बैंकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव, संसद ने पास किया Bankers’ Books Evidence Bill 2026
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंभारतीय बैंकिंग व्यवस्था को डिजिटल दौर के अनुरूप ढालने की दिशा में संसद ने बड़ा कदम उठाया है। Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को राज्यसभा ने मंजूरी दे दी है। इससे पहले लोकसभा भी इस विधेयक को पारित कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए इसे बैंकिंग कानून में महत्वपूर्ण सुधार बताया।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य बैंक खातों और बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनी साक्ष्यों के नियमों को मौजूदा डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाना है। खास बात यह है कि इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप में मौजूद बैंक रिकॉर्ड को भी अदालत में वैध और स्वीकार्य साक्ष्य माना जा सकेगा।
1891 के पुराने कानून की जगह आधुनिक व्यवस्था
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मौजूदा Bankers’ Books Evidence Act वर्ष 1891 में बनाया गया था। उस समय बैंकिंग व्यवस्था मुख्य रूप से कागजों और भौतिक रिकॉर्ड पर निर्भर थी। आज बैंकिंग का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। मोबाइल फोन पर कुछ क्लिक के जरिए बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन किए जा रहे हैं। ऐसे में कानून को भी तकनीकी बदलावों के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।
मौजूदा कानून में कानूनी कार्यवाही के दौरान बैंक रिकॉर्ड के प्रमाणित भौतिक दस्तावेजों पर काफी निर्भरता रहती है। नए विधेयक के जरिए इस व्यवस्था को आधुनिक बनाने का प्रयास किया गया है।
डिजिटल बैंक रिकॉर्ड भी बनेंगे कानूनी सबूत
नए विधेयक की सबसे अहम विशेषताओं में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देना शामिल है। यानी बैंक की डिजिटल बुक या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी अदालत में साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया जा सकेगा।
विधेयक में बैंकिंग रिकॉर्ड के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करने का प्रावधान है। इसके तहत मैनुअल हस्ताक्षर के साथ डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए रिकॉर्ड को प्रमाणित करने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का मानना है कि यह तकनीक-तटस्थ कानूनी ढांचा बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल रिकॉर्ड के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए जरूरी है। इससे कानूनी प्रक्रिया में डिजिटल बैंकिंग दस्तावेजों के इस्तेमाल को अधिक स्पष्ट आधार मिलेगा।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर भी जोर
विधेयक पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने बैंकिंग डेटा की सुरक्षा और ग्राहकों की निजता का मुद्दा भी उठाया। बीजू जनता दल के मानस रंजन मंगराज ने विधेयक के उद्देश्यों का समर्थन करते हुए कहा कि बैंक रिकॉर्ड में लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी मौजूद होती है।
उन्होंने सरकार से डेटा के दुरुपयोग, अनधिकृत पहुंच और साइबर खतरों से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने के साथ उसकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
चर्चा में बीजेपी के अरुण सिंह ने भी विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 1891 में बनाए गए पुराने कानून को बदलकर नई तकनीकी वास्तविकताओं के अनुरूप व्यवस्था तैयार की जा रही है।
उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि डिजिटल बैंकिंग में तेजी से बदलाव हो रहा है और नया कानून इस परिवर्तन को कानूनी आधार देने में मदद करेगा।
राज्यसभा में अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पर अपने विचार रखे। लोकसभा से पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक को अब संसद की मंजूरी मिल गई है। इससे बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनी मामलों में डिजिटल दस्तावेजों की स्वीकार्यता को औपचारिक आधार मिलने की उम्मीद है।
