मंत्री के सामने मांगी 50 हजार की रिश्वत, कर्मचारी बर्खास्त; पेपर लीक में 3 जेल

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बिहार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज होती दिख रही है। बिहार भ्रष्टाचार से जुड़े दो बड़े मामलों ने शनिवार को सुर्खियां बटोरीं। एक ओर सीतामढ़ी में कैबिनेट मंत्री लखेंद्र पासवान के सामने ही अनुदान राशि जारी करने के बदले 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का मामला सामने आया, जिसके बाद संबंधित डाटा एंट्री ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। वहीं दूसरी ओर बिहार होमगार्ड हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

मंत्री की जनसुनवाई में खुली रिश्वतखोरी की पोल

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान के आवास पर आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में सोनवर्षा थाना क्षेत्र से आए एक शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाया।

शिकायतकर्ता का कहना था कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली अनुदान राशि जारी करने के बदले जिला कल्याण कार्यालय, सीतामढ़ी में तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार ने 50 हजार रुपये की मांग की है।

मंत्री ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही शिकायतकर्ता से संबंधित कर्मचारी को फोन लगाने के लिए कहा।

स्पीकर ऑन होते ही सामने आ गई पूरी बात

शिकायतकर्ता ने मंत्री के सामने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर फोन लगाया। बातचीत के दौरान आरोपित डाटा एंट्री ऑपरेटर ने कथित रूप से अनुदान राशि जारी करने के बदले 50 हजार रुपये की मांग दोहराई।

यह सुनते ही मंत्री लखेंद्र पासवान ने तत्काल सीतामढ़ी के जिला कल्याण पदाधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दिया।

इसके बाद जिला कल्याण पदाधिकारी ने बेल्ट्रोन को पत्र भेजकर संविदा कर्मी चंदन कुमार की सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की।

मंत्री बोले- रिश्वत मांगने वालों को नहीं मिलेगी राहत

मंत्री लखेंद्र पासवान ने स्पष्ट कहा कि सरकार गरीब, वंचित और पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पात्र लाभार्थियों को अनुदान राशि समय पर, पारदर्शी तरीके से और बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराई जाए।

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

पेपर लीक मामले में EOU की बड़ी कार्रवाई

इधर, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित बिहार होमगार्ड हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने भी बड़ी कार्रवाई की है।

EOU ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

गिरफ्तार आरोपियों में परीक्षार्थी राज समदर्शी उर्फ राजा, उसका सहयोगी अभिषेक कुमार और बायोमेट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार शामिल हैं।

जांच में कैसे खुला पूरा नेटवर्क?

EOU के अनुसार, 29 जुलाई को राज्य के 13 जिलों के 227 परीक्षा केंद्रों पर लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी।

जांच के दौरान पहले से मिले इनपुट के आधार पर हाजीपुर के परीक्षा केंद्र के पास से राज समदर्शी को हिरासत में लिया गया।

पूछताछ में उसने परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल की बात स्वीकार की। उसने अपने सहयोगी अभिषेक कुमार का नाम भी बताया।

जांच में यह भी सामने आया कि अप्रैल 2026 में आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा में भी अनुचित साधनों के उपयोग की बात स्वीकार की गई।

मोबाइल से मिले अहम सबूत

EOU ने बताया कि राज समदर्शी और अभिषेक कुमार के मोबाइल फोन की जांच में कई परीक्षा प्रवेश पत्र, उत्तर पत्रक (आंसर-की) और अन्य दस्तावेज मिले हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, हवलदार अनुदेशक परीक्षा में बायोमेट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार के माध्यम से प्रश्नों के उत्तर परीक्षार्थी तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।

फिलहाल मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई जारी है।

भ्रष्टाचार और परीक्षा पारदर्शिता पर सरकार का फोकस

एक ही दिन सामने आए इन दोनों मामलों ने यह संकेत दिया है कि सरकार भ्रष्टाचार और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों पर सख्त रुख अपनाने का दावा कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध जांच, पारदर्शी कार्रवाई और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई से सरकारी योजनाओं तथा भर्ती परीक्षाओं पर लोगों का भरोसा मजबूत हो सकता है।

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