Jamui News: 'सवर्ण हूं इसलिए घास उखड़वाते हैं', सिंचाई कर्मी के आरोप से मचा हड़कंप

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जमुई के सिंचाई प्रमंडल कार्यालय में काम करने वाले परिचारी गजेंद्र कुमार चौबे के आरोपों के बाद विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। गजेंद्र कुमार चौबे का दावा है कि कार्यालय में सात परिचारी कार्यरत हैं, लेकिन उनसे ही घास उखड़वाने और साफ-सफाई जैसे काम कराए जाते हैं। उन्होंने इसके पीछे अपने सवर्ण होने के कारण कथित भेदभाव का आरोप लगाया है। गजेंद्र कुमार चौबे से जुड़े आरोपों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वायरल वीडियो में परिचारी कार्यालय परिसर में घास साफ करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और अब यह विवाद साइबर थाना तक पहुंच गया है।

वायरल वीडियो में परिचारी ने क्या आरोप लगाए?

वायरल वीडियो में गजेंद्र चौबे दावा करते नजर आते हैं कि सिंचाई प्रमंडल कार्यालय में कुल सात परिचारी काम करते हैं। उनके मुताबिक, अन्य कर्मचारियों से कार्यालय के नियमित कार्य कराए जाते हैं, जबकि उन्हें घास उखाड़ने और परिसर की सफाई जैसे कामों में लगाया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ कथित तौर पर यह व्यवहार उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण किया जा रहा है। वीडियो में एक अन्य व्यक्ति की आवाज भी सुनाई देती है, जिसमें परिचारी के सामान्य दायित्वों का उल्लेख किया गया है।

वीडियो में यह भी कहा गया है कि कार्यालय में फाइलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना और अधिकारियों के जरूरी काम में सहयोग करना परिचारी के कार्यों में शामिल है। वहीं, घास उखाड़ना या परिसर की सफाई जैसे कामों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, वायरल वीडियो की तारीख, स्थान और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हो सकी है।

वेतन और नौकरी को लेकर धमकी का भी आरोप

गजेंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि अगर वह अधिकारियों द्वारा बताए गए काम को करने से इनकार करते हैं तो उन्हें वेतन रोकने और नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती है।

कर्मी ने अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कहा कि नौकरी जाने के डर से वह अधिकारियों के निर्देश मानने को मजबूर हैं। उनके मुताबिक, इसी दबाव के कारण वह कार्यालय में ऐसे काम भी करते हैं जिन्हें वह अपने निर्धारित दायित्व का हिस्सा नहीं मानते।

बताया गया है कि वायरल वीडियो शनिवार का है। वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया तथा परिचारी ने आगे कानूनी कदम उठाने की बात कही।

वीडियो बनाए जाने को लेकर भी सामने आया विवाद

गजेंद्र चौबे के अनुसार, वह कार्यालय परिसर में साफ-सफाई का काम कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और उनसे बातचीत करने लगे। उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि बातचीत के दौरान उनका वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है।

बाद में वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया। परिचारी के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद कार्यपालक अभियंता की ओर से केस दर्ज कराने की बात कही गई। इसके बाद उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।

इस पूरे घटनाक्रम ने कार्यालय में कर्मचारियों से काम लेने के तरीके और वायरल वीडियो के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

कार्यपालक अभियंता ने आरोपों को बताया साजिश

मामले पर सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने परिचारी के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि विभागीय व्यवस्था के तहत परिचारियों को पटवन की राशि की वसूली जैसे काम भी सौंपे गए हैं।

कार्यपालक अभियंता के अनुसार, प्रमंडल में परिचारी के 32 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल सात कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इनमें से कई परिचारी वसूली के काम से बाहर जाते हैं।

उन्होंने बताया कि गजेंद्र चौबे की तबीयत खराब रहने के कारण वह अधिकतर कार्यालय में ही रहते हैं। उनके मुताबिक, फिलहाल कार्यालय में फाइलों से जुड़ा पर्याप्त काम नहीं है, इसलिए उनसे परिसर की सफाई का काम लिया जाता है।

अधिकारी ने भी लगाए गंभीर आरोप

कार्यपालक अभियंता ने पूरे मामले को एक कथित साजिश से जोड़ते हुए प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी करुणानिधि सौरभ पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब दो महीने से कर्मचारी को बरगलाकर इस तरह का वीडियो तैयार कराया जा रहा था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारी को शराब पिलाकर वीडियो बनवाया गया और बाद में उसे प्रसारित किया गया। हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस मामले को लेकर साइबर थाना में केस दर्ज होने की बात सामने आई है। अब पुलिस की जांच में वायरल वीडियो, उसमें लगाए गए आरोपों और दोनों पक्षों के दावों की वास्तविकता स्पष्ट होने की उम्मीद है।

फिलहाल मामला दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच है। एक ओर कर्मचारी ने कथित भेदभाव और धमकी के आरोप लगाए हैं, वहीं विभागीय अधिकारी ने इन्हें साजिश बताते हुए अपना पक्ष रखा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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