दीपक प्रकाश बने MLC, मंत्री पद का संकट टला; उपेंद्र कुशवाहा ने NDA का जताया आभार

 


दीपक प्रकाश MLC बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में चल रही एक बड़ी चर्चा पर विराम लग गया है। दीपक प्रकाश MLC बनने के बाद अब उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट समाप्त हो गया है। बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री के रूप में कार्यरत दीपक प्रकाश को राज्यपाल ने विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया है। इसके बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत एनडीए के शीर्ष नेताओं का सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया।

दीपक प्रकाश को कैसे मिला विधान परिषद का रास्ता?

बिहार सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया है। यह सीट भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।

देवेश कुमार ने पिछले सप्ताह अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी मिलने पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा गया। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक रहेगा।

उपेंद्र कुशवाहा ने किन नेताओं को कहा धन्यवाद?

दीपक प्रकाश के एमएलसी बनने की जानकारी सबसे पहले उनके पिता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की।

उन्होंने अपने संदेश में एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
  • जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार
  • केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान
  • हम प्रमुख जीतनराम मांझी
  • भाजपा नेतृत्व

कुशवाहा ने इसे सहयोगी दलों के सामूहिक विश्वास और समर्थन का परिणाम बताया।

मंत्री पद पर क्यों उठ रहे थे सवाल?

दीपक प्रकाश मई 2026 में कैबिनेट विस्तार के दौरान दोबारा मंत्री बने थे। इससे पहले भी वे नवंबर 2025 में मंत्रिमंडल में शामिल किए गए थे।

भारतीय संविधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मंत्री बनता है और वह विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है। अन्यथा उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।

इसी संवैधानिक प्रावधान को लेकर पिछले कुछ समय से उनके मंत्री पद पर लगातार सवाल उठ रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी थी चर्चा

हाल के दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई थी। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने भी बिहार सरकार से इस विषय पर सवाल किए थे कि बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्री कितने समय तक पद पर रह सकते हैं।

इसके बाद भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे और दीपक प्रकाश के मनोनयन की प्रक्रिया तेजी से पूरी हुई। अब उनके विधान परिषद सदस्य बनने के साथ यह विवाद समाप्त माना जा रहा है।

जून के चुनाव में नहीं मिला था मौका

जून 2026 में बिहार विधान परिषद की नौ सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव हुए थे। उस समय यह संभावना जताई जा रही थी कि दीपक प्रकाश को एनडीए उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

हालांकि उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं हुआ। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में उनके मंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। अब मनोनयन के जरिए उन्हें विधान परिषद भेजे जाने से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

अब मंत्री पद सुरक्षित, आगे क्या?

दीपक प्रकाश के एमएलसी बनने के बाद उनका मंत्री पद संवैधानिक रूप से सुरक्षित हो गया है। अब वे बिना किसी कानूनी बाधा के अपने विभाग की जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला एनडीए के भीतर समन्वय बनाए रखने के साथ-साथ सरकार की स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आने वाले समय में बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि विधानसभा चुनावों से पहले सहयोगी दलों के बीच तालमेल और राजनीतिक संदेश दोनों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

एक नजर में पूरी खबर 

  • दीपक प्रकाश को राज्यपाल ने विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया।
  • भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे से सीट खाली हुई थी।
  • दीपक प्रकाश का कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक रहेगा।
  • उपेंद्र कुशवाहा ने पीएम मोदी सहित एनडीए नेतृत्व का आभार जताया।
  • एमएलसी बनने के बाद उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट समाप्त हो गया।
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