बिहार में परीक्षा सुधार का बड़ा ऐलान, हाईकोर्ट जज की निगरानी में कमेटी; सीएम सम्राट Gen Z पर मेहरबान

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बिहार परीक्षा सुधार को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा ऐलान किया है। बिहार परीक्षा सुधार के लिए हाईकोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में एक विशेष कमेटी गठित करने की बात मुख्यमंत्री ने कही। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में पहली बार मुख्यमंत्री के तौर पर तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार की योजनाएं सामने रखीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी की खबर छात्रों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय बनती है। परीक्षा से युवाओं का करियर जुड़ा होता है, इसलिए सरकार निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था तैयार करना चाहती है।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनेगी गुणवत्ता कमेटी

सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को ज्ञान की भूमि माना जाता है। ऐसे में राज्य की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को बेहतर करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय गुणवत्ता कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी राज्य में शिक्षा के मौजूदा स्तर का आकलन करेगी और सुधार के लिए जरूरी सुझाव देगी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक पढ़ाई के पैटर्न और मूल्यांकन पद्धति में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देना और शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करना है।

सरकार का फोकस केवल स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पढ़ाई और मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी प्रभावी बनाने पर रहेगा।

हाईकोर्ट जज की निगरानी में होगी परीक्षा व्यवस्था

परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्यमंत्री ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परीक्षा में धांधली की खबरें सामने आने से छात्रों में निराशा पैदा होती है, क्योंकि उनका भविष्य और करियर इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीश के नेतृत्व में एक कमेटी गठित करने की घोषणा की गई। यह टीम परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी।

सरकार का उद्देश्य परीक्षा को फ्री एंड फेयर बनाना है, ताकि विद्यार्थियों को परिणाम को लेकर भरोसा रहे। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना इस प्रस्तावित कमेटी की अहम जिम्मेदारी होगी।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब देश में भी परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर छात्रों की चिंताएं लगातार चर्चा में रही हैं।

17 अगस्त से शुरू होगा विद्यार्थी सहयोग पोर्टल

मुख्यमंत्री ने छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए एक और अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि 17 अगस्त से विद्यार्थी सहयोग पोर्टल स्थापित किया जाएगा।

इस पोर्टल के जरिए छात्र अपनी समस्याओं और शिकायतों को सरकार तक पहुंचा सकेंगे। यदि किसी विद्यार्थी को अपने संस्थान, कोचिंग सेंटर, हॉस्टल या अन्य स्थान पर परेशानी आती है तो वह पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेगा।

सरकार संबंधित मामले में पहल करते हुए कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की शिकायतों का 20 दिनों के भीतर निष्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिकायतों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और उनकी समस्याओं के लिए एक केंद्रीकृत माध्यम उपलब्ध कराना है।

2030 तक एक करोड़ युवाओं को रोजगार का लक्ष्य

स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में मुख्यमंत्री ने रोजगार को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 से पहले राज्य के एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी या रोजगार उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि पुलिस बल में युवाओं की भर्ती की जा रही है और खाली पदों की पहचान कर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

सरकार रोजगार के साथ युवाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देने की बात कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लड़कियों के स्कूल और कॉलेज के आसपास ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती की जाएगी।

इसका उद्देश्य छात्राओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल पुलिस सहायता दिलाना है।

शिक्षा का बजट बढ़ाने का भी दावा

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट में बढ़ोतरी की है। सरकार का मानना है कि शिक्षा में निवेश बढ़ाकर ही राज्य के युवाओं के लिए बेहतर अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

गुणवत्ता कमेटी, परीक्षा सुधार कमेटी और विद्यार्थी सहयोग पोर्टल को इसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। अब इन घोषणाओं के प्रभाव का आकलन इनके लागू होने के बाद किया जाएगा।

मोकामा में बनेगा बालाजी तिरुपति मंदिर

सम्राट चौधरी ने धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से जुड़ी घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि पटना जिले के मोकामा में भगवान परशुराम मंदिर के पास बालाजी तिरुपति की स्थापना की जाएगी।

इसके लिए तिरुपति ट्रस्ट काम करेगा, जबकि राज्य सरकार की ओर से 10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इस परियोजना से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इसके निर्माण और आगे की प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान सामने आएगी।

छात्रों के लिए घोषणाओं का क्या मतलब?

मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता मिली। परीक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी, शिक्षा गुणवत्ता के लिए अलग उच्च स्तरीय समिति और विद्यार्थियों की शिकायतों के लिए पोर्टल की घोषणा खास तौर पर महत्वपूर्ण है।

अब छात्रों और अभिभावकों की नजर इन घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रहेगी। खासकर विद्यार्थी सहयोग पोर्टल के शुरू होने और परीक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों से छात्रों को कितनी राहत मिलती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।


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