बिहार के शिक्षकों को बड़ी राहत, 48 घंटे में मिलेगी छुट्टी, नया नियम
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बिहार शिक्षक छुट्टी की व्यवस्था अब ऑनलाइन होने जा रही है। बिहार शिक्षक छुट्टी के लिए आवेदन करने के बाद शिक्षकों को अधिकतम 48 घंटे के भीतर स्वीकृति देने की व्यवस्था की जाएगी। अगर तय समय में छुट्टी मंजूर नहीं हुई तो संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही तय होगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रविवार को पटना कॉलेजिएट स्कूल के 191वें स्थापना दिवस समारोह में यह जानकारी दी।
सरकार की इस नई व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों को जरूरत के अनुसार छुट्टी लेने में आने वाली प्रशासनिक परेशानियों को कम करना है। ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के बाद छुट्टी के आवेदन और उसकी स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की तैयारी है।
1 नवंबर से पूरे बिहार में लागू होगी व्यवस्था
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार शिक्षकों की छुट्टी के लिए ऑनलाइन व्यवस्था तैयार की जा रही है। सरकार इसे 1 नवंबर से राज्यभर के सरकारी स्कूलों में लागू करने की योजना बना रही है।
नई व्यवस्था के तहत शिक्षक ऑनलाइन छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन मिलने के बाद संबंधित पदाधिकारी को 48 घंटे के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा।
अगर निर्धारित अवधि में आवेदन पर कार्रवाई नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। इससे छुट्टी के आवेदन लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या कम होने की उम्मीद है।
छुट्टी को लेकर शिक्षकों की परेशानी होगी कम
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को कई बार छुट्टी के आवेदन की मंजूरी के लिए विभागीय स्तर पर इंतजार करना पड़ता है। नई ऑनलाइन व्यवस्था इसी प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश है।
शिक्षक अपनी जरूरत के अनुसार छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे और आवेदन की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी होगी। इससे आवेदन की स्थिति को ट्रैक करना भी आसान हो सकता है।
सरकार का फोकस फिलहाल शिक्षकों की सुविधाओं को बेहतर करने पर है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 31 अक्टूबर तक शिक्षकों के हित पर पूरा ध्यान दिया जाएगा, जबकि 1 नवंबर से छात्र हित को प्राथमिकता दी जाएगी।
मॉडल स्कूलों में मुफ्त इंजीनियरिंग-मेडिकल तैयारी
शिक्षा मंत्री ने राज्य में शुरू किए गए मॉडल स्कूलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मॉडल स्कूलों की शुरुआत की है, जहां विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी कराने की पहल की जा रही है।
हालांकि, इस योजना के प्रभाव का वास्तविक आकलन तुरंत नहीं किया जाएगा। शिक्षा मंत्री के अनुसार इसके परिणामों का मूल्यांकन करीब दो से तीन साल बाद किया जाएगा।
सरकार यह देखना चाहती है कि इन प्रयासों से विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ता है।
पटना कॉलेजिएट स्कूल में 191वां स्थापना दिवस
यह घोषणा पटना कॉलेजिएट स्कूल के 191वें स्थापना दिवस सह पूर्ववर्ती छात्र मिलन समारोह के दौरान की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में कुम्हरार विधायक संजय गुप्ता, फुलवारी विधायक श्याम रजक, पूर्व विधायक अरुण कुमार सिन्हा, विद्यालय की प्राचार्य सरिता शर्मा, समाजसेवी कमल नोपानी और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय प्रिय सहित कई पूर्ववर्ती छात्र मौजूद रहे।
इस अवसर पर विद्यालय के सोवेनियर का भी लोकार्पण किया गया। समारोह में स्कूल के पुराने छात्रों ने अपने अनुभव और विद्यालय से जुड़ी यादें साझा कीं।
पुरातन छात्रों के सहयोग से बदलेगा स्कूल
शिक्षा मंत्री ने पटना कॉलेजिएट स्कूल के एलुमनाई एसोसिएशन की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य के दूसरे विद्यालयों के पूर्ववर्ती छात्रों को भी इसी तरह अपने पुराने स्कूलों के विकास में योगदान देना चाहिए।
उनके मुताबिक, पुरातन छात्रों के सहयोग से विद्यालयों में संसाधनों और सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे सरकारी स्कूलों के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
पटना कॉलेजिएट स्कूल की प्राचार्य सरिता शर्मा ने समारोह के दौरान घोषणा की कि विद्यालय परिसर में एलुमनाई एसोसिएशन को कार्यालय के लिए जगह उपलब्ध कराई जाएगी।
191 साल पुराना स्कूल, इतिहास पर गर्व
कार्यक्रम में शामिल जनप्रतिनिधियों और पूर्व छात्रों ने पटना कॉलेजिएट स्कूल के लंबे इतिहास को याद किया। कुम्हरार विधायक संजय गुप्ता ने विद्यालय के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख किया।
फुलवारीशरीफ विधायक और पूर्ववर्ती छात्र श्याम रजक ने भी स्कूल से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं। पूर्व विधायक अरुण कुमार सिन्हा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय प्रिय और समाजसेवी कमल नोपानी समेत अन्य अतिथियों ने इसे गौरव का अवसर बताया।
समारोह का मुख्य उद्देश्य सिर्फ स्थापना दिवस मनाना नहीं था, बल्कि पुराने छात्रों को विद्यालय से जोड़कर उसके विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाना भी रहा।
शिक्षकों से लेकर छात्रों तक फोकस बदलने की तैयारी
शिक्षा विभाग की नई प्राथमिकताओं में शिक्षकों की प्रशासनिक सुविधाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य की तैयारी पर भी जोर दिखाई दे रहा है।
एक ओर 1 नवंबर से शिक्षकों की छुट्टी को ऑनलाइन और समयबद्ध करने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर मॉडल स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी जैसी योजनाओं पर भी काम हो रहा है।
अब आने वाले समय में इस ऑनलाइन छुट्टी व्यवस्था के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 48 घंटे की समयसीमा का पालन किस तरह होता है और देरी की स्थिति में अधिकारियों पर किस प्रकार की जवाबदेही तय की जाती है।
