CJI सूर्यकांत ने 80 साल की यात्रा पर कहा- अभी बहुत कुछ करना बाकी

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश की उपलब्धियों को महत्वपूर्ण बताया, लेकिन साथ ही कहा कि राष्ट्र की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ दशकों में भारत ने कई कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन आगे हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है।

CJI सूर्यकांत ने यह बात सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कही। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश, अधिवक्ता और न्यायालय के कर्मचारी भी मौजूद रहे।

CJI ने देश की 80 साल की यात्रा को बताया महत्वपूर्ण

अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने कई गंभीर और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इन चुनौतियों के बावजूद देश ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय विकास किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब तक की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन्हें अंतिम पड़ाव नहीं माना जा सकता। देश को आगे बढ़ाने के लिए संस्थाओं, नागरिकों और समाज के विभिन्न वर्गों को लगातार अपनी भूमिका निभानी होगी।

CJI ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के साथ-साथ उसकी कानूनी और न्यायिक संस्थाओं ने भी उल्लेखनीय रूप से विकास किया है। इन संस्थाओं ने समय के साथ मजबूती हासिल की और राष्ट्र के संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने न्यायपालिका और कानूनी व्यवस्था को देश की सामूहिक चेतना को आकार देने वाली महत्वपूर्ण संस्थाओं में शामिल बताया।

गांधी और आंबेडकर समेत महान नेताओं को किया याद

CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन और आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान देने वाले कई महान नेताओं को भी याद किया। उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर को आधुनिक भारत के प्रमुख निर्माताओं में शामिल किया।

इसके अलावा उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल, मोतीलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक और लाला लाजपत राय के योगदान को भी स्मरण किया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इन नेताओं का योगदान यह दिखाता है कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में कानूनी पेशा केवल दर्शक की भूमिका में नहीं था। वकीलों और कानून से जुड़े लोगों ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और देश के निर्माण में योगदान दिया।

उनके मुताबिक, कानूनी समुदाय का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और लोकतांत्रिक विकास से गहराई से जुड़ा रहा है।

न्यायिक संस्थाओं की भूमिका पर दिया जोर

स्वतंत्रता दिवस समारोह में CJI ने न्यायिक और कानूनी संस्थाओं के विकास को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत गणराज्य की यात्रा के साथ देश की न्याय व्यवस्था भी लगातार परिपक्व हुई है।

संविधान, कानून और न्यायिक संस्थाएं लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इन संस्थाओं की जिम्मेदारी केवल कानूनी विवादों के निपटारे तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित इस समारोह में वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ता और न्यायालय से जुड़े कर्मचारी मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में देश की अब तक की यात्रा और भविष्य की जिम्मेदारियों पर विशेष रूप से चर्चा हुई।

CJI का संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने उपलब्धियों को स्वीकार करने के साथ आगे की चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया। उनका संबोधन देश की लोकतांत्रिक और न्यायिक संस्थाओं को भविष्य के लिए और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देता है।


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