बिहार में शराबबंदी पर फिर घमासान, भाई वीरेंद्र ने सरकार को घेरा

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पटना में बिहार शराबबंदी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बिहार शराबबंदी की प्रभावशीलता पर राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) की रिपोर्ट और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान के बाद अब राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने शराबबंदी को उसके मौजूदा क्रियान्वयन के तरीके में विफल बताते हुए सरकार से नीति की समीक्षा करने की मांग उठाई। विधायक ने शराब की कथित तस्करी, पुलिस की भूमिका और कानून-व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े किए।

भाई वीरेंद्र ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजद शराबबंदी के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है। उनका कहना था कि जिस तरीके से बिहार में इसे लागू किया जा रहा है, उससे नीति के मूल उद्देश्य हासिल नहीं हो पा रहे हैं।

शराबबंदी को लेकर क्यों गरमाई सियासत?

बिहार में शराबबंदी लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। अब NCAER की रिपोर्ट के बाद इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने शराबबंदी को उसके उद्देश्यों में पूरी तरह सफल नहीं होने की बात कही थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार की शराब नीति को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि शराबबंदी लागू करने से पहले पर्याप्त सर्वेक्षण और व्यापक तैयारी की जरूरत थी। उनके मुताबिक, अचानक फैसला लेने के बजाय सरकार को सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करना चाहिए था।

हालांकि, शराबबंदी को लेकर उनका रुख पूरी तरह विरोध का नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजद शराबबंदी के पक्ष में है, लेकिन इसके मौजूदा क्रियान्वयन पर सवाल उठाता है।

'घर-घर शराब पहुंचने' का लगाया आरोप

भाई वीरेंद्र ने बिहार में शराब की कथित अवैध आपूर्ति को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंध के बावजूद राज्य में लोगों तक शराब पहुंच रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बिहार में शराब की बिक्री और सेवन प्रतिबंधित है, तो दूसरे राज्यों और नेपाल से शराब राज्य के अंदर कैसे पहुंच रही है।

राजद विधायक ने सीमावर्ती इलाकों से शराब तस्करी का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने अधिकारियों की कथित मिलीभगत का आरोप लगाया और कहा कि बड़े स्तर पर तस्करी होने के बावजूद कार्रवाई सीमित दिखाई देती है।

उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए शराबबंदी को लेकर चल रही व्यवस्था को दिखावटी करार दिया। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आए हैं और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है।

पुलिस और कानून-व्यवस्था पर भी हमला

शराबबंदी के साथ-साथ भाई वीरेंद्र ने बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा।

उन्होंने कहा कि राज्य में दिनदहाड़े हत्या जैसी घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। उनके मुताबिक, कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार को जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को और प्रभावी बनाना चाहिए।

डायल-112 की गाड़ियों की मौजूदगी का जिक्र करते हुए राजद विधायक ने पुलिस गश्ती व्यवस्था पर तंज कसा। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आपातकालीन सेवा की गाड़ियां मौजूद रहने के बावजूद अपराध होते हैं, तो अपराध रोकने के लिए नियमित पुलिस पेट्रोलिंग कितनी प्रभावी है।

उनकी इस टिप्पणी ने पुलिस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

विपक्ष की भूमिका पर भी दिया जवाब

भाई वीरेंद्र ने विपक्ष की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार को उसकी जिम्मेदारियों के प्रति लगातार सचेत करना है।

उन्होंने खुद को विपक्ष की भूमिका में ‘चौकीदार’ बताते हुए कहा कि उनका दायित्व सरकार को जगाना और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना है।

इसी क्रम में उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मामलों पर भी सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि व्यवस्था में निचले स्तर के कर्मचारियों के साथ भी उचित व्यवहार नहीं हो रहा है।

युवा मुख्यमंत्री से कानून-व्यवस्था सुधारने की उम्मीद

राजद विधायक ने मुख्यमंत्री की उम्र और नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें युवा मुख्यमंत्री से बिहार में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है।

उन्होंने सरकार से कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देने और अपराध पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनके अनुसार, आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत करने के लिए पुलिस प्रशासन को जवाबदेह और सक्रिय बनाना जरूरी है।

बिहार में शराबबंदी और अपराध दोनों ही ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते रहे हैं। ऐसे में भाई वीरेंद्र का बयान इस बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

अधिकारियों को मजिस्ट्रेट की शक्ति देने पर सवाल

राजद विधायक ने पदाधिकारियों को मजिस्ट्रेट की शक्तियां दिए जाने के मुद्दे पर भी आपत्ति जताई।

उन्होंने आशंका जताई कि अधिकारियों को अतिरिक्त शक्तियां मिलने से उनके स्तर पर मनमानी की संभावना बढ़ सकती है। उनका कहना था कि प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल के साथ जवाबदेही और निगरानी की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।

इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया इस जानकारी में सामने नहीं आई है।

शराबबंदी पर आगे क्या?

बिहार में शराबबंदी को लेकर जारी राजनीतिक बहस अब केवल शराब की बिक्री और तस्करी तक सीमित नहीं रह गई है। इसके साथ कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही, सीमावर्ती इलाकों की निगरानी और पुलिस व्यवस्था जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं।

NCAER की रिपोर्ट, जीतन राम मांझी की टिप्पणी और अब भाई वीरेंद्र के बयान के बाद शराबबंदी की प्रभावशीलता पर चर्चा तेज होना तय माना जा रहा है।

फिलहाल सरकार की ओर से शराबबंदी नीति में किसी बड़े बदलाव की घोषणा की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

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