धान/गेहूं अधिप्राप्ति 2026-27: ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

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धान/गेहूं अधिप्राप्ति 2026-27: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी

किसान भाइयों, खेती का असली दर्द वही समझ सकता है जिसने चिलचिलाती धूप और कड़ाके की ठंड में खेतों में पसीना बहाया हो। फसल बोने से लेकर काटने तक जितनी मेहनत लगती है, उससे कहीं ज्यादा टेंशन फसल को सही दाम पर बेचने की होती है। अक्सर हम देखते हैं कि फसल तैयार होते ही गांव के बिचौलिए (Brokers) औने-पौने दाम पर हमारा धान या गेहूं खरीदने आ जाते हैं। मजबूरी में कई किसान अपनी मेहनत की कमाई कम दाम में बेच देते हैं।

लेकिन, अब ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है। बिहार सरकार ने पैक्स (PACS) और व्यापार मंडल के माध्यम से किसानों की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की बहुत अच्छी व्यवस्था की है। इसे ही हम 'धान/गेहूं अधिप्राप्ति' (Paddy/Wheat Procurement) कहते हैं।

समस्या यह है कि कई किसानों को जानकारी ही नहीं होती कि अपनी फसल सरकार को बेचने के लिए Online Registration कैसे करना है। कभी सर्वर डाउन, कभी फॉर्म Reject हो जाना, तो कभी कागजातों की कमी। एक स्थानीय पत्रकार के तौर पर मैं जमीन पर किसानों की इन परेशानियों को रोज देखता हूँ। इसीलिए, आज मैं आपको बिल्कुल आसान भाषा में समझाऊंगा कि धान और गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करना है, कौन से डॉक्यूमेंट लगेंगे और फॉर्म को रिजेक्ट होने से कैसे बचाना है।

धान और गेहूं अधिप्राप्ति योजना क्या है?

सीधी सी बात है—सरकार द्वारा तय किए गए एक फिक्स रेट (MSP) पर किसानों से सीधे उनकी फसल खरीदना ही अधिप्राप्ति कहलाता है। इसके लिए बिहार में सहकारिता विभाग (Cooperative Department) काम करता है। गांव-पंचायत स्तर पर पैक्स (Primary Agricultural Credit Society) और ब्लॉक स्तर पर व्यापार मंडल बनाए गए हैं।

जब आप ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर लेते हैं, तो आपका नाम सरकार की लिस्ट में आ जाता है। इसके बाद आप अपने पंचायत के पैक्स अध्यक्ष से संपर्क करके अपना धान या गेहूं तौलवा सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आता है, बीच में कोई दलाल नहीं होता।

रजिस्ट्रेशन से पहले तैयार रखें ये जरूरी कागजात (Important Documents)

ऑनलाइन कैफे जाने से पहले या अपने मोबाइल से फॉर्म भरने से पहले कुछ कागजात बिल्कुल रेडी रखें। अगर इनमें से एक भी डॉक्यूमेंट कम रहा, तो पोर्टल आपका फॉर्म स्वीकार नहीं करेगा।

  • किसान पंजीकरण संख्या (Kisan Registration Number): यह सबसे जरूरी है। कृषि विभाग (DBT Agriculture) की वेबसाइट पर आपका जो रजिस्ट्रेशन है, उसका नंबर आपके पास होना चाहिए।

  • आधार कार्ड (Aadhaar Card): आधार कार्ड मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए क्योंकि फॉर्म भरते समय OTP आता है।

  • बैंक पासबुक (Bank Passbook): आपका बैंक खाता आधार से लिंक (NPCI Seeded) होना चाहिए। सरकार अब DBT के माध्यम से पैसा भेजती है, इसलिए अगर बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है, तो पैसा फंस जाएगा।

  • जमीन की रसीद (Land Receipt / LPC): अगर आप अपनी जमीन पर खेती करते हैं (रैयत किसान), तो आपके पास जमीन की करेंट रसीद या LPC (Land Possession Certificate) होना चाहिए। हाल ही में हम देखते हैं कि दलसिंहसराय जैसे ब्लॉक के RTPS काउंटरों पर किसान भाई LPC बनवाने के लिए काफी दौड़-भाग करते हैं। इसलिए अपनी जमीन के कागज पहले से अपडेट रखें।

