पटना में छात्रों के विभिन्न मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध के बीच पप्पू यादव ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, परीक्षा और सरकारी भर्तियों को लेकर युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग क्यों?
पप्पू यादव ने 70वीं BPSC परीक्षा में कथित पेपर लीक, मास एडिटिंग और ऑन-स्क्रीन मार्किंग जैसे आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के मन में जो सवाल हैं, उनका जवाब पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए।
सांसद ने पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बनाने की मांग की। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने कहा कि परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन और अभ्यर्थियों की रैंकिंग की भी जांच होनी चाहिए।
पप्पू यादव ने हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की चिंताओं का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, अभ्यर्थियों को मूल्यांकन व्यवस्था में समान अवसर और पर्याप्त पारदर्शिता मिलनी चाहिए।
डोमिसाइल और उम्र सीमा का मुद्दा भी उठा
उपवास के दौरान पप्पू यादव ने बिहार के युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने राज्य में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि बिहार के युवाओं के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने उम्र सीमा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों को भर्ती प्रक्रिया में स्पष्ट नियम और समान अवसर मिलना चाहिए।
पप्पू यादव ने कहा कि छात्रों और शोधार्थियों की कई मांगें लंबे समय से सामने आ रही हैं। रिसर्च फेलोशिप से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी उन्होंने रखी।
उनका कहना है कि युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
TRE-3, TRE-4 और दरोगा भर्ती का भी उठाया मुद्दा
सांसद ने सिर्फ 70वीं BPSC परीक्षा तक अपना विरोध सीमित नहीं रखा। उन्होंने TRE-3, TRE-4, BSSC और दरोगा भर्ती से जुड़े मामलों के समाधान की मांग भी की।
बिहार में शिक्षक भर्ती और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए इन मुद्दों का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। पप्पू यादव ने कहा कि अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों की समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार को आंदोलन और तेज करने की चेतावनी भी दी। उनके मुताबिक, यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जा सकता है।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज
पप्पू यादव ने कहा कि 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने और रिसर्च तथा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में लगाए गए आरोपों की जांच होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने आगे बिहार बंद और TRE-4 से जुड़े मुद्दों पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने की संभावना भी जताई। हालांकि, फिलहाल रविवार को उनका कार्यक्रम एक दिवसीय उपवास के रूप में सामने आया है।
छात्रों की ओर से उठाई जा रही मांगों में परीक्षा की पारदर्शिता, निष्पक्ष मूल्यांकन और भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता प्रमुख हैं। वहीं, सरकार और संबंधित भर्ती संस्थाओं की ओर से इन आरोपों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 70वीं BPSC परीक्षा का विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि यह राज्य की भर्ती और परीक्षा व्यवस्था में भरोसे से भी जुड़ा मुद्दा बन गया है।
अब देखना होगा कि पप्पू यादव के उपवास और अभ्यर्थियों के आंदोलन के बाद सरकार की ओर से क्या पहल होती है और परीक्षा रद्द करने समेत अन्य मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।
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