JPSC परीक्षा विवाद में बड़ा एक्शन, पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते गिरफ्तार
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👉 WhatsApp से जुड़ेंनई दिल्ली/रांची: JPSC परीक्षा विवाद में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एल. खियांग्ते को राज्य CID ने गिरफ्तार कर लिया। JPSC परीक्षा विवाद की जांच कर रही एजेंसी के अधिकारियों का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं, जो परीक्षा कराने का ठेका देने में कथित रिश्वत के लेनदेन की ओर इशारा करते हैं।
खियांग्ते ने 22 जुलाई को JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उसी दिन CID ने आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केस दर्ज किया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने उनके आवास और कार्यालय पर छापेमारी की और उनसे कई दौर में पूछताछ भी की।
14वीं JPSC परीक्षा के ठेके पर उठे सवाल
जांच का एक प्रमुख केंद्र 14वीं JPSC परीक्षा के आयोजन से जुड़ा ठेका बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि परीक्षा कराने का काम एक निजी कंपनी को नियमों के विपरीत तरीके से दिया गया।
अधिकारियों का दावा है कि संबंधित कंपनी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी TDPL को काम देने की प्रक्रिया में कथित रिश्वत की मांग से जुड़े सबूत मिले हैं। हालांकि, जांच एजेंसी ने खियांग्ते के खिलाफ लगाए गए किसी विशिष्ट आरोप का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है।
एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि खियांग्ते और कंपनी के बीच कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये तथा कुल बिल की राशि का 20 प्रतिशत देने को लेकर समझौते की बात सामने आई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।
टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी जांच
मामले में TDPL को परीक्षा आयोजन का काम दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी ने कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया में आवेदन नहीं किया था। इसके बावजूद उसे 14वीं JPSC परीक्षा के आयोजन का काम दिए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी को काम देने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है।
इससे पहले CID ने धर्मेंद्र कुमार नामक एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया था। वह खियांग्ते के आवास में बने कार्यालय में काम करता था। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार की भूमिका खियांग्ते और कथित मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी के बीच संपर्क की कड़ी के तौर पर सामने आई है।
छात्र संगठनों का आंदोलन भी तेज
JPSC मामले की जांच के बीच रांची में छात्रों का आंदोलन भी जारी है। छात्र JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराना शामिल है। छात्र सरकार से कथित परीक्षा सिंडिकेट की पूरी कड़ी सामने लाने की मांग कर रहे हैं।
सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्र विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। लाठीचार्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
विधानसभा की कार्यवाही भी स्थगित
छात्रों के प्रदर्शन के बीच झारखंड विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। दोपहर में सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वे कथित गड़बड़ियों में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
जांच में आगे क्या होगा?
एल. खियांग्ते अक्टूबर 2024 में झारखंड के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद फरवरी 2025 में उन्हें JPSC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितताओं में सिर्फ परीक्षा आयोजन से जुड़े लोग शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। वित्तीय लेनदेन, ठेका प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के बीच संपर्क की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल मामले में आरोपों की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
