मामला खगड़िया नगर परिषद के वार्ड संख्या-38 में स्थित सरकारी गैर-मजरूआ आम भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि यहां स्थित धोबिया खड्डा पोखर और उससे जुड़े सार्वजनिक मार्ग पर कथित रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस कारण सार्वजनिक सड़क बाधित हो गई है और लोगों के आवागमन में परेशानी हो रही है। मामला कई प्रशासनिक स्तरों तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक अंतिम समाधान नहीं निकल सका है।
CO ने तीन सरकारी अमीनों को दिए जांच के निर्देश
अंचल अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार, सहयोग पोर्टल पर प्राप्त आवेदन के आधार पर तीन सरकारी अमीनों को मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है।
अमीनों को संबंधित भूमि का सीमांकन, वास्तविक स्थिति का निरीक्षण तथा नक्शा तैयार कर विस्तृत प्रतिवेदन कार्यालय में जमा करने को कहा गया है।
प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छह माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
स्थानीय निवासी दीपक कुमार का आरोप है कि इस मामले की शिकायत कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि जनता दरबार, अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी और अन्य संबंधित कार्यालयों में आवेदन देने के बावजूद अब तक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया।
उनका कहना है कि अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद भी जमीन और सड़क की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल तक पहुंचा मामला
स्थानीय निवासी ने अब मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर भी आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की है।
आवेदन में सरकारी भूमि की विधिवत मापी कराने, कथित अतिक्रमण हटाने, सार्वजनिक सड़क को बहाल करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी संपत्ति को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
क्या हैं स्थानीय लोगों के आरोप?
शिकायतकर्ता के अनुसार, धोबिया खड्डा पोखर की लगभग पांच से छह बीघा सरकारी भूमि पर कथित रूप से बांस और अन्य पेड़ लगाकर कब्जा कर लिया गया है।
इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय ब्रह्मदेव चौधरी के घर तक जाने वाला सार्वजनिक मार्ग भी बाधित होने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन का क्या कहना है?
अंचल अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तीन सरकारी अमीनों को जांच का दायित्व सौंपा गया है।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा और यदि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
सरकारी गैर-मजरूआ आम भूमि, पोखर और सार्वजनिक सड़कें सार्वजनिक उपयोग के लिए होती हैं। यदि इन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलती है तो प्रशासन के लिए समयबद्ध जांच और आवश्यक कार्रवाई करना जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी भूमि का संरक्षण जल संरक्षण, पर्यावरण और आम लोगों के आवागमन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
