बिहार को केंद्र का बड़ा तोहफा, 82 किमी फोरलेन सड़क पर 3591 करोड़
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार NH-22 फोरलेन प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की बड़ी मंजूरी मिल गई है। बिहार NH-22 फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को चार लेन में अपग्रेड किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 19 अगस्त को हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
करीब 82.578 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 3,590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सड़क का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर बिहार में आवागमन, माल ढुलाई और भारत-नेपाल सीमा से जुड़ी कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक सफर होगा आसान
प्रस्तावित फोरलेन कॉरिडोर मुजफ्फरपुर से शुरू होकर मकसूदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुताही होते हुए सोनबरसा तक जाएगा। यह इलाका घनी आबादी और महत्वपूर्ण व्यापारिक गतिविधियों वाला क्षेत्र है।
फोरलेन बनने के बाद इन इलाकों में मौजूदा ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है। यात्रियों के साथ-साथ कृषि उत्पाद और अन्य माल की आवाजाही भी पहले की तुलना में तेज हो सकती है।
परियोजना को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड और 80 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। सड़क के बीच अनियंत्रित कट यानी एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं रखने का प्रावधान है, जिससे यातायात व्यवस्था अधिक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
बागमती नदी पर बनेगा 340 मीटर लंबा पुल
इस परियोजना में केवल सड़क चौड़ीकरण ही नहीं, बल्कि कई बड़े निर्माण कार्य भी शामिल हैं। योजना के तहत सात बड़े पुल बनाए जाएंगे। इनमें बागमती नदी पर प्रस्तावित 340 मीटर लंबा पुल भी शामिल है।
इसके अलावा तीन रेलवे ओवरब्रिज और दो फ्लाईओवर बनाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई 1,170 मीटर और 270 मीटर होगी।
इन संरचनाओं का उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग, नदी और व्यस्त क्षेत्रों में यातायात को सुचारू रखना है। इससे सड़क पर रुकावट कम होने और यात्रा के समय में कमी आने की उम्मीद है।
भारत-नेपाल सीमा तक बेहतर होगी कनेक्टिविटी
मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन का महत्व केवल स्थानीय यातायात तक सीमित नहीं है। सोनबरसा के रास्ते यह मार्ग भारत-नेपाल सीमा से जुड़ता है और मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्र को सीमा क्षेत्र से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण फीडर कॉरिडोर के रूप में काम करता है।
यह कॉरिडोर NH-27 यानी पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर से भी जुड़ता है। इसके अलावा NH-31 और NH-122 जैसे प्रमुख मार्गों के साथ बेहतर संपर्क बनने से क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिल सकती है।
परियोजना से भीठा-मोड़ लैंड पोर्ट के जरिए सीमा पार यात्रियों और माल की आवाजाही को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे सीमावर्ती व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
कृषि और उद्योग को भी मिलेगा फायदा
सरकार के अनुसार, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का असर केवल यात्रियों पर नहीं पड़ेगा। कृषि उत्पादों और दूसरे माल की सप्लाई चेन को भी इससे फायदा हो सकता है।
मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के रेलवे स्टेशनों सहित क्षेत्र के प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक सड़क संपर्क बेहतर होगा। इससे माल को बाजार और परिवहन केंद्रों तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
परियोजना के जरिए पांच पीएम गतिशक्ति आर्थिक केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की बात कही गई है। इनमें चार औद्योगिक क्षेत्र और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान
फोरलेन परियोजना का फायदा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच में भी मिलने की उम्मीद है। सीतामढ़ी स्थित माता जानकी से जुड़े धार्मिक स्थलों और पुनौरा धाम जैसे महत्वपूर्ण स्थानों तक सड़क संपर्क बेहतर होगा।
इसके साथ ही बौद्ध सर्किट से जुड़े क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क से स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और अन्य सेवा क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
पांच परियोजनाओं पर 13 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च
बुधवार की कैबिनेट बैठक में बिहार की इस सड़क परियोजना के अलावा रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। इन चार रेल परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये बताई गई है।
इनमें खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) के बीच 173 किलोमीटर चौथी लाइन, भद्रक-हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर चौथी लाइन, गुम्मिडिपुंडी-गुडूर के बीच 90 किलोमीटर तीसरी और चौथी लाइन तथा कटक-पारादीप के बीच 72 किलोमीटर तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं।
बिहार की NH-22 परियोजना पर 3,590.73 करोड़ रुपये और इन चार रेल परियोजनाओं पर करीब 9,450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस तरह पांचों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 13,041 करोड़ रुपये बताई गई है।
कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा फोरलेन परियोजना उत्तर बिहार के लिए सड़क, व्यापार, कृषि, पर्यटन और सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब परियोजना के निर्माण और समयसीमा को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
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