भरत तिवारी की तस्वीर देख फूट-फूटकर रोईं मां, स्वतंत्रता दिवस पर छलका दर्द
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आरा समेत पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस का उत्साह देखने को मिला। इसी बीच भरत तिवारी के घर का माहौल अचानक गमगीन हो गया। भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान भरत तिवारी की तस्वीर सामने आते ही उनकी मां आशा देवी भावुक हो गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। मौके पर मौजूद ग्रामीण भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए। भरत तिवारी की 17 जून 2026 को पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने के बाद इलाज के दौरान मौत हुई थी। परिवार लगातार इस मामले में न्याय की मांग कर रहा है।
तिरंगा फहराते समय बेटे की तस्वीर ने बढ़ाया दर्द
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बिलौटी गांव स्थित भरत तिवारी के घर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। परिवार और ग्रामीणों ने देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद किया। इसी दौरान आशा देवी की नजर अपने बेटे की तस्वीर पर पड़ी। तस्वीर देखते ही वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं। वह बेटे को याद कर रोने लगीं। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन माहौल काफी भावुक हो गया। परिजनों के मुताबिक, भरत तिवारी की मौत के बाद से परिवार लगातार मानसिक और भावनात्मक पीड़ा से गुजर रहा है। मां का कहना है कि बेटे की मौत की सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
मां की मांग- दोषी पुलिसकर्मियों पर हो कड़ी कार्रवाई
आशा देवी लगातार अपने बेटे के लिए न्याय की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि केवल आर्थिक सहायता या सरकारी नौकरी का प्रस्ताव उनके परिवार के दर्द को खत्म नहीं कर सकता। परिवार की मुख्य मांग मामले में कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। आशा देवी का कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उन्हें न्याय मिलने का एहसास नहीं होगा। परिवार की यह मांग उस समय भी सामने आई है, जब सरकार ने घटना की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और परिवार को रिपोर्ट से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है।
गंगा कटाव प्रभावित लोगों के लिए काम करने का दावा
ग्रामीणों के अनुसार, भरत तिवारी गंगा नदी के कटाव से प्रभावित जवैनिया गांव के लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रिय थे। बताया जाता है कि वह प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर बसाने तथा उनके लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठा रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि इसी तरह के सामाजिक मुद्दों को लेकर भरत तिवारी लगातार आवाज उठाते थे। उनकी मौत के बाद स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर सवाल और चिंता बनी हुई है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल परिवार की ओर से लगातार कार्रवाई की मांग की जा रही है।
सरकार ने मुआवजे और नौकरी का दिया प्रस्ताव
भरत तिवारी की मौत के बाद राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया। जांच के आधार पर परिवार को आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात सामने आई है। सरकार की ओर से राहत का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद परिवार का जोर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कराने पर है। परिजनों का तर्क है कि आर्थिक सहायता से परिवार की तत्काल जरूरतें पूरी हो सकती हैं, लेकिन बेटे की मौत से जुड़े सवालों का जवाब और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। यही वजह है कि परिवार जांच की प्रक्रिया और उसके नतीजे पर नजर बनाए हुए है। आने वाले समय में जांच रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
करीब दो महीने बाद भी न्याय की उम्मीद
भरत तिवारी की मौत को करीब दो महीने बीतने को हैं। इसके बावजूद परिवार की न्याय की मांग जारी है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर घर में तिरंगा फहराने के दौरान सामने आया भावुक दृश्य इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ले आया। मां आशा देवी के आंसुओं ने परिवार के दर्द को सामने ला दिया। परिवार चाहता है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। वहीं प्रशासन और जांच एजेंसी के सामने भी इस मामले में निष्पक्षता बनाए रखने की चुनौती है। फिलहाल भरत तिवारी की मौत को लेकर अंतिम तस्वीर न्यायिक जांच पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। परिवार को उम्मीद है कि जांच से घटना की पूरी सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदारी तय होगी।