  • घोषणा पत्र (Declaration Form): पोर्टल से एक फॉर्म डाउनलोड करके, उस पर अपने हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगाकर अपलोड करना होता है।

टेबल: धान/गेहूं अधिप्राप्ति एक नज़र में

महत्वपूर्ण बिंदुजानकारी (Information)
योजना का नामधान / गेहूं अधिप्राप्ति (Paddy/Wheat Procurement)
संबंधित विभागसहकारिता विभाग, बिहार सरकार (Cooperative Dept.)
लाभार्थीबिहार के सभी किसान (रैयत और गैर-रैयत)
आधिकारिक वेबसाइटepacs.bih.nic.in / state.bihar.gov.in/cooperative
पैसा कैसे मिलेगा?DBT के माध्यम से सीधे आधार लिंक्ड बैंक खाते में
किसानों के प्रकाररैयत (खुद की जमीन) और गैर-रैयत (बटाईदार)

रैयत (Ryot) और गैर-रैयत (Non-Ryot) किसान में क्या अंतर है?

ऑनलाइन फॉर्म भरते समय सबसे ज्यादा कंफ्यूजन इसी बात पर होता है कि हम किस कैटेगरी में आते हैं। इसे बिल्कुल साफ-साफ समझ लीजिए:

  1. रैयत किसान (Ryot Farmer): अगर आप अपनी खुद की जमीन पर खेती करते हैं, या जमीन आपके पिताजी या दादाजी के नाम पर है और आप उनके वारिस हैं, तो आप 'रैयत' कहलाएंगे। इसमें आपको अपनी जमीन का रसीद (Land Receipt) और एलपीसी (LPC) देना होता है। रैयत किसान ज्यादा मात्रा में धान/गेहूं बेच सकते हैं।

  2. गैर-रैयत किसान (Non-Ryot Farmer): हम सब जानते हैं कि बिहार में बटाई पर खेती करने का बहुत चलन है। अगर आप दूसरे की जमीन किराए पर या बटाई (Sharecropping) पर लेकर खेती करते हैं, तो आप 'गैर-रैयत' किसान कहलाएंगे। इसके लिए आपको जमीन मालिक का नाम, खाता-खेसरा नंबर देना होता है और साथ ही अपने वार्ड सदस्य (Ward Member) या किसान सलाहकार से घोषणा पत्र पर साइन करवाना होता है।

Step-by-Step Guide: धान/गेहूं अधिप्राप्ति के लिए Online Registration कैसे करें?

अब आते हैं सबसे जरूरी काम पर। आप चाहें तो किसी भी साइबर कैफे (CSC Center) पर जाकर यह फॉर्म भरवा सकते हैं, या अगर आपके पास स्मार्टफोन/लैपटॉप है तो खुद भी कर सकते हैं। बस इन स्टेप्स को ध्यान से फॉलो करें:

Step 1: आधिकारिक पोर्टल पर जाएं

सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र (जैसे Google Chrome) में सहकारिता विभाग की वेबसाइट खोलें। आप गूगल में सीधा epacs.bih.nic.in लिख कर सर्च कर सकते हैं।

Step 2: किसान लॉगिन पर क्लिक करें

होमपेज पर आपको "किसान कॉर्नर" (Kisan Corner) या "अधिप्राप्ति के लिए आवेदन करें" का लिंक दिखेगा। उस लिंक पर क्लिक करें।

Step 3: किसान पंजीकरण संख्या (Registration Number) दर्ज करें

एक नया पेज खुलेगा जहाँ आपसे आपका 13 अंकों का किसान पंजीकरण नंबर माँगा जाएगा। अपना नंबर डालकर 'Search' (खोजें) बटन पर क्लिक करें।

Step 4: अपनी जानकारी वेरिफाई करें

जैसे ही आप Search करेंगे, आपका नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर, और बैंक डिटेल स्क्रीन पर आ जाएगी। इसे अच्छे से चेक कर लें कि सब कुछ सही है या नहीं।

Step 5: आधार नंबर और OTP

अब आपको अपना आधार नंबर डालना होगा। इसके बाद आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर 6 अंकों का एक OTP (One Time Password) आएगा। OTP डालकर अपना वेरिफिकेशन पूरा करें।

