JPSC छात्र आंदोलन में बड़ा मोड़, 24 जिलों में पुतला दहन का ऐलान

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झारखंड में JPSC छात्र आंदोलन अब नए और आक्रामक दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। JPSC छात्र आंदोलन के 23वें दिन आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। JPSC, JSSC और CGL परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे इस प्रदर्शन के तहत छात्र नेताओं ने रविवार, 16 अगस्त को राज्य के सभी 24 जिला मुख्यालयों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी का पुतला दहन करने की घोषणा की है।

छात्र नेताओं का कहना है कि लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार के सामने रखी जा रही हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से अब आंदोलन का स्वरूप बदलने का फैसला लिया गया है।

24 जिला मुख्यालयों पर पुतला दहन की तैयारी

आंदोलनकारी छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 16 अगस्त को राज्य के सभी 24 जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन किया जाएगा।

छात्र नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी को भी निशाने पर इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि राज्य में कांग्रेस के समर्थन वाली सरकार है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राहुल गांधी ने छात्र मुद्दे पर अपना स्पष्ट समर्थन सामने नहीं रखा है।

छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार लगातार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। ऐसे में उनका प्रदर्शन अब ज्यादा व्यापक और दबाव बनाने वाला हो सकता है।

रविंद्र पासवान ने कहा कि सरकार को पहले गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की गई। अब आंदोलन को तेज करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने झारखंड आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र भी अब अपनी मांगों के लिए निर्णायक संघर्ष की दिशा में बढ़ेंगे।

18 अगस्त तक सरकार को अंतिम चेतावनी

JPSC छात्र आंदोलन से जुड़े नेताओं ने सरकार को 18 अगस्त तक का समय देने की बात कही है। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने चेतावनी दी कि यदि तय समय तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द छात्रों की मांगों पर विचार करे। ऐसा नहीं होने पर झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से छात्र राजधानी की ओर पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी करेंगे।

इस ऐलान के बाद आंदोलन को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि, आगे की रणनीति को लेकर छात्र संगठनों की ओर से और कार्यक्रमों की घोषणा की जा सकती है।

छात्रों का मुख्य जोर JPSC, JSSC और CGL परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर समाधान और कार्रवाई की मांग पर है। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि इससे हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है।

बीजेपी ने छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा

छात्रों के आंदोलन को लेकर झारखंड बीजेपी ने भी हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि राज्य के छात्र और युवा पिछले कई दिनों से संयम के साथ अपनी मांगों को उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छात्र लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते रहे। बीजेपी विधायक ने इसे युवाओं की लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश बताया।

नवीन जायसवाल ने कहा कि देश में हाल के आंदोलनों के दौरान युवाओं की अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं और झारखंड के छात्रों ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि छात्रों को अब अपना प्रदर्शन कड़ा करने की स्थिति में पहुंचना पड़ा।

बीजेपी ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। वहीं, आंदोलनकारी छात्रों ने साफ किया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदर्शन का दायरा और बढ़ सकता है।

परीक्षा गड़बड़ी का मुद्दा बना आंदोलन की वजह

JPSC, JSSC और CGL परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आक्रोश लंबे समय से सामने आता रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है।

छात्र संगठनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों का स्पष्ट और संतोषजनक समाधान जरूरी है। उनका तर्क है कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

अब आंदोलन के 23वें दिन पुतला दहन और आगे मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी से मामला और गंभीर हो गया है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और छात्रों की अगली रणनीति इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल छात्र नेताओं ने 18 अगस्त को अहम समयसीमा बताया है। यदि उससे पहले कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो झारखंड में छात्र आंदोलन के और तेज होने की संभावना है।


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