भरत तिवारी एनकाउंटर: संजीत कुमार की नई पोस्टिंग, बने सुपौल DCLR

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Bharat Tiwari Encounter
मामले के बाद चर्चा में रहे जगदीशपुर के तत्कालीन SDO संजीत कुमार को बिहार सरकार ने नई जिम्मेदारी दी है। Bharat Tiwari Encounter से जुड़े घटनाक्रम के दौरान भोजपुर में तैनात रहे संजीत कुमार को अब सुपौल सदर का भूमि सुधार उप समाहर्ता यानी DCLR बनाया गया है। शनिवार को बिहार सरकार ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई अधिकारियों का तबादला और पदस्थापन किया, जिसमें उनका नाम भी शामिल है। सरकार ने इस फेरबदल में 3 IAS अधिकारियों और बिहार प्रशासनिक सेवा के 12 अधिकारियों का तबादला किया है। इसके अलावा पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे 44 अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संजीत कुमार की नई पोस्टिंग के बाद एक बार फिर भरत तिवारी एनकाउंटर से जुड़ा मामला चर्चा में आ गया है। हालांकि, उनके तबादले और मामले की न्यायिक जांच को अलग-अलग प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तौर पर देखा जा रहा है।

संजीत कुमार को सुपौल सदर का DCLR बनाया गया

बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीत कुमार अब सुपौल सदर में भूमि सुधार उप समाहर्ता यानी DCLR की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले वह भोजपुर जिले के जगदीशपुर अनुमंडल में SDO के पद पर तैनात थे। नई अधिसूचना के तहत उन्हें सुपौल भेजा गया है। DCLR के रूप में उनकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से भूमि सुधार और राजस्व से जुड़े प्रशासनिक मामलों से संबंधित होगी। प्रशासनिक फेरबदल की सूची में संजीत कुमार का नाम सामने आने के बाद भरत तिवारी मामले से जुड़े पुराने घटनाक्रम की भी चर्चा शुरू हो गई है। उनका नाम उस समय जगदीशपुर के SDO के रूप में सामने आया था। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मामले में न्यायिक जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

24 जुलाई को जगदीशपुर SDO पद से हटाए गए थे

संजीत कुमार को इससे पहले 24 जुलाई 2026 को जगदीशपुर के SDO पद से हटाया गया था। उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग, पटना में वापस बुला लिया गया था। उसके बाद वह करीब एक महीने तक नई पोस्टिंग की प्रतीक्षा में रहे। अब बिहार सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के दौरान उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपते हुए सुपौल सदर का DCLR नियुक्त किया है। शनिवार को जारी तबादला और पदस्थापन सूची में कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। सरकार ने 3 IAS अधिकारियों के साथ बिहार प्रशासनिक सेवा के 12 अधिकारियों का तबादला किया है। इसके अलावा पहले से पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे 44 अधिकारियों को भी विभिन्न जिलों और विभागों में जिम्मेदारी दी गई है। संजीत कुमार का सुपौल तबादला भी इसी व्यापक प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा है।

भरत तिवारी की मौत के बाद उठा था बड़ा सवाल

भरत तिवारी की मौत 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई थी। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह मामला तेजी से चर्चा में आया। भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी और कार्रवाई से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल खड़े किए थे। उस समय संजीत कुमार जगदीशपुर के SDO के पद पर तैनात थे। इसी कारण मामले से जुड़े घटनाक्रम के दौरान उनका नाम तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों के रूप में चर्चा में रहा। हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों और जांच के अंतिम निष्कर्ष में अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

सरकार ने कराई स्वतंत्र न्यायिक जांच

घटना के बाद बिहार सरकार ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया था। इसके लिए एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया। पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया गया है। आयोग को घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। जांच आयोग की टीम बिलौटी गांव पहुंच चुकी है। टीम ने वहां भरत तिवारी के परिजनों से बातचीत की और घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेने का प्रयास किया। आयोग ने घटनास्थल का निरीक्षण भी किया है। न्यायिक जांच के जरिए पुलिस कार्रवाई, घटनाक्रम और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल की जा रही है।

जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की जांच अभी जारी है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले से जुड़े कई सवालों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच के निष्कर्ष ही आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दूसरी ओर, संजीत कुमार को नई प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकार ने उन्हें सुपौल सदर का DCLR नियुक्त किया है, जबकि भरत तिवारी मामले की न्यायिक जांच अपनी प्रक्रिया के तहत जारी है। इस पूरे मामले में दो बातें अलग-अलग हैं—पहली, संजीत कुमार की नई प्रशासनिक पोस्टिंग और दूसरी, भरत तिवारी की मौत की न्यायिक जांच। जांच पूरी होने तक आरोपों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

Bharat Tiwari Encounter: क्या है ताजा अपडेट?

  • तत्कालीन जगदीशपुर SDO संजीत कुमार को सुपौल सदर का DCLR बनाया गया।
  • उन्हें 24 जुलाई 2026 को जगदीशपुर SDO पद से हटाकर पटना बुलाया गया था।
  • करीब एक महीने तक वह नई पोस्टिंग की प्रतीक्षा में रहे।
  • 17 जून 2026 को पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी।
  • परिवार ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
  • मामले की न्यायिक जांच अभी जारी है।
  • जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित आयोग घटनास्थल का निरीक्षण और परिजनों से बातचीत कर चुका है।

 

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