बांकीपुर जीत के बाद प्रशांत किशोर का बड़ा दावा, BJP पर साधा सीधा निशाना
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लंबे समय से मजबूत माने जाने वाले गढ़ में जीत दर्ज की। परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर ने दावा किया कि इस चुनाव में मतदाताओं ने जाति, धर्म और पारंपरिक राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से ऊपर उठकर मतदान किया। दूसरी ओर, भाजपा ने हार के कारणों की समीक्षा शुरू कर दी है।
करीब तीन दशक तक भाजपा के कब्जे में रही बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए इस उपचुनाव के नतीजे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यह सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रिक्त हुई थी।
बांकीपुर में क्या बोले प्रशांत किशोर?
मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी जीत किसी एक जाति या समुदाय के समर्थन का परिणाम नहीं है। उनके अनुसार, पिछले तीन वर्षों से किए गए जनसंपर्क और संगठनात्मक प्रयासों का असर मतदाताओं के फैसले में दिखाई दिया।
उन्होंने कहा कि उम्मीदवार बनने से पहले पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में भी संकेत मिले थे कि यदि वे चुनाव लड़ेंगे तो पारंपरिक जातीय समीकरण कमजोर पड़ सकते हैं। उनका दावा है कि लोगों ने उन्हें एक वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प के रूप में स्वीकार किया।
"जाति ही नहीं, दलों की दीवार भी टूटी"
प्रशांत किशोर ने कहा कि इस चुनाव में केवल जातीय समीकरण ही नहीं बदले, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े समर्थकों ने भी उनका साथ दिया।
उन्होंने दावा किया कि जदयू, कांग्रेस और राजद से जुड़े कई कार्यकर्ताओं ने भी उनका समर्थन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के एक बड़े वर्ग के लोगों ने भी चुनाव में उनकी मदद की।
हालांकि, इन दावों पर संबंधित दलों की ओर से अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
भाजपा पर क्यों साधा निशाना?
अपनी जीत के बाद प्रशांत किशोर ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा की कार्यशैली और फैसलों से कार्यकर्ता पूरी तरह संतुष्ट होते, तो पार्टी के कुछ समर्थक उनकी ओर नहीं आते। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेतृत्व के कुछ राजनीतिक निर्णयों से मतदाताओं में निराशा पैदा हुई।
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान स्थानीय मुद्दों की तुलना में राष्ट्रीय नेतृत्व के नाम पर अधिक जोर दिया गया, जबकि मतदाता इस बार स्थानीय अपेक्षाओं को प्राथमिकता देना चाहते थे।
"422 मतदान केंद्रों पर मिली बढ़त"
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उन्हें बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी 422 मतदान केंद्रों पर बढ़त हासिल हुई।
उनके अनुसार, यदि यह दावा सही है तो यह संकेत देता है कि समाज के अलग-अलग वर्गों ने उन्हें व्यापक समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि उनकी जीत को किसी एक सामाजिक समूह तक सीमित करके देखना उचित नहीं होगा।
आधिकारिक चुनावी नतीजों के अनुसार, उन्होंने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया।
भाजपा ने हार के बाद शुरू की समीक्षा
उधर, भाजपा ने बांकीपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित बैठक में चुनाव प्रचार, संगठन और बूथ प्रबंधन से जुड़े नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से विस्तृत फीडबैक लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने की। इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक और चुनाव प्रभारी भी शामिल हुए।
किन मुद्दों पर हुआ मंथन?
सूत्रों के अनुसार, समीक्षा बैठक में कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।
- चुनाव प्रचार की रणनीति
- बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता
- मतदाताओं तक पहुंच
- स्थानीय मुद्दों की प्रस्तुति
- भविष्य की चुनावी तैयारी
पार्टी नेताओं ने उन कमियों की पहचान करने पर जोर दिया, जिनके कारण लंबे समय से भाजपा के पास रही सीट हाथ से निकल गई।
बांकीपुर उपचुनाव क्यों है अहम?
बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में इस सीट पर सत्ता पक्ष की हार और जनसुराज की जीत को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी एक उपचुनाव के आधार पर व्यापक राजनीतिक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस परिणाम का राज्य की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।
एक नजर में पूरी खबर
- बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को हराया।
- जीत का अंतर 19 हजार से अधिक मतों का रहा।
- प्रशांत किशोर ने दावा किया कि सभी वर्गों और विभिन्न दलों के समर्थकों ने उन्हें वोट दिया।
- उन्होंने भाजपा की चुनावी रणनीति और कुछ राजनीतिक फैसलों की आलोचना की।
- भाजपा ने हार के बाद संगठनात्मक समीक्षा बैठक कर कारणों पर मंथन शुरू किया।
