37 साल पहले श्रीदेवी की इस फिल्म ने बचाई थी यशराज की डूबती नैया

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श्रीदेवी की चांदनी फिल्म बॉलीवुड इतिहास की उन फिल्मों में शामिल है, जिसने ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि श्रीदेवी की चांदनी फिल्म ने मुश्किल दौर से गुजर रहे यशराज फिल्म्स को भी नई जिंदगी दी। साल 1989 में रिलीज हुई इस रोमांटिक फिल्म ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।

इस फिल्म का एक गाना आज भी शादी और संगीत समारोहों की पहली पसंद बना हुआ है। "मैं ससुराल नहीं जाउंगी, डोली रख दो कहारों" जैसे गीत ने दुल्हनों के सपनों को आवाज दी और आज भी यह गाना खूब पसंद किया जाता है।

‘चांदनी’ ने यशराज फिल्म्स को दिया नया जीवन

साल 1989 में रिलीज हुई फिल्म चांदनी का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर यश चोपड़ा ने किया था। उस समय यशराज फिल्म्स लगातार कई फिल्मों के असफल होने के कारण आर्थिक दबाव में था।

ऐसे समय में श्रीदेवी, ऋषि कपूर और विनोद खन्ना स्टारर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया।

फिल्म ने दर्शकों के बीच रोमांस, संगीत और भावनाओं का ऐसा मिश्रण पेश किया, जिसने इसे बड़ी सफलता दिलाई। यही वजह रही कि चांदनी को यशराज फिल्म्स के लिए एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट माना जाता है।

फिल्म का बजट करीब 8 करोड़ रुपये था, जबकि इसने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 27 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यह उस दौर के हिसाब से बहुत बड़ी सफलता थी।

श्रीदेवी का करियर बना नई ऊंचाई पर

चांदनी श्रीदेवी के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में से एक रही। फिल्म में उनके अभिनय, खूबसूरती और भावनात्मक किरदार ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।

इस फिल्म के बाद श्रीदेवी बॉलीवुड की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उनके फैशन स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस की भी खूब चर्चा हुई।

फिल्म का संगीत भी इसकी सबसे बड़ी ताकत बना। इसके कई गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं और शादी समारोहों में खास तौर पर बजाए जाते हैं।

खासकर "मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों" गाना दुल्हनों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है। इस गाने को आज भी शादी के संगीत कार्यक्रमों में देखा और सुना जाता है।

रेखा थीं पहली पसंद, फिर श्रीदेवी की हुई एंट्री

फिल्म चांदनी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा यह भी है कि यश चोपड़ा की पहली पसंद श्रीदेवी नहीं बल्कि रेखा थीं।

यश चोपड़ा पहले इस फिल्म में रेखा को मुख्य भूमिका में लेना चाहते थे, लेकिन रेखा ने यह फिल्म करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने श्रीदेवी का नाम सुझाया।

श्रीदेवी के फिल्म से जुड़ने के बाद पूरी कहानी बदल गई। उन्होंने चांदनी के किरदार को इतनी खूबसूरती से निभाया कि यह भूमिका उनके करियर की पहचान बन गई।

अनिल कपूर को मिला था रोल, लेकिन बदली स्टारकास्ट

फिल्म की कास्टिंग को लेकर भी कई बदलाव हुए थे। शुरुआत में ऋषि कपूर के साथ अनिल कपूर को लेने की योजना थी।

बताया जाता है कि अनिल कपूर व्हीलचेयर वाले किरदार को निभाने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद यह भूमिका ऋषि कपूर को मिली।

वहीं दूसरे अहम किरदार के लिए विनोद खन्ना को शामिल किया गया। ऋषि कपूर और विनोद खन्ना दोनों ने फिल्म में अपनी अलग छाप छोड़ी।

152 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया गाना

चांदनी का संगीत आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। फिल्म के गाने शादी, त्योहार और पारिवारिक कार्यक्रमों में लगातार सुनाई देते हैं।

"मैं ससुराल नहीं जाउंगी डोली रख दो कहारों" गाने ने समय के साथ अपनी लोकप्रियता कायम रखी है। यूट्यूब पर इस गाने को करोड़ों बार देखा जा चुका है और नई पीढ़ी भी इसे पसंद करती है।

यही वजह है कि 37 साल बाद भी चांदनी सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय शादी और संगीत संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है।

क्यों खास है ‘चांदनी’ की विरासत?

फिल्म चांदनी ने साबित किया कि अच्छी कहानी, शानदार कलाकार और यादगार संगीत मिलकर इतिहास बना सकते हैं।

इस फिल्म ने श्रीदेवी को नई पहचान दी, यशराज फिल्म्स को मजबूती दी और बॉलीवुड को एक ऐसी प्रेम कहानी दी जिसे आज भी याद किया जाता है।

37 साल बाद भी इस फिल्म के गाने और किरदार लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। यही किसी महान फिल्म की असली सफलता होती है।

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