बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: एक्सप्रेसवे, नलकूप और AI पर मुहर
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में कैबिनेट फैसला बुधवार को राज्य के विकास से जुड़े कई बड़े बदलावों की वजह बना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कैबिनेट फैसला के तहत कुल 13 एजेंडों को मंजूरी मिली। सड़क, सिंचाई, कृषि, भंडारण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार ने हरी झंडी दी है। सबसे बड़ा आकर्षण बक्सर से भागलपुर के बीच 336 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव है। इसके अलावा किसानों के लिए 11 हजार निजी नलकूप और ग्रामीण स्तर पर नई भंडारण क्षमता विकसित करने का भी निर्णय लिया गया है।
इन फैसलों से सरकार ने बुनियादी ढांचे के साथ-साथ खेती और तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर दिया है। अब इन योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
बक्सर-भागलपुर के बीच बनेगा 336 किमी एक्सप्रेसवे
बिहार की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने बक्सर से भागलपुर तक 336 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के सैद्धांतिक प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे अरवल, जहानाबाद, नालंदा और जमुई सहित कई जिलों से होकर गुजरने की योजना है। इसे नियंत्रित प्रवेश वाला मार्ग बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि वाहनों को निर्धारित स्थानों से ही एक्सप्रेसवे पर प्रवेश और बाहर निकलने की सुविधा मिलेगी।
परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसके लिए बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) की भूमिका रहेगी।
इस एक्सप्रेसवे के बनने से संबंधित जिलों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने और लंबी दूरी के सफर में समय कम होने की उम्मीद है। साथ ही परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
किसानों के लिए 11 हजार निजी नलकूपों को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में कृषि और सिंचाई से जुड़ा भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11 हजार निजी नलकूप लगाए जाएंगे।
इसके लिए सरकार ने 305.60 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए बेहतर जल सुविधा उपलब्ध कराना है।
बिहार में खेती का बड़ा हिस्सा सिंचाई की उपलब्धता पर निर्भर करता है। ऐसे में निजी नलकूपों की संख्या बढ़ने से किसानों को जरूरत के समय पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
सरकार की इस पहल का असर खास तौर पर उन किसानों पर पड़ सकता है, जिन्हें सिंचाई के लिए बारिश या सीमित जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
कटिहार की नहरों के पुनर्स्थापन पर भी मुहर
सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कटिहार जिले में नहर प्रणालियों के पुनर्स्थापन का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है।
सिंचाई प्रमंडल, कटिहार के तहत कटिहार वितरणी के साथ फूलपुर, हसनगंज, बैजनाथपुर और सेमापुर उप-वितरणियों से जुड़ी नहर प्रणालियों के पुनर्स्थापन का काम किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए 35.82 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और व्यय स्वीकृति दी गई है। नहरों की स्थिति बेहतर होने से कृषि क्षेत्रों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बिहार में AI और तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में भी नई पहल को मंजूरी दी है। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और टायो (Taiyo) AI इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।
इस पहल का उद्देश्य बिहार में AI से जुड़े अवसरों, तकनीकी क्षमता और इनोवेशन को बढ़ावा देना है। इससे सरकारी और निजी क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
AI को लेकर देशभर में तेजी से काम हो रहा है। ऐसे में बिहार सरकार का यह कदम राज्य को उभरती तकनीकों के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
गांव-पंचायत स्तर पर बढ़ेगी भंडारण क्षमता
कैबिनेट ने सहकारिता क्षेत्र से जुड़ा भी अहम फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 48,200 मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई है।
इसके तहत 200, 500 और 1,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जाएंगे। इसके लिए 52 चयनित समितियों को कुल 34.95 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
इस राशि का 50 प्रतिशत अनुदान और बाकी 50 प्रतिशत चक्रीय पूंजी के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। ग्रामीण और पंचायत स्तर पर भंडारण व्यवस्था मजबूत होने से कृषि उपज को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
किसानों को उपज रखने में मिलेगी सुविधा
गांव के आसपास गोदाम उपलब्ध होने का सीधा लाभ किसानों को मिल सकता है। फसल रखने की सुविधा होने पर किसानों पर कटाई के तुरंत बाद उपज बेचने का दबाव कम हो सकता है।
स्थानीय भंडारण व्यवस्था मजबूत होने से सहकारी समितियों की भूमिका भी बढ़ेगी। सरकार की कोशिश उत्पादन के साथ-साथ फसल के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ाने की है।
कुल मिलाकर बिहार कैबिनेट के 13 फैसलों में सड़क, सिंचाई, कृषि, भंडारण और AI जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को शामिल किया गया है। अब इन योजनाओं की वास्तविक प्रगति और जमीन पर इनके क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।
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