Step 6: जमीन का विवरण (Land Details) भरें

यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है:

  • अगर आप रैयत हैं, तो अपने अंचल (Circle), हल्का, मौजा, खाता नंबर, खेसरा नंबर और कितनी जमीन में आपने खेती की है (रकबा/Area in Acre/Decimal), वह जानकारी भरें।

  • अगर आप गैर-रैयत हैं, तो जिस मालिक की जमीन पर आपने खेती की है, उसका नाम और जमीन का रकबा डालें।

  • आपको यह भी बताना होगा कि आप कुल कितना क्विंटल धान या गेहूं बेचना चाहते हैं (अनुमानित मात्रा)।

Step 7: पैक्स (PACS) या व्यापार मंडल चुनें

आपको विकल्प मिलेगा कि आप अपनी फसल पंचायत के पैक्स को देना चाहते हैं या ब्लॉक के व्यापार मंडल को। अपने सुविधानुसार चुनाव करें।

Step 8: घोषणा पत्र (Declaration Form) अपलोड करें

पोर्टल से ही एक घोषणा पत्र डाउनलोड करने का ऑप्शन मिलेगा। उसका प्रिंट निकालें।

  • उसमें अपनी जानकारी भरें।

  • अगर गैर-रैयत हैं, तो वार्ड सदस्य से साइन करवाएं।

  • खुद का हस्ताक्षर करें या अंगूठा लगाएं।

  • उसकी साफ फोटो खींचकर (या स्कैन करके) पोर्टल पर अपलोड (Upload) कर दें।

Step 9: फाइनल सबमिट (Final Submit)

सब कुछ भरने के बाद, फॉर्म को एक बार फिर से पढ़ लें। सब सही होने पर 'Final Submit' बटन पर क्लिक कर दें।

ध्यान दें: फॉर्म सबमिट करने के बाद जो रिसीविंग (Receipt) मिलेगी, उसे प्रिंट करके अपने पास सुरक्षित रख लें। जब आप पैक्स अध्यक्ष के पास अनाज लेकर जाएंगे, तो यह पर्ची दिखानी पड़ेगी।

फॉर्म रिजेक्ट (Reject) होने से कैसे बचाएं? (Common Mistakes)

कई बार किसान भाई सब कुछ सही करते हैं, फिर भी उनका नाम लिस्ट में नहीं आता। इसके पीछे कुछ छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो आपका फॉर्म कभी रिजेक्ट नहीं होगा:

  1. आधार और बैंक खाते का नाम अलग होना: अगर आपके आधार कार्ड में नाम "Ram Kumar" है और बैंक पासबुक में "Ram Kumar Sharma" है, तो फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है। नाम बिल्कुल एक जैसा होना चाहिए।

  2. NPCI लिंक न होना: सबसे ज्यादा फॉर्म इसी वजह से रिजेक्ट होते हैं या पैसा फंसता है। आपका बैंक खाता केवल आधार से लिंक होना काफी नहीं है, बल्कि वह DBT (Direct Benefit Transfer) के लिए NPCI से मैप होना चाहिए। अपने बैंक जाकर मैनेजर से साफ-साफ बोलें कि "मेरा खाता NPCI से लिंक कर दीजिए।"

  3. धुंधले डॉक्यूमेंट अपलोड करना: अक्सर कैफे वाले जल्दी-जल्दी में धुंधली (Blur) रसीद या घोषणा पत्र अपलोड कर देते हैं। अधिकारी जब उसे ऑनलाइन चेक करते हैं और उन्हें कुछ पढ़ा नहीं जाता, तो वो सीधा रिजेक्ट कर देते हैं। इसलिए हमेशा साफ स्कैन कॉपी अपलोड करें।

  4. गलत रकबा (Land Area) डालना: जितना आपके जमीन की रसीद या LPC में रकबा लिखा है, उतना ही ऑनलाइन फॉर्म में डालें। अगर रसीद 1 एकड़ की है और आप फॉर्म में 5 एकड़ दिखाएंगे, तो आवेदन रद्द कर दिया जाएगा।

पैसा बैंक खाते में कैसे और कब आता है?

एक बार जब आप अपना धान या गेहूं पैक्स गोदाम में तौलवा देते हैं, तो पैक्स अध्यक्ष आपको एक रसीद देता है, जिसे WWR (Warehouse Receipt) कहते हैं।

जैसे ही आपका अनाज ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज होता है, उसके 48 से 72 घंटों के भीतर (कभी-कभी सरकारी छुट्टियों की वजह से थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है) पैसा सीधे आपके उसी बैंक खाते में आ जाता है जो आपने रजिस्ट्रेशन के वक्त दिया था। आपको किसी दफ्तर या बैंक का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। आपके मोबाइल पर SMS आ जाएगा कि पैसा क्रेडिट हो गया है।

किसानों के मन में उठने वाले आम सवाल (FAQs)

Q1: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने की कोई फीस लगती है क्या?

जवाब: बिल्कुल नहीं। बिहार सरकार के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से मुफ्त है। हालांकि, अगर आप किसी साइबर कैफे से फॉर्म भरवाते हैं, तो वह अपना इंटरनेट और प्रिंटिंग का चार्ज (आम तौर पर 50-100 रुपये) ले सकता है।

Q2: मेरे पास खुद की जमीन नहीं है, क्या मैं अपना अनाज पैक्स में बेच सकता हूँ?

जवाब: जी हाँ! आप 'गैर-रैयत' (बटाईदार) किसान के तौर पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपने वार्ड सदस्य या किसान सलाहकार से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करवा कर देना होगा।

Q3: मेरा बैंक खाता आधार से लिंक है, लेकिन पोर्टल बता रहा है कि NPCI लिंक नहीं है, मैं क्या करूँ?

जवाब: आधार लिंक होना और NPCI (DBT) लिंक होना दोनों अलग-अलग चीजें हैं। आपको तुरंत अपने बैंक की ब्रांच में जाना होगा और एक NPCI मैपिंग का फॉर्म भरकर देना होगा। इसमें 24 से 48 घंटे का समय लगता है।

Q4: अगर मेरा आवेदन रिजेक्ट हो जाए तो क्या मैं दोबारा फॉर्म भर सकता हूँ?

जवाब: हाँ। अगर आपका आवेदन किसी कमी के कारण रद्द (Reject) हो जाता है, तो आप उस गलती को सुधार कर (जैसे नई रसीद लगाकर या नाम ठीक करके) पोर्टल पर जाकर अपने आवेदन को 'Update' कर सकते हैं।

Q5: एक किसान अधिकतम कितना धान या गेहूं बेच सकता है?

जवाब: यह सरकार द्वारा हर साल तय किया जाता है। आम तौर पर रैयत किसान अधिकतम 250 क्विंटल और गैर-रैयत किसान अधिकतम 100 क्विंटल तक अनाज बेच सकते हैं। (लेटेस्ट लिमिट के लिए हमेशा पोर्टल का नया नोटिस चेक करते रहें)।

आखिरी बात

किसान साथियों, खेती में हमने अपना खून-पसीना एक किया है, तो हमारी फसल का सही दाम पाना हमारा हक है। बिचौलियों के चक्कर में पड़कर अपनी मेहनत को सस्ते में मत बेचिए।

आज के समय में सब कुछ ऑनलाइन हो गया है। थोड़ा सा समय निकालिए, अपने कागज दुरुस्त कीजिए और समय रहते धान/गेहूं अधिप्राप्ति पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा लीजिए। अंतिम तारीख (Last Date) का इंतज़ार कभी मत कीजिए, क्योंकि आखिरी दिनों में पोर्टल का सर्वर अक्सर बहुत धीमा (Slow) हो जाता है।

अगर आपको फॉर्म भरने में कोई भी परेशानी आ रही है, तो अपने पंचायत के किसान सलाहकार, वार्ड सदस्य या सीधा पैक्स अध्यक्ष से जाकर मिलें। यह उनका काम है कि वे आपकी मदद करें। जानकारी ही असली ताकत है। सही जानकारी रखिए, अपना रजिस्ट्रेशन खुद चेक कीजिए और अपनी फसल का पूरा मुनाफा अपने बैंक खाते में पाइए।

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