भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा एक्शन, 11 अधिकारियों पर वारंट जारी
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भरत तिवारी एनकाउंटर केस में आरा व्यवहार न्यायालय ने बड़ा कदम उठाया है। भरत तिवारी एनकाउंटर केस में सीजेएम कोर्ट ने मामले से जुड़े प्राथमिक और अप्राथमिक अभियुक्तों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी 12 अगस्त 2026 से पहले सुनिश्चित की जाए। कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है।
यह मामला भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा है। मुठभेड़ के दौरान भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया था।
11 अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट
आरा व्यवहार न्यायालय के सीजेएम कोर्ट ने मामले में तत्कालीन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने सभी संबंधित आरोपियों को तय समय सीमा के भीतर गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है।
जिन लोगों के खिलाफ वारंट जारी होने की जानकारी सामने आई है, उनमें तत्कालीन SDM संजीत कुमार, SDPO राजेश शर्मा, थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और दारोगा अंकित आर्यन शामिल हैं।
इसके अलावा हरी चंद्र कुमार, STF जवान अक्षय कुमार, विकास कुमार, ASI रमाशंकर यादव समेत अन्य लोगों के नाम भी वारंट की कार्रवाई में शामिल बताए गए हैं।
अदालत के निर्देश के मुताबिक पुलिस प्रशासन को 12 अगस्त की समय सीमा से पहले आरोपियों की गिरफ्तारी करनी होगी। इस आदेश के बाद मामले में जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
BNS की धारा 73 के तहत कोर्ट का आदेश
सीजेएम कोर्ट ने नए आपराधिक कानून के तहत वारंट जारी करने की कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी में इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत कार्रवाई बताया गया है।
धारा के तहत अदालत संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध से जुड़े आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है। इस मामले में अदालत ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की है।
12 अगस्त 2026 तक गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश को मामले में अदालत के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, वारंट जारी होना अपने आप में आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है। आरोपियों के खिलाफ मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
17 जून को मुठभेड़ में हुई थी भरत तिवारी की मौत
मामले की शुरुआत 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ से हुई। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी को गोली लगी और उसकी मौत हो गई।
मुठभेड़ के बाद मृतक के परिवार और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। परिजनों ने आरोप लगाया कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि भरत तिवारी को कथित तौर पर साजिश के तहत गोली मारी गई।
परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। आरोप है कि इसके बाद अधिकारियों की मौजूदगी में उस पर गोली चलाई गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
विरोध के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
भरत तिवारी की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध और आक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और तत्कालीन SDPO समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
आरोपियों पर हत्या से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब सीजेएम कोर्ट की ओर से गैर-जमानती वारंट जारी होने से मामला एक नए कानूनी चरण में पहुंच गया है।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी सभी नामजद आरोपियों की तय समय सीमा में गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की है। आगे की जांच में मुठभेड़ की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और मृतक के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविकता महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल अदालत के आदेश ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब 12 अगस्त की समय सीमा और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
