अखिलेश यादव का BJP पर हमला, बोले- सवालों से डरती है सरकार
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👉 WhatsApp से जुड़ेंउत्तर प्रदेश के इटावा में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा गरीबों को शिक्षित और सशक्त होते नहीं देखना चाहती, क्योंकि शिक्षित व्यक्ति सरकार और सत्ता से सवाल पूछ सकता है। अखिलेश यादव ने कहा कि सवाल पूछने से डरने वाली राजनीति लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करती है।
शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सपा प्रमुख ने शिक्षा, इतिहास, महंगाई, विकास और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने भाजपा पर पाठ्यपुस्तकों में बदलाव और इतिहास को अलग तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये सभी आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक दावे हैं।
शिक्षा और सवाल पूछने के अधिकार पर क्या बोले अखिलेश
अखिलेश यादव ने शिक्षा को लोकतांत्रिक जागरूकता से जोड़ते हुए कहा कि गरीब व्यक्ति जब पढ़-लिखकर जागरूक होता है तो वह सत्ता से सवाल करने लगता है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि शक्तिशाली और सामंती सोच रखने वाले लोग गरीबों के शिक्षित होने से असहज होते हैं।
सपा प्रमुख ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो राजनीतिक व्यवस्था सवालों से डरती है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों का सवाल पूछना जरूरी है।
इतिहास और किताबों में बदलाव का लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने पाठ्यक्रम और इतिहास की किताबों को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को बदला जा रहा है और पुराने महापुरुषों से जुड़े कुछ अध्याय हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े व्यक्तित्वों को किताबों में अधिक महत्व देने की कोशिश हो रही है। अखिलेश के अनुसार, इससे देश के इतिहास को देखने और समझने का नजरिया प्रभावित हो सकता है।
सपा प्रमुख ने भाजपा को देश के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बताते हुए कहा कि सत्ता में बदलाव होने से कई समस्याओं का समाधान हो सकता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि भाजपा सरकार के अब तक लिए गए फैसलों का वास्तविक लाभ आम जनता को कितना मिला है।
इटावा और सैफई के विकास पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने अपने गृह क्षेत्र इटावा और सैफई से जुड़े विकास कार्यों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र की कई सार्वजनिक सुविधाओं और परियोजनाओं की उचित देखभाल नहीं हो रही है।
उन्होंने इटावा की लायन सफारी, स्टेडियम, स्कूल-कॉलेज और सैफई के एक्वेटिक सेंटर का जिक्र करते हुए सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए। इसके अलावा उन्होंने मिड-डे मील योजना के तहत मिलने वाले गर्म भोजन और शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए।
सपा प्रमुख ने अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ चलने वाली कार्रवाई पर भी सरकार से सवाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के मामले में समान मानदंड नहीं अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के एक कथित अवैध भवन में चाय पीने का जिक्र करते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाया।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में महंगाई, एक्सप्रेसवे, कृषि मंडियों और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों को भी शामिल किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस केवल समाज में विभाजन और जाति-धर्म के मुद्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जनता से जुड़े वास्तविक सवालों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने महंगाई और किसानों से जुड़े बाजारों की स्थिति का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की। अखिलेश के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा, विकास और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर बहस फिर तेज होने की संभावना है।
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