BPSC पास करने के बाद क्यों जाना पड़ता है BIPARD? जानिए बिहार के LBSNAA की पूरी कहानी

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BIPARD बिहार का नाम आपने जरूर सुना होगा, खासकर अगर आप BPSC या किसी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। BIPARD बिहार को अक्सर "बिहार का LBSNAA" कहा जाता है, क्योंकि जिस तरह मसूरी स्थित LBSNAA में IAS अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है, उसी तरह गया स्थित BIPARD में बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में चयनित अधिकारियों को प्रशासनिक प्रशिक्षण मिलता है। BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम परिणाम आने के बाद यह संस्थान फिर चर्चा में है, क्योंकि चयनित अभ्यर्थियों की अगली मंजिल यही ट्रेनिंग सेंटर बनने वाला है।

सरकारी सेवा में चयन के बाद केवल परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं होता। एक सक्षम अधिकारी बनने के लिए व्यवहारिक प्रशिक्षण, प्रशासनिक समझ और नेतृत्व क्षमता विकसित करना भी जरूरी होता है। BIPARD इसी उद्देश्य को पूरा करता है।

क्या है BIPARD और क्यों कहा जाता है बिहार का LBSNAA?

BIPARD का पूरा नाम Bihar Institute of Public Administration & Rural Development है। यह गया जिले के कुशदिहरा, पहाड़पुर क्षेत्र में स्थित बिहार सरकार का प्रमुख प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान है।

झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद बिहार को अपने अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए अलग संस्थान की जरूरत महसूस हुई। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए BIPARD की स्थापना की गई। आज यह राज्य के सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग संस्थानों में शामिल है।

मसूरी स्थित LBSNAA की तर्ज पर विकसित आधुनिक सुविधाओं और प्रशिक्षण व्यवस्था के कारण इसे "बिहार का LBSNAA" कहा जाता है।

BIPARD कैंपस में मिलती हैं आधुनिक सुविधाएं

BIPARD का कैंपस आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था से लैस है। यहां हाईटेक क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, खुला खेल मैदान, छात्रावास और मेस जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हैं।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को पढ़ाई के साथ शारीरिक फिटनेस, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जाता है। यही वजह है कि यह संस्थान केवल कक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं रहता।

किन अधिकारियों को मिलती है यहां ट्रेनिंग?

BIPARD में केवल BPSC से चयनित अधिकारी ही नहीं आते, बल्कि कई अन्य सरकारी सेवाओं के अधिकारी भी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

यहां BPSC से चयनित प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा SSC के माध्यम से चयनित असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO), पब्लिक सैनिटेशन एवं वेस्ट मैनेजमेंट ऑफिसर, प्लानिंग असिस्टेंट, ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर, ब्लॉक हॉर्टिकल्चर ऑफिसर और अन्य विभागों के अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

इसके अलावा पंचायती राज प्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों के लिए भी समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

फाउंडेशन ट्रेनिंग में क्या सिखाया जाता है?

सरकारी सेवा में चयन के बाद प्रशिक्षण का पहला चरण फाउंडेशन ट्रेनिंग कहलाता है।

इस दौरान नए अधिकारियों को सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक नियम, फाइल वर्क, कानून-व्यवस्था, सरकारी प्रक्रियाओं और निर्णय लेने की प्रणाली की जानकारी दी जाती है।

कई बार सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस अधिकारी भी अपने अनुभव साझा करते हैं, जिससे प्रशिक्षुओं को वास्तविक प्रशासनिक चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है।

क्लासरूम से बाहर भी होती है लीडरशिप की तैयारी

BIPARD का प्रशिक्षण केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहता।

प्रशिक्षुओं को ट्रेकिंग, एडवेंचर कैंप, टीम बिल्डिंग एक्सरसाइज और माउंटेनियरिंग संस्थानों के शैक्षणिक भ्रमण में भी शामिल कराया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और कठिन परिस्थितियों में काम करने की मानसिक तैयारी विकसित करना होता है।

इसी कारण यहां का प्रशिक्षण व्यवहारिक अनुभव पर भी विशेष जोर देता है।

पर्यावरण और सामाजिक विकास पर भी रहता है फोकस

BIPARD प्रशासनिक प्रशिक्षण के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी विशेष ध्यान देता है।

संस्थान में पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और सुशासन जैसे विषयों पर नियमित कार्यशालाएं आयोजित होती हैं। कई कार्यक्रमों में यूनिसेफ जैसी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाता है ताकि अधिकारियों को समकालीन सामाजिक चुनौतियों की बेहतर समझ मिल सके।

BPSC 70वीं परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों की अगली मंजिल

BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में शामिल रही। इस परीक्षा के माध्यम से 2035 पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं और लगभग 5400 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू में भाग लिया।

अंतिम परिणाम में श्रद्धा पांडे ने 593 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। शशांक गौरव और आयुष बिजॉय क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। वहीं दरभंगा की प्रिया ने शीर्ष-10 में जगह बनाकर विशेष पहचान हासिल की।

हाजीपुर की डॉ. बिजेता कुमारी, जिनका चयन ग्रामीण विकास अधिकारी (Rural Development Officer) पद पर हुआ है, हाल ही में BIPARD में प्रशिक्षण के लिए पहुंची हैं। आने वाले समय में BPSC 70वीं के अन्य चयनित अभ्यर्थी भी इसी संस्थान में फाउंडेशन ट्रेनिंग प्राप्त करेंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है BIPARD?

BPSC परीक्षा पास करना प्रशासनिक सेवा की शुरुआत भर है। एक सक्षम अधिकारी बनने के लिए व्यवहारिक प्रशिक्षण, नेतृत्व क्षमता और सरकारी तंत्र की गहरी समझ विकसित करना जरूरी होता है।

BIPARD इसी उद्देश्य को पूरा करता है। यही कारण है कि इसे बिहार प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार करने वाला संस्थान माना जाता है और इसे "बिहार का LBSNAA" कहा जाता है।